वाद और व्यवस्था बदली, भूखे, नंगे लोग क्यों?मानसिक और शारीरिक, पहले से ज्यादा रोग क्यों? शोषण भ्रष्टाचार आज, विश्व में समाया क्यों?तेरे होते हुए बता, मत्स्यराज आया क्यों? भौतिक सुख समृद्घि पाकर, मानव है अशांत क्यों?भय तनाव संशय आदि से, विश्व है दिग्भ्रांत क्यों? मानव ही मानव से, आज इतना क्रुद्घ क्यों?तेरे होते हुए बता, […]
Author: अमन आर्य
प्रीति सोनी आजादी की 69 वर्षगांठ को पूरा भारत उत्साह के साथ मना रहा है…. क्यों न आप भी अपनी व्यक्तिगत आजादी को पहचानकर उसका उत्सव मनाएं। व्यक्तिगत आजादी के लिए जरूरी है, आपका कुछ चीजों से आजाद होना और कुछ चीजों को खुद से आजाद करना। तभी तो मनाया जा सकेगा सच्ची आजादी का […]
कड़वे तेल के नाम से पारंपरिक रूप से प्रयोग किया जाने वाला सरसों का तेल अपनी तासीर और गुणों के कारण कई तरह की समस्याओं में औषधि? के रूप में भी उपयोग किया जाता है। अगर आप अब तक इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों से अनजान हैं, तो जरूर पढ़ें, नीचे दिए जा रहे सरसों के तेल […]
नाक की लड़ाई बना संसदीय हंगामा
उमेश चतुर्वेदी लोकसभा से कांग्रेस के 25 सांसदों के निलंबन के बाद कांग्रेस का आक्रामक होना स्वाभाविक ही है। लोकतांत्रिक समाज में विपक्ष अक्सर ऐसे अवसरों की ताक में रहता है, ताकि वह खुद को शहीद साबित करके जनता की नजरों में चढ़ सके। ठीक सवाल साल पहले मिली ऐतिहासिक और करारी हार से पस्त […]
प्रमोद भार्गव रेलवे में सुरक्षा इंतजामों के तहत वाइफाइ व्यवस्था शुरू करने से पहले उन ग्यारह हजार चार सौ तिरसठ पार-पथों पर भूतल और उपरिगामी पुलों की जरूरत है, जो मानव रहित हैं। इनके अलावा सात हजार तीन सौ बाईस फाटक वाले पार पथ भी हैं। इन सभी पुलों पर आए दिन हादसे होते रहते […]
पैरोडी बनता बिहार चुनाव
विडंबना है कि बिहार के चुनावों को पैरोडी में तबदील कर दिया गया है। पैरोडी के मायने हैं-किसी बात को तोड़-मरोड़ कर, नई तुकबंदी के साथ कहना। बेशक प्रधानमंत्री मोदी हों या नीतीश कुमार-लालू यादव, वे पुख्ता मुद्दों और भावी विकास के ब्लू प्रिंट पेश करने के बजाय पैरोडियां बनाने में व्यस्त हैं। प्रधानमंत्री मोदी […]
नेताजी की योग्यता
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लडऩे के लिए हरियाणा सरकार द्वारा तय की गयी शैक्षिक योग्यता, घर में शौचालय होने तथा बिजली बिल बकाया न होने जैसी शर्तों का स्वागत ही किया जाना चाहिए। बेशक सरकार ने यह फैसला तब किया है, जब पंचायत चुनाव ज्यादा दूर नहीं रह गये हैं। नतीजतन अनेक संभावित उम्मीदवारों […]
राह बदल दी नदियों की, कर बांधों का निर्माण।चट्टानों में सुरंग बना दी, जो खड़ी थी सीना तान। की हरियाली उन क्षेत्रों में, जो कभी थे रेगिस्तान।नये बीज और यंत्रों द्वारा, आयी हरित क्रांति महान। आकाश से बातें करने वाले, ऊंचे महल बनाये।सागर सीना चीरने वाले, दु्रतगामी जलयान बनाए। जो नभ की ढूढ़ें गहराई, ऐसे […]
शैलेन्द्र चौहान एक समय था जब नेता एक-दूसरे के प्रति शालीन भाषा का इस्तेमाल करते थे। वे इसका ख्याल रखते थे कि राजनीतिक बयानबाजी व्यक्तिगत आक्षेप के स्तर पर न आने पाए। उनकी ओर से ऐसी टिप्पणियों से बचा जाता था जो राजनीतिक माहौल में कटुता और वैमनस्य पैदा कर सकती थीं। दुर्भाग्य से आज […]
किसानों की खुदकुशी के सबब
विनोद कुमार बाजारवादी व्यवस्था अपने हिसाब से किसानों को फसल उगाने के लिए कहती है। उसके लिए तरह-तरह के प्रलोभन और कर्ज देती है, और किसान उनके झांसे में आ जाते हैं। फिर उनके हाथों में खेलने लगते हैं। उपज की कीमत भी बाजार तय करता है। फिर शुरू होती है सरकारी हस्तक्षेप की मांग। […]