एक जगह के तनाव दूसरी जगह न ले जाएं – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com यों देखा जाए तो तनाव मन का वहम ही होता है और यह वह वहम है जो आदमी को भीतर से भी खोखला कर देता है और बाहर से भी कमजोर कर देने वाला होता है। तनाव हमेशा घटना सापेक्ष […]
Author: अमन आर्य
आज का चिंतन-13/12/2013
सबसे बड़े नालायक वे हैं जो औरों को तनाव देते हैं – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com आदमी का जन्म संसार के कल्याण और अपने बंधुओं, क्षेत्रवासियों एवं संपर्कितों के सुख-दुःखों में भागीदारी निभाते हुए व्यष्टि एवं समष्टि का कल्याण करने के लिए हुआ होता है। सामाजिक प्राणी के रूप में इंसान की जो […]
आज का चिंतन-11/12/2013
गोयरों को न पालें वरना पीपल को भस्म होना ही है – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हम कितने ही अच्छे क्यों न हों, कितने ही अच्छे काम करने वाले क्यों न हों, जमाना हमारा मूल्यांकन अकेले का नहीं करता है बल्कि उन सभी के साथ करता है जो लोग हमारे इर्द-गिर्द हुआ करते हैं। […]
बोए पेड़ बबूल के तो आम कहां से
प्रवीण दुबेजैसी संभावना थी वही सामने आया, चार राज्यों के चुनाव परिणामों में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है। किसी ने ठीक ही कहा है ”बोए पेड़ बबूल के तो आम कहां से होय” कांग्रेस को जब-जब देशवासियों ने मौका दिया, वो जहां-जहां भी सत्ता में रही उसने जनता के साथ झूठ, छल, कपट […]
आज का चिंतन ( 10/12/2013)
धरा पर स्वर्ग उतर आए यदि मानवाधिकारों की समझ आ जाए – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com मनुष्य जीवन धर्म, अर्थ, कर्म एवं मोक्ष आदि पुरुषार्थ चतुष्टय का दूसरा नाम ही है। पुरुषार्थ का अभाव होने पर मनुष्य होने का कोई अर्थ ही नहीं। दुनिया में हर प्राणी और वस्तु, जड़-चेतन सभी का अपना मौलिक […]
आज का चिंतन-08/12/2013
उत्सवी आनंद के रूप में लें लोकतंत्र के महासमर को – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com जो होना था वह हो चुका है आज सामने आ ही जाएगा। लोकतंत्र के इस महासमर की पूर्णाहुति का निर्णायक दौर आखिर आ पहुँचा है जहाँ हम सभी को हर प्रतिस्पर्धा उत्सवी आनंद के साथ लेने का अभ्यास […]
फेस्बूक के पीछे बनने का सच
सोशल वेबवाइट FB यानी facebook चलाने वालों मे एक फीसदी लोगों को भी यह पता नहीं होगा कि इसके फाउंडर मार्क जुकरबर्ग नहीं बल्कि अप्रवासी भारतीय दिव्य नरेंद्र है। दिव्य नरेंद्र हिंदुस्तानियों के लिए ज्यादा जाना-पहचाना नाम नहीं है। महज 29 साल के दिव्य नरेंद्र अमरीका में रहने वाले अप्रावासी भारतीय हैं। उनके माता-पिता काफी […]
राष्ट्रीय (तथा कथित) सलाहकार (एनएसी) द्वारा सोनिया गांधी की अध्यक्षता में 2011 में साम्प्रदायिक व लक्ष्यित हिंसा रोधक विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। इसे अब संसद के आगामी सत्र में प्रस्तुत करने की योजना है। शीर्षक देखकर आम आदमी समझेगा कि इसके द्वारा साम्प्रदायिक हिंसा को रोकने तथा उसके लिए दण्ड दिये जाने […]
आज का चिंतन-07/12/2013
हम क्यों हो गए हैं इतने अधीर और आतुर – डॉ.दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हम सारे के सारे इन दिनों जबर्दस्त अशांत, उद्विग्न और अधीर हैं। जो लोग समरांगण में हैं उनके लिए ऎसा होना वाजिब है लेकिन जो तमाशबीन हैं या जिन्हें इस रण से कोई सीधा सरोकार नहीं है अथवा परिणामों से रूबरू […]
स्वयंभू मठाधीशों के मठ तोड़ने का समय
राजीव रंजन प्रसादतहलका प्रकरण किसी एक व्यक्ति या एक संस्था पर प्रश्नचिन्ह नहीं है। यह गढ़ों और मठों के टूटने की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण घटना है। वैचारिक असहिष्णुता और विचारधारात्मक अस्पृश्यता के वातावरण में जब यह घटना घटी तो अनायास ही इसके सम्बन्ध समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और राजनीतिशास्त्र से जुड़ने लगे। एक आम अपराधी […]