यज्ञ🔥🔥🔥 समग्र जीव व भौतिक जगत की नैनो चिकित्सा पद्धति है*।

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उद्बोधन कर्ता÷पूज्य स्वामी यज्ञदेव जी।

प्रस्तोता÷ आर्य सागर खारी✍✍✍

यज्ञ की क्रिया विधि, यज्ञ के लाभ, यज्ञ के प्रयोजन को लेकर असंख्य शिक्षित अशिक्षित जनों को शंका रहती हैं। कुछ लोग तो महज श्रद्धा प्रदर्शित करने के लिए यज्ञ पर श्रद्धा रखते हैं…. लेकिन वैदिक संस्कृति यज्ञ कर्मकांड आदि अनुष्ठानों की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वैज्ञानिक महत्व वैज्ञानिक क्रिया विधि को समझें बिना यज्ञ की महिमा को घर-घर स्थापित नहीं किया जा सकता.. अर्थात यज्ञीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार नहीं हो सकता। आप सभी सज्जनों को विदित है आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुध नगर चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का अनुष्ठान यमुना तट के निकट ग्राम मुरसदपुर के गुरुकुल में करा रही है। आज 19 दिवस के 37 वे प्रातः कालीन सत्र में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के अधीन पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के तहत यज्ञ के महत्व, यज्ञ की वैज्ञानिकता, पर्यावरण प्रकृति जीव जगत के पोषण संतुलन संवर्धन में यज्ञ की भूमिका को लेकर स्वामी यज्ञ देव का बेहद ही वैज्ञानिक तार्किक उद्बोधन हुआ जो इस विषय पर अनेक वर्षों से शोध कर रहे हैं। उस उद्बोधन के कुछ अंश इस प्रकार है। 36 वर्षीय युवा सन्यासी स्वामी यज्ञदेव अनेक वर्षों से यज्ञ चिकित्सा पर्यावरण प्रदूषण का यज्ञ से कैसे खात्मा होता है इन सभी विषय पर लाखों-करोड़ों के उपकरणों से शोध कर रहे हैं,करा रहे हैं पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने आईआईटी के साथ मिलकर अनेकों शोध यज्ञ के लाभ यज्ञ से वातावरण कैसे शुद्ध स्वस्थ बलवान होता है इन सभी विषय पर अनेकों शोध किए हैं जिनके बेहद ही चौंकाने वाले सकारात्मक परिणाम सामने आये है। जो सनातन वैदिक संस्कृति की सर्वोच्चता सार्वभौमिकता वैज्ञानिकता पर मोहर लगाते हुए उसे पुष्ट करते हैं।

स्वामी जी के अनुसार अग्नि सभी भौतिक पदार्थों में सबसे सूक्ष्म है अग्नि किसी भी ठोस द्रव गैस जैसे पदार्थ के आणविक बंध को तोड़ देती है यज्ञ की अग्नि में जो भी मेवा मिष्ठान जड़ी बूटियां डाली जाती है अग्नि उसे नैनोस्केल पर विभाजित कर देती है स्वामी जी ने बताया गैस स्पेक्ट्रोमीटर से हमने यज्ञ की अग्नि से निकलने वाले धूम (smoke) का अध्ययन किया तो उसमें 90 प्रतिशत अणु ,एक्टिव मेडिसिनल कंपाउंड का निर्माण हुआ जो नैनोस्केल के आकार मे पाये गये। यह अणु वातावरण में तेजी से जाकर मल्टीप्लाई होते हैं। स्वामी जी ने कहां कुछ लोग आशंका करते हैं थोड़े से घी सामग्री से वायुमंडल आसपास का परिवेश कैसे शुद्ध हो सकता है? स्वामी जी ने कहा 70 किलो का जब कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो वह कुछ मिलीग्राम की गोली खाता है जिसमें एक्टिव कंपाउंड होते हैं जो विविध रसायन होते हैं। 80 किलो के व्यक्ति को महज कुछ मिलीग्राम में दवाई की डोज दी जाती है ,वह खाकर स्वस्थ हो जाता है ऐसे ही कुछ ग्राम घी कुछ ग्राम सामग्री से जब अग्नि में उसे डाला जाता है हवन किया जाता है तो वह विभिन्न गैसीय अणु मिश्रण एक्टिव मेडिसन कंपाउंड में रूपांतरित हो जाते हैं। जो तेजी से वातावरण जो प्रदूषण से बीमार रहता है उसकी चिकित्सा करते हैं, स्वस्थ वातावरण से ही स्वस्थ जीव जगत पोषित होता है। स्वामी जी ने कहा हमने रिसर्च कि है 1 ग्राम गाय के घी को जब अग्नि में डाला जाता है तो वह सांख्यिकी यांत्रिकी , क्वांटम यांत्रिकी के नियमों के अनुसार 1 ml द्रव घी, 1864 ml गैस में रूपांतरित हो जाता है। स्वामी जी के अनुसार जो पदार्थ जितना सूक्ष्म होता है वह उतना अधिक सामर्थ्यशाली हो जाता है। इस विषय को आयुर्वेद की दृष्टि से स्वामी यज्ञ देव जी ने समझाया कहा जब कोई व्यक्ति बीमार रहता है उसे आयुर्वेद के विभिन्न आसव, अरिष्ट, वटी दी जाती है फिर भी वह ठीक नहीं होता तो उसकी रसायन भस्म चिकित्सक की जाती है भस्म विभिन्न वनस्पतियों की राख व खनिजों का मिश्रण होती है । जिसको खरल में घंटों तक घोटा जाता है और अधिक महीन करने के लिए कुछ निश्चित घंटे को जब किसी भस्म को घोटा जाता है तो उसे 1 पुट कहते हैं 10 पुट तक भस्म को दिए जाते हैं उसे अधिक सूक्ष्म किया जाता है वह इतनी सूक्ष्म हो जाती है ऐसी भस्म को यदि त्वचा पर ही मल रगड ले तो वह सीधे रक्त में प्रवेश कर जाती है ऐसे ही यज्ञ चिकित्सा कार्य करती है। नाभिकीय भौतिकी की दृष्टि से इसे समझे तो यह ऐसा है 1 ग्राम यूरेनियम में इतनी ऊर्जा होती है जितनी 1 टन बारूद में नहीं होती। अग्नि ऐसे ही विभिन्न यज्ञ में डाले जाने वाली सामग्रियों को छिन्न-भिन्न छोटे अणुओं मे तोड़कर सीधे वातावरण को प्रेषित कर देती है। जैसे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन बनाते हैं लेकिन पेड़ के अंदर कोई ऑक्सीजन नहीं होती सच्चाई तो यह है पेड़ वातावरण में उपस्थित CO2 कार्बन ऑक्सीजन के अणु मे से कार्बन के परमाणु को ग्रहण कर लेते हैं वातावरण में मुक्त ऑक्सीजन रह जाती है, वातावरण में पहले से ही ऑक्सीजन उपस्थित है ऐसे ही उचित यज्ञ विधि ,उचित द्रव्य, उचित योग्य कर्ता के द्वारा किए गए यज्ञ से निर्मित गैसे एक्टिव मेडिसिनल कंपाउंड वातावरण की जहरीली नुकसानदायक गैसों से प्रक्रिया करते हैं उन्हें उदासीन कर वातावरण को सक्रिय स्वस्थ रखते हैं । यज्ञ से निर्मित मेडिसिनल कंपाउंड सीधे हम जीव धारियों मनुष्य आदि के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं यज्ञ एक नैनो टीकाकरण है। यह मेडिसिनल कंपाउंड रक्त में घूम घूम कर हमारे बीमार अस्वस्थ अंगों ऊतकों को को स्वस्थ करते हैं। स्वामी जी ने कहा यज्ञ फोटो केमिकल्स की प्रक्रिया द्वारा वातावरण की जहरीली हानिकारक गैसों को उदासीन करता है। यज्ञ अथाय वायु के समुद्र को शुद्ध करता है। यज्ञ से निर्मित विभिन्न गैसों का मिश्रण जिसमे ऐथेलिक आक्साईड प्रोपोलिक ऑक्साइड मेथेनोमाइल गैस वातावरण की अन्य प्रदूषक कार्बन डाई ऑक्साइड नाइट्रिक ऑक्साइड सल्फ्यूरिक ऑक्साइड कार्बन मोनोऑक्साइड आदि गैसो के साथ प्रक्रिया कर उन्हें न्यूट्रल करती है। जब यज्ञ अग्नि का आह्वान कर अग्नि में घी की आहुति दी जाती है वह घी फैटी एसिड मे टूटता है फैटी एसिड किटोन में टूटते हैं। किटोन तेजी से भिन्न मॉलिक्यूल में टूटते हैं उन तेजी से निर्मित अणुओं की श्रंखला में कार्बन के कम बल्कि ऑक्सीजन के 6 गुणा परमाणु बनते हैं जो प्रकृति के ऑक्सीजन भंडार में बढ़ोतरी करते हैं। स्वामी जी ने कहा हम पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन के तहत जैसे आधुनिक एलोपैथिक मेडिसिन पर लेकर ट्रायल होता है एनिमल बेस्ड ट्रायल होता है ऐसे ही यज्ञ से निर्मित एक्टिव मेडिसिनल कंपाउंड नैनो पार्टिकल पर गहन गंभीर मानवतावादी परम सुख कारक अनुसंधान कर रहे कैसे यज्ञ जीवमात्र को सुखी स्वस्थ बनाता है। कैसे विभिन्न संक्रामक और असंक्रामक रोगो का खात्मा विभिन्न सामग्रियों के प्रयोग से यज्ञ आदि से किया जा सकता है इस पर एविडेंस बेस्ड कार्य कर रहे हैं अधिकांश शोध के नतीजे आशा के अनुकूल सराहनीय हमें मिले हैं आज पर्यंत। यज्ञ थेरेपी को हमने विकसित कर दिया है जो योग के साथ मिलकर अधिक फलदायक सिद्ध हो रही है ।जिस किसी भी व्यक्ति को यज्ञ से होने वाले लाभों को लेकर कोई आशंका है वह पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट में आकर देख सकता है अन्य कोई शंका हो तो वह मुझसे गुरूकुल मुर्शदपुर ग्रेटर नोएडा में 21 सितंबर तक प्रातः 11:00 बजे तक मिलकर शंका समाधान कर सकता है।

स्वामी यज्ञ देव जी ने वैज्ञानिक तथ्य प्रमाणों के साथ यज्ञ की महिमा को सभी श्रोताओं यज्ञ प्रेमी बंधुओं के सामने प्रस्तुत किया मैं समझता हूं अब किसी भी व्यक्ति को यज्ञ को लेकर कोई शंका नहीं रहना चाहिए ।जिन व्यक्तियों को शंका है उन्हें हमारे अनुष्ठान में आकर अपनी शंकाओं का समाधान करना चाहिए हठ दुराग्रह नास्तिकता मूर्खता के कारण कुछ व्यक्ति स्वघोषित विद्वान बन जाते हैं कहते हैं यज्ञ से वायु प्रदूषण होता है ऐसे व्यक्ति ना तो विज्ञान को समझते हैं ना ही धर्म को समझते हैं कोई पदार्थ कभी भी नष्ट नहीं होता, द्रव्य ऊर्जा में ऊर्जा द्रव्य में रूपांतरित हो जाती है। कुछ कम्युनिस्ट प्रकृति के लोग गौतम बुध नगर में भी निशाचर की तरह घूम रहे हैं जो इस विषय के जानकार नहीं है अध कचरा ज्ञान रखते हैं और यज्ञ को लेकर दुष्प्रचार फैलाते रहते हैं । ऐसे कुटिल दुराग्रही मूर्ख जनो से हमे सदैव सावधान रहना चाहिए। परमात्मा उन्हें सद्बुद्धि दे मानसिक रोगों में काम आने वाली जड़ी बूटियों से ऐसे व्यक्ति को यज्ञ वेदी पर बैठाकर उनकी चिक्तिसा की जानी चाहिए, सत्याग्राही सत्यवादी सत्यमानी जनों का यह कर्तव्य बनता है।

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