ओ३म् “मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का आदर्श एवं प्रेरणादायक जीवन”

Screenshot_20240417_170430_WhatsApp

===========
आर्यावर्त वा भारतवर्ष में प्राचीन काल से अध्यात्म का प्रभाव रहा है। सृष्टि के आरम्भ में ही ईश्वर ने चार ऋषियों के माध्यम से वेदों का ज्ञान दिया था। हमारे उन ऋषियों व बाद में ऋषि परम्परा ने इस ज्ञान को सुरक्षित रखा जिस कारण आज भी वेदों की संहितायें व वेदों का सम्पूर्ण ज्ञान सर्वसाधारण के लिये सुलभ है। यह बात और है कि कौन उससे लाभ उठाता है या नहीं। महाभारत काल के बाद वेदों में अनेक प्रकार की विकृतियां आ गईं थी। इसी कारण समाज में भी विकृतियां फैल गईं और वैदिक धर्मी लोग धर्म के मर्म को भूल कर पांखण्डी और अन्धविश्वासी बन गये। इसका परिणाम भारत में छोटे छोटे राज्य बने, सामाजिक विकृतियां उत्पन्न हुई तथा धर्म में सत्याचार के स्थान पर अज्ञान पर आधारित मिथ्याचार व स्वार्थ आदि की परम्पराओं में वृद्धि हुईं। ऐसे समय में बाल्मीकि रामायण में भी प्रक्षेप हुए। रामायण वा राम के सम्बन्ध में अनेक मिथ्या किम्वदन्तियां प्रचलित हुईं और अवतारवाद आदि सम्बन्धी अनेक अविश्वसीय कथाओं को भी रामायण में जोड़ दिया गया। महात्मा बुद्ध के बाद व कुछ शताब्दी पूर्व भारत में पुराणों की रचना हुई जिसमें ज्ञान व विज्ञान की उपेक्षा कर अनेक अज्ञान से युक्त बातों का प्रचार हुआ। रामायण का कुछ प्रभाव भी भारतीयों में रहा। यवनों की पराधीनता के काल में तुलसीदास जी उत्पन्न हुए जिन्होंने लोक-भाषा अवधि वा हिन्दी में काव्यमय रामचरित मानस की रचना की। इससे पूर्व धर्म व मत सम्बन्धी ग्रन्थ संस्कृत भाषा में थे। राम-चरित-मानस के लोक भाषा में होने के कारण इसका जन-जन में प्रचार हुआ। इसका कारण मर्यादा पुरुषोत्तम राम का उज्जवल प्रेरणादायक चरित्र था। यदि कोई मनुष्य राम का जीवन चरित जान ले और उसके अनुसार आचरण करे तो वह मनुष्य जीवन में अनेक प्रकार की सफलताओं को प्राप्त कर सकता है। आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द ने सभी शास्त्रीय एवं इतिहास ग्रन्थों का अध्ययन किया था। उन्होंने पुराणों की परीक्षा भी की थी। ऋषि दयानन्द ने पाया कि रामचन्द्र जी का जीवन वैदिक मान्यताओं के आधार पर व्यतीत हुआ था। एक क्षत्रिय राजा व राजकुमार का जीवन जैसा होना चाहिये वैसा ही आदर्श एवं मर्यादाओं में बन्धा हआ जीवन रामचन्द्र जी का था। अतः ऋषि दयानन्द ने वेदों को जो ईश्वर प्रदत्त ज्ञान होने से अखिल-धर्म का मूल हैं, उसका प्रचार-प्रसार किया और साथ ही वेद की मान्यताओं पर आाधारित अपने सत्यार्थप्रकाश आदि ग्रन्थों की रचना भी की। राम के जीवन में हम एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श राजा, आदर्श मित्र, आदर्श शत्रु, ईश्वर भक्त, वेदानुयायी, ब्रह्मचर्य के पालक, प्रजा पालक, भक्त वत्सल, आदर्श पति, तपस्वी, धर्म पालक, ऋषि के प्रति गहरा श्रद्धाभाव रखने वाला व धर्म का रक्षक आदि अनेक रूपों व गुणों को पाते हैं। यदि हम रामचन्द्र जी के इन गुणों को अपने जीवन में धारण कर लें तो हमारा कल्याण हो सकता है। यही कारण था कि लाखों वर्ष पूर्व उत्पन्न राम व उनके रावण के साथ युद्ध आदि की घटनाओं पर आधारित बाल्मीकि रामायण व राम चरित मानस ग्रन्थों ने देशवासियों के हृदय पर अपनी अमिट छाप बनाई। आज भी रामायण व इस पर आधारित अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं जिनका अध्ययन किया जाता है। रामचन्द्र जी के जीवन से वर्तमान समय में भी लोग अपनी घरेलू व राजनीति की समस्याओं के समाधान ढूंढने का प्रयत्न करते हैं। महर्षि दयानन्द ने बाल्मीकि रामायण को इतिहास का ग्रन्थ स्वीकार कर इसके विश्वसनीय, सृष्टिक्रम के अनुकूल तथा वेदानुकूल भाग का अध्ययन करने का विधान वैदिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में किया है।

आर्यसमाज में अनेक विद्वानों ने रामायण पर कार्य किया और उसका मन्थन कर उसका वेदानुकूल व विश्वसीय इतिहास सम्बन्धी भाग श्लोकों के हिन्दी अनुवाद सहित प्रस्तुत किया है। वर्तमान में आर्यसमाज में पं. आर्यमुनि, स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती तथा महात्मा प्रेमभिक्षु कृत बाल्मीकि रामायण पर आधारित ग्रन्थों का विशेष प्रचार है। हमारे पास यह सभी ग्रन्थ उपलब्ध हैं तथा रामायण पर कुछ अन्य आर्य विद्वानों के अनुवाद व ग्रन्थ उपलब्ध है। हमने स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती जी की बाल्मीकि रामायण को आद्योपान्त पढ़ा है। यह ग्रन्थ पढ़ने योग्य है। इसमें प्रक्षिप्त भाग को हटाकर रामायण को रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसे पढ़ने से पाठक को रामचन्द्र जी विषयक प्रायः पूर्ण इतिहास का ज्ञान होता है। यह ग्रन्थ यद्यपि एक वृहद ग्रन्थ है परन्तु गीता प्रेस की बाल्मीकि रामायण की तुलना में काफी छोटा है। इसे कुछ ही दिनों में पढ़ा जा सकता है। इसे पढ़ने से रामायण का लगभग पूर्ण ज्ञान हो जाता है जितना ज्ञान किसी मनुष्य के लिये आवश्यक है। हम अनुभव करते हैं कि प्रत्येक परिवार में यह ग्रन्थ होना चाहिये और सबको इसका तन्मयता से पाठ करना चाहिये।

राम चन्द्र जी की शिक्षा-दीक्षा ऋषियों के सान्निध्य में हुई थी जहां वेदाध्ययन सहित उन्हें क्षत्रिय धर्म व शस्त्रास्त्र संचालन की शिक्षा भी दी जाती थी। राम व लक्ष्मण ऋषियों के सान्निध्य में सन्ध्या व यज्ञ करते थे तथा अपने कर्तव्यों सहित शस्त्र संचालन एवं वेदज्ञान प्राप्त करते थे। रामायण के अनुसार रामचन्द्र जी का स्वरूप व व्यक्तित्व अत्यन्त सुन्दर, स्वस्थ, आकर्षक, प्रभावशाली एवं विद्या व सदाचार से परिपूर्ण था। वह माता, पिता तथा आचार्यों के आज्ञाकारी व सेवक तो थे ही साथ ही अपने भाईयों के प्रति भी उनका व्यवहार वेद व शास्त्रों की मर्यादाओं के अनुसार था। प्रजा भी उनके व्यक्तित्व एवं व्यवहार से प्रभावित व उन पर मुग्ध थी। रामचन्द्र जी ऋषि विश्वामित्र के साथ वन में रहे और उनसे अध्ययन किया। वनों में ऋषियों के अनेक आश्रम थे जहां ऋषि-मुनि-विद्वान-वानप्रस्थी व संन्यासी वेदानुकूल जीवन व्यतीत करते हुए शोध, अनुसंधान एव शस्त्र विज्ञान सहित आयुद्ध निर्माण का कार्य किया करते थे। लंका का राजा रावण इन ऋषियों के कार्यों के प्रति आजकल के आतंकवादियों के स्वभाव वाला था तथा निर्दोष और ईश्वर भक्ति में मग्न ऋषियों व उनके आश्रम में निवास करने वाले विद्यार्थियों पर अत्याचार करता था। बहुत से ऋषि व विद्वान इस कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त होते थे। अतः रामचन्द्र जी के वहां होने से उन्होंने ऋषियों को कष्ट देने वाले अनेक राक्षसों का वध किया था। एक राजा व राजकुमार होने के कारण उन्हें दोषी व अपराधी प्रवृत्ति के दुष्ट लोगों को दण्ड देने का पूर्ण अधिकार था।

रामचन्द्र जी ने गुरु विश्वामित्र जी के साथ राजा जनक की नगरी मिथिलापुरी में सीता के स्वयंवर समारोह में प्रवेश किया था और वहां एक प्राचीन भारी धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हुए उसे तोड़ डाला था। इस धनुष पर अन्य राजा प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सके थे। यह राम की वीरता व पराक्रम का आरम्भ था। सीता से विवाह कर आप अयोध्या आये थे। कुछ दिन बाद आपके राज्याभिषेक का निर्णय आपके पिता दशरथ व मंत्री परिषद ने लिया था। पारिवारिक व देश की परिस्थितियों के कारण आपको अगले ही दिन 14 वर्ष के लिये वन जाना पड़ा। बाल्मीकि रामायण ने इसका वर्णन करते हुए लिखा है ‘आहूतस्याभिषेकाय विसृष्टस्य वनाय च। न मया लक्षितस्तस्य स्वल्पोऽप्याकारविभ्रमः।।’ इसका अर्थ है कि:राज्याभिषेकार्थ बुलाये हुए और वन के लिये विदा किए हुए रामचन्द्र के मुख के आकार में ऋषि बाल्मीकि जी ने कुछ भी अन्तर नहीं देखा।’ कहां तो रामचन्द्र जी को राजा बनना था और कहां अगले ही दिन उन्हें सभी राजकीय सुख-सुविधाओं का त्याग कर वन जाने को कहा गया। इस पर भी वह इन घटनाओं से किंचित विचलित हुए बिना पिता की आज्ञा पालन करने के लिए सहर्ष वन जाने के लिये तैयार हो गये। विश्व इतिहास में ऐसी घटना दूसरी नहीं है। आज राजनीति का स्तर कितना गिर गया है वह प्रायः सभी राजनीतिक नेताओं व उनके अनुचरों के दिन प्रतिदिन के बयानों से देखा व जाना जा सकता है। वह देश के हितों की उपेक्षा करने से भी गुरेज नहीं करते। दूसरी ओर राजा बनाने की घोषणा सुनकर भी राम के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव नहीं देखा गया और वन जाने के लिये कहने पर भी उनके मुख पर किसी प्रकार के दुःख या चिन्ता का भाव नहीं था। यह स्थिति एक बहुत उच्च कोटि के योग साधक वा ईश्वर भक्त की ही हो सकती है। इससे रामचन्द्र जी के व्यक्तित्व का अनुमान लगाया जा सकता है जो कि आदर्श है। इससे शिक्षा लेकर हम भी सुख व दुःख की स्थिति में स्वयं को समभाव वाला बनाकर जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं। रामचन्द्र जी के गुणों का वर्णन करते हुए आर्य विद्वान श्री भवानी प्रसाद जी ने लिखा है ‘वस्तुतः दशरथनन्दन राम स्वकुलदीपक, मातृमोदवर्द्धक तथा पितृनिर्देशपालक पुत्र, एकपत्नीव्रतनिरत पति, प्राणप्रियाभार्यासखा, सुहृददुःखविमोचक, मित्र, लोकसंग्राहक, प्रजापालक नरेश, सन्तानवत्सलपिता और संसार मर्यादा-व्यवस्थापक, परोपकारक, पुरुषरत्न का एकत्र एकीकृत सन्निवेश, सूर्यवंश प्रभाकर, कौशल्योल्लासकारक, दशरथानन्दवर्धन, जानकी जीवन, सुग्रीवसुहृद्, अखिलार्यनिषेवितपादपद्म, साकेताधीश्वर, महाराजाधिराज आदि गुणों से युक्त थे।’ यह सभी गुण अन्य कहीं किसी मानव में मिलना दुर्लभ है।

रामायण के सुग्रीव-हनुमान मित्रता, बालीवध, सुग्रीव को राजा बनाना, बाली के पुत्र अंगद को अपने साथ रखना, प्राणपण से ऋषि-मुनियों की रक्षा तथा राक्षसों का नाश करना, रावण को अपने दूतों द्वारा समझाना और सीता को लौटाने का सन्देश देना, रावण के भाई विभीषण को शरण देना और रावण के वध के बाद उन्हीं को लंका का राजा बनाना, 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटकर भरत के आग्रह पर राजा बनना और अपनी तीनों माताओं को समानरूप से सम्मान देना, एक आदर्श राजा व पिता के रूप में प्रजा का पालन करना रामचन्द्र जी को एक आदर्श मनुष्य व मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं। यही मनुष्य जीवन का उद्देश्य भी है। इसी कारण मध्यकालीन अल्पज्ञानी लोगों ने वेदों से अनभिज्ञ होने के कारण उन्हें परमात्मा के समान पूजनीय स्वीकार किया और आज तक भी उनका यश कायम है। करोड़ो लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेते आये हैं व अब भी ले रहे हैं। यदि इतिहास में उपलब्ध सभी जन्म लेने वाले महापुरुषों के जीवन पर दृष्टि डालें तो रामचन्द्र जी के जैसा महापुरुष विश्व इतिहास में दूसरा उपलब्ध नहीं होता। आज भी रामचन्द्र जी का जीवन प्रासंगिक एवं प्रेरणादायक है। हमें बाल्मीकि रामायण का अध्ययन करने के साथ रामचन्द्र जी के गुणों को अपने जीवन में धारण करने का प्रयास करना चाहिये। इसी से हमारा जीवन सार्थक होगा। रामनवमी रामचन्द्र जी का जन्म दिवस है। इस दिन हमें उनके जीवन पर किसी वैदिक विद्वान की कथा व प्रवचन सुनना चाहिये, अपने परिवारों में वैदिक रीति से यज्ञ-हवन करना चाहिये और निर्धन परिवारों में अर्थ व वस्तु दान देकर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिये।

बन्धुओं, इस वर्ष 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में उनकी गरिमा के अनुरूप विश्व का एक बड़ा एवं भव्य मन्दिर उनके भक्तों द्वारा बन कर तैयार हुआ है और इसका उद्घाटन भी हुआ है। आज अयोध्या में रामनवमी का पर्व 500 वर्षों बाद भगवान राम की गरिमा के अनुरूप उनके भक्तों द्वारा पूर्ण श्रद्धा से मनाया जा रहा है। इस मन्दिर के निर्माण में अगणित रामभक्तों के बलिदानों सहित हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री एवं सत्तारूढ़ दल भाजपा सहित विश्व के समस्त रामभक्तों व उनकी राम में अनन्य आस्था व श्रद्धा का योगदान है। इस वर्ष की रामनवमी पूर्व वर्षों से अधिक सन्तोष एवं आनन्द देने वाली है। इस राममन्दिर को बनाने में योगदान करने वाले सभी रामभक्तों को हम श्रद्धा सहित नमन करते हैं। राम चन्द्र जी के इस भव्य एवं विशाल स्मारक की रक्षा करना समस्त आर्य हिन्दू जाति का कर्तव्य है। हम अपने सभी मित्रों को आज रामनवमी वा रामचन्द्र जी के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनायें देते हैं। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:

İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betpark giriş
Hitbet giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
casibom
casibom
casibom giriş
casibom giriş
casibom
casibom
hititbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
yakabet giriş
bahisfair giriş
bahisfair
betnano giriş
betorder giriş
betorder giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
timebet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
kolaybet giriş
betpark
betpark
vaycasino
vaycasino
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
casibom giriş
betplay giriş
betplay giriş
roketbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
casibom güncel giriş
casibom giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betplay giriş
olaycasino
olaycasino
betnano giriş
pokerklas
pokerklas
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
roketbet giriş
betplay giriş
timebet giriş
yakabet giriş