धर्म के सम्यक् पालन से ही उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव ::: आचार्य लोकेन्द्र

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महरौनी (ललितपुर )। महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वावधान में विगत 2 वर्षों से वैदिक धर्म के मर्म को युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से प्रतिदिन मंत्री आर्यरत्न शिक्षक लखनलाल आर्य द्वारा आयोजित आर्यों का महाकुंभ में दिनांक 04 दिसम्बर 2022रविवार को “”स्वास्थ्य का धर्म से सम्बन्ध “” विषय पर मुख्य वक्ता प्रसिद्ध वैदिक विद्वान् आचार्य लोकेंद्र जी ने कहा कि स्वास्थ्य का धर्म के साथ सम्बन्ध अत्यन्त आवश्यक और महत्वपूर्ण है।धर्म के सम्यक् पालन से ही उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव है क्योंकि धर्म हमें सदाचरण सिखाता है।सद्गुणों का धारण ही धर्म है। दुर्गुण और दुर्व्यवसनों के त्याग से शरीर,मन और आत्मा सबकी शुद्धि होने से हमें शारीरिक और मानसिक रोग नहीं होंगे।सभी आत्मबल से युक्त होंगे ।इस कथन की पुष्टि में सर्व प्रथम आचार्य श्री ने “आत्मन: प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत् ” कहकर स्पष्ट किया कि अपने से प्रतिकूल आचरण दूसरों से न करना धर्म है। जो कुछ हमें अच्छा नहीं लगता दूसरों के साथ भी वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। इससे हमारे शरीर,मन और विचारों में कटुता नहीं होती और हममें शारीरिक, मानसिक पीड़ा नहीं होती फलत: हम स्वस्थ होते जायेंगे। महर्षि मनु कृत धर्म के दस लक्षणों की व्याख्या करते हुए धृति -धैर्य को धारण करने से मन और वाणी में मधुरता व मृदुता आती है ।चित्त में शान्ति और प्रसन्नता होती है फलत: हम ब्लड प्रेशर और हायपर टेंशन के शिकार नहीं होंगे।इसी प्रकार क्षमा से उदार भाव आता है ,इसके अभाव में व्यक्ति क्रोधी होकर अपना सर्वस्व गवां बैठता है।दम से हमारी दुष्प्रवृत्तियां का दमन होता है। अस्तेय अर्धात् चोरी न करना । स्वामी की बिना आज्ञा से किसी भी वस्तु को पाने की इच्छा करना भी चोरी कहलाती है। शौच(शुचिता ) इन्द्रिय निग्रह,धी -बुद्धि,विद्या-परा -अपरा वेद विद्या,,सत्य और क्रोध न करना — ये सभी धर्म के लक्षण हमें रोगों से बचाता है। उन्होंने पंच महायज्ञों को भी घर -घर अपनाने की बात कही।वस्तुत : धर्म का अच्छी प्रकार से पालन करने से ही हर प्रकार की स्वस्थता होगी।
कार्यक्रम में महान् इतिहासकार डॉ.राकेश कुमार आर्य ,नोएडा ने राष्टृधर्म को स्वास्थ्य का आधार बताते हुए कहा कि अपने धार्मिक व सबल राजा द्वारा ही राष्ट्र हर प्रकार से सुरक्षित होता है और प्रजा निर्भय तथा नि: शंक होकर धर्माचरण का पालन कर स्वस्थ रह सकती है। उन्होंने आयुर्वेद के प्राचीन वैद्यों द्वारा सद्पात्र को ही विद्यादान की बात कही। ऐसे ज्ञान दान से विद्या परमार्थ को प्राप्त होती है।
अन्य प्रसिद्ध आर्य विद्वानों में प्रो.डा.व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक बिहार, प्रो.डा.वेद प्रकाश शर्मा बरेली, अनिल कुमार नरूला दिल्ली, आर्या चन्द्रकान्ता “क्रांति” हरियाणा, युद्धवीर सिंह हरियाणा,प्रधान प्रेम सचदेवा दिल्ली ,भंवर सिंह आर्य दुबई,
,देवी सिंह आर्य दुबई, भोगी प्रसाद म्यांमार,सुमन लता सेन आर्या शिक्षिका, आराधना सिंह शिक्षिका,राम सेवक पाठक शिक्षक, परमानंद सोनी भोपाल, चन्द्रशेखर शर्मा जयपुर, अवधेश प्रताप सिंह बैंस,सुरेश कुमार गर्ग गाजियाबाद, विमलेश कुमार सिंह आदि ने भी उक्त विषय पर अपने बहुमूल्य विचार दिए। इसके अतिरिक्त सैकड़ों लोग आर्यों का महाकुंभ से जुड़कर प्रतिदिन लाभ उठा रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कमला हंस, दया आर्या हरियाणा, ईश्वर देवी, अदिति आर्या, संतोष सचान ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संचालन भारतीय इतिहास पुनर्लेखन समिति के राष्ट्रीय संयोजक शिक्षक आर्यरत्न लखनलाल आर्य तथा प्रधान मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने सभी महानुभावों के प्रति आभार जताया।

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