करवा चौथ व्रत- एक भेड़ चाल, एक पाखंड

images (33)

प्रस्तुति – देवेंद्र सिंह आर्य [चेयरमैन ‘उगता भारत’ समाचार पत्र]

करवा चौथ की मनघड़ंत कहानी- एक धोबी की पत्नी थी दोनों पति पत्नी कपड़े धोने का काम करते और नदी में जाकर कपड़े धोते और वही सुखा के बाद में जिसके भी कपड़े होते वो घर पहुंचा देते उससे उनकी आजीविका चलती थी इस प्रकार से एक दिन करवा का पति नदी में डूब गया करवा उसको खोजती हुई चिल्लाने लगी और वह उसे जीवित करने के लिए स्वर्ग लोक में चली गई वहां उसने जाकर के कहा मेरे पति को जीवित कर दीजिए मैं उसके बिना जीवित नहीं रह सकूंगी यमराज ने कहा यह देखो आपका पति तो वहां आप को खोज रहा है तुम जल्दी जाओ और तुम्हारा पति तुम्हारे बिना परेशान हो रहा है करवा स्वर्ग लोक से तुरंत नीचे आई और उसने कहा कि मैं तो आप को खोजने गयी थी उसने कहा मैं तो ठीक हूं और मैं तो यहां आप को खोज रहा हूं तो देव योग से उस दिन सुबह से शाम तक करवा ने भोजन नहीं किया और रात्रि हो चली थी चंद्रमा निकल आया था संयोगवश उस दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्थी थी तो करवा नाम की उस धोबी ने कोई व्रत नहीं रखा था यह तो घटना अचानक से घट गई इस प्रकार से सब हो गया।

यह पुराणों में वर्णन आया है। अब इस घटना पर विचार कीजिए करवा कैसे तो स्वर्ग लोक पहुंची कौन सा विमान था उसके पास और स्वर्ग लोक है कहां और भगवान ने वहां उसको कैसे स्वर्ग लोक से नीचे भिजवाया तो यह सब कहानी गोलमोल दिखाई देती है और पाखंड विश्वास को बढ़ाने वाली है इसी से आगे यह कृष्ण कार्तिक चतुर्थी पति की आयु बढ़ाने वाली कहलाने लगी जो बिल्कुल झूठ है यहां एक और बात हम कहना चाहेंगे एक दिन एक पति ने अपनी पत्नी से कहा की देवी जी हम भी आपके लिए व्रत रखें हमारा व्रत यह होगा कि हम चंद्रमा को देख करके भोजन करेंगे और सूर्य को देख कर के खोलें तो वह कहती यह भी कोई व्रत हुआ ऐसा व्रत तो रोज किया जा सकता है । यह सब भेड़ चाल है, पाखंड है।

धर्म की जिज्ञासा वाले के लिए वेद ही परम प्रमाण है ,अतः हमें वेद में ही देखना चाहिए कि वेद का इस विषय में क्या आदेश है ? वेद का आदेश है—-व्रतं कृणुत ! ( यजुर्वेद 4-11)व्रत करो , व्रत रखो , व्रत का पालन करो ऐसा वेद का स्पष्ट आदेश है ,परन्तु कैसे व्रत करें ? वेद का व्रत से क्या तात्पर्य है ? वेद अपने अर्थों को स्वयं प्रकट करता है । वेद में व्रत का अर्थ है-

अग्ने व्रतपते व्रतं चरिष्यामि तच्छ्केयं तन्मे राध्यतां इदमहमनृतात् सत्यमुपैमि !! ( यजुर्वेद 1–5)

हे व्रतों के पालक प्रभो ! मैं व्रत धारण करूँगा , मैं उसे पूरा कर सकूँ , आप मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करें… मेरा व्रत है—-मैं असत्य को छोड़कर सत्य को ग्रहण करता रहूँ ।इस मन्त्र से स्पष्ट है कि वेद के अनुसार किसी बुराई को छोड़कर भलाई को ग्रहण करने का नाम व्रत है ‌ रात्रि के बारह बजे तक भूखे मरने का नाम व्रत नहीं है।

चारों वेदों में एक भी ऐसा मन्त्र नहीं मिलेगा जिसमे ऐसा विधान हो कि एकादशी , पूर्णमासी या करवा चौथ आदि का व्रत रखना चाहिए और ऐसा करने से पति की आयु बढ़ जायेगी। हाँ, व्रतों के करने से आयु घटेगी ऐसा मनुस्मृति में लिखा है-

पत्यौ जीवति तु या स्त्री उपवासव्रतं
चरेत् !आयुष्यं बाधते भर्तुर्नरकं चैव गच्छति !!

जो पति के जीवित रहते भूखा मरनेवाला व्रत करती है वह पति की आयु को कम करती है और मर कर नरक में जाती है
अब देखें आचार्य चाणक्य क्या कहते है-

पत्युराज्ञां विना नारी उपोष्य व्रतचारिणी !
आयुष्यं हरते भर्तुः सा नारी नरकं व्रजेत् !!
( चाणक्य नीति – 17–9 )

जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना भूखों मरने वाला व्रत रखती है , वह पति की आयु घटाती है और स्वयं महान कष्ट भोगती है।

अब कबीर के शब्द भी देखें-

राम नाम को छाडिके राखै करवा चौथि !
सो तो हवैगी सूकरी तिन्है राम सो कौथि !!

जो ईश्वर के नाम को छोड़कर करवा चौथ का व्रत रखती है , वह मर कर सूकरी बनेगी ।

एक तो व्रत करना और उसके परिणाम स्वरुप फिर दंड भोगना ,यह कहाँ की बुद्धिमत्ता है। अतः इस तर्क शून्य , अशास्त्रीय व वेदविरुद्ध करवा चौथ की प्रथा का परित्याग कर सच्चे व्रतों को अपने जीवन में धारण करते हुए अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयत्न करना चाहिए । राम के लिए सीता ने वा कृष्ण के लिए रुक्मिणी ने तो करवा चौथ का व्रत नहीं किया था पत्नी के लिए पति व्रत क्यों नहीं रखता जबकि वेद ने दोनों को समान दर्जा दिया है। करवा चौथ व्रत पर बिना आवश्यकता के सामान खरीदने से धन की हानि होती है, महिलाओं में व्यर्थ की प्रतीस्पर्धा मनमुटाव बढ़ता है,,चांद आदि अर्थात जड पदार्थों कीपूजा को बढावा मिलता है और महिलाओं मेंं व्यर्थ का डर पैदा हो जाता है कि यदि व्रत नही किया तो सुहाग की हानी हो सकती है । जिन व्यक्तियों की दुर्घटना में मौत हो जाती है क्या उन सभी की पत्नियों ने करवा चौथ का व्रत नहीं रखा था ?

पति पत्नी व बच्चों की आयु बढ़ाने के कारगर उपाय हैं – परस्पर मधुर भाषण, शुद्ध सात्विक भोजन, सप्ताह में एक दिन केवल फलाहार और नियमित व्यायाम योगासन प्राणायाम ध्यान ।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
jojobet giriş