हर रोज लड्डू खाने को नहीं मिलते और हर रोज आंधी तूफान भी नहीं आते : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

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कभी सुख कभी दुख, कभी लाभ कभी हानि, कभी अनुकूलता कभी प्रतिकूलता, यह तो जीवन में चलता ही रहता है। यही तो जीवन है। जैसे गंगा आदि नदी के दायां और बायां दो किनारे होते हैं, ऐसे ही संसार रूपी नदी के भी सुख और दुख रूपी दो किनारे हैं। कभी जीवन रूपी नैया सुख के किनारे की तरफ बढ़ती है, और कभी दुख के किनारे की तरफ भी चली जाती है। इसलिए जीवन में सुख दुख तो आते ही रहेंगे। इनकी चिंता न करें। “बस बुद्धिमत्ता का उपयोग करें, कि आपकी जीवन नैया सुख के किनारे की तरफ चलती रहे, दुख के किनारे की तरफ न जाए।”
इसके लिए आपको संसार के नियमों को समझना होगा। संसार के पदार्थों को, यहां की कानून व्यवस्था को, इस व्यवस्था के संचालक को, समझना होगा। “संसार के संचालक तथा उसकी कानून व्यवस्था को समझ कर, यदि आप उसकी व्यवस्था का पालन करेंगे, तो यही एकमात्र उपाय है, जो आपको सुख के किनारे की ओर ले जाएगा, तथा दुख से बचाएगा।”
इस संसार का संचालक ईश्वर है। उसकी न्याय व्यवस्था या कानून व्यवस्था को समझने के लिए उसके बताए संविधान अर्थात वेदों का अध्ययन करें। किसी योग्य विद्वान गुरुजी से उस संविधान को समझें। “जैसे बिना किसी अध्यापक के कोई भी गणित विज्ञान कंप्यूटर आदि विद्या समझ में नहीं आती। बिना वकील के कोई संविधान कानून समझ में नहीं आता। इसी तरह से बिना वेदों के विद्वान की सहायता लिए ईश्वर का कानून संविधान = वेद भी समझ में नहीं आता। और अध्यापक भी योग्य विद्वान होना चाहिए, तभी वह विद्या ठीक से समझ में आती है। यदि अध्यापक अयोग्य हो, तब भी व्यक्ति भटक जाता है।”
वेदों में बताया है, कि इस संसार में अच्छे लोग भी रहते हैं, और बुरे लोग भी। “जीवन में कभी आपको अच्छे लोग मिलेंगे, वे आपको सुख देंगे। कभी आपको बुरे लोग मिलेंगे, वे आपको दुख देंगे।” अब उनको पहचानना, कि “कौन व्यक्ति अच्छा है, और कौन व्यक्ति बुरा है। किसके साथ रहकर अपना जीवन चलाएं, और किससे दूर रहें, यह आपका काम है।” इतनी योग्यता आपको बनानी होगी। “माता पिता और गुरुजनों की सहायता से इतनी योग्यता बना लेवें, कि अच्छे बुरे व्यक्तियों की पहचान करना सीख लें। फिर अच्छे लोगों के साथ रहें, बुरे लोगों से दूर रहें। झगड़ा किसी से नहीं करना। बुरे लोगों से अपना बचाव अवश्य करना है। यदि इतना कर लेंगे, तो आपका जीवन सुखमय एवं सफल होगा।”
“इसलिए वेदों के योग्य विद्वानों का संपर्क करें, ईश्वर की कानून व्यवस्था को समझें, उसका पालन करें और जीवन में आनंद से रहें।”
— प्रस्तुति : आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

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