भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदान इतिहास हमारा ) अध्याय – 10 ( ख )

IMG-20200730-WA0023

फिर बनाया गया एक हिन्दू संघ

इस सुल्तान के काल में विद्रोह की जन्मस्थली दिल्ली बन गई । राजपूतों ने अपने खोए हुए राज्यों की प्राप्ति के लिए हुंकार भरनी आरम्भ कर दी। जालौर के राजा उदयसिंह ने इस सुल्तान के पैर उखाड़ कर अपना हिन्दू राज्य स्थापित करने के लिए 1221 ई0 में तत्कालीन हिन्दू राजाओं का एक :हिन्दू संघ’ बनाया था । जिसे आज इतिहास में कहीं पर भी स्थान नहीं दिया गया है । इस संघ के माध्यम से राजा उदयसिंह ने नागदा अर्थात मेवाड़ पर चढ़ाई की थी।

चौहान वंश के लोगों ने भी अपनी पराजय को अभी तक भुलाया नहीं था । उन्हें तराइन का अपमान रह – रह कर दुखी और त्रस्त कर रहा था । इन लोगों ने अपनी एक सेना गठित कर ली थी । ‘चंदवाड़ का चौहान राज्य’ नामक पुस्तक के लेखक दशरथ शर्मा के शोध से हमें पता चलता है कि भरतपाल नामक वीर योद्धा के नेतृत्व में इन लोगों ने सवा लाख तुर्क सेना की बलि ले ली थी । जिससे आसपास के मुसलमानों को उन्होंने भगाना आरम्भ कर दिया था। वीर योद्धा भरतपाल ने स्वतन्त्रता के लिए अपना बलिदान दिया था । नागदा मेवाड़ ने भी अल्तमस को अपनी स्वतन्त्रता को बनाए रखने के लिए धूल चटा दी थी और तुर्क सेना को वहाँ से भागना पड़ा था । रणथम्भौर ने भी अल्तमस को चुनौती देते हुए अपनी वीरता और शौर्य का परिचय दिया था। इस प्रकार स्पष्ट है कि अल्तमस के शासनकाल में भारत में सर्वत्र क्रान्ति की ज्वाला धधकती रही ।
ग्वालियर के नरेश मलयवर्मन ने स्वतन्त्रता के लिए अपना बलिदान इसी सुल्तान के शासनकाल में दिया था । जबकि कालिंजर को त्रैलोक्य वर्मन नामक हिन्दू वीर शासक ने उसे स्वतन्त्र करा लिया था । कहने का अभिप्राय है कि सर्वत्र क्रांति की और स्वतन्त्रता की धूम मची रही । यही स्थिति रजिया के शासनकाल में भी रही । जब उसने दिल्ली की पहली मुस्लिम महिला शासक बनकर शासन करना आरम्भ किया तो उसे भी हिन्दू वीरों ने चारों ओर से चुनौती देनी आरंभ कर दी थी।

बलबन के काल में स्वतन्त्रता आन्दोलन

रजिया के पश्चात बलबन नाम के मुस्लिम शासक ने शासन करना आरम्भ किया तो उस समय भी भारतवासी हिंदुओं का स्वतंत्रता संघर्ष और भी अधिक तेज हो गया। इसके शासनकाल में दोआब में स्वतंत्रता संघर्ष निरंतर चलता रहा। बलबन यदि एक ओर से विद्रोह को दबाता था तो दूसरी ओर विद्रोह की चिंगारी सुलग उठती थी । वह जितनी देर भी राज्य करता रहा उसे हिन्दू चुनौती निरन्तर मिलती रही ।
हिन्दू वीर दलकी मलकी ने संघर्ष कर उत्तर प्रदेश के दक्षिणी और मध्य प्रदेश के उत्तरी भागों के कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर अपना शक्तिशाली राज्य स्थापित कर लिया था । जिसे उस समय की केवल एक छोटी सी बगावत कहकर इतिहास में कोई स्थान नहीं दिया गया है । जबकि यदि ऐसा ही कार्य कोई मुस्लिम हिन्दू राजाओं के विरुद्ध कर गया होता तो निश्चय ही उसे बढ़ा चढ़ाकर इतिहास में स्थान मिला होता । बलबन ने 20 वर्ष तक शासन किया, परन्तु उसके लिए एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जब उसे हिन्दू चुनौती नहीं मिली हो । बलबन का शासन काल 1266 से 1286 ई0 तक माना जाता है। जिसमें उसने रणथम्भौर को जीतने का हर सम्भव प्रयास किया, परन्तु रणथम्भौर ने अपनी अजेयता निरन्तर बनाए रखी और वहाँ के जैत्रसिंह जैसे हिन्दू राजा भारत की अस्मिता के लिए निरन्तर संघर्ष करते रहे।

मेवों का महत्वपूर्ण योगदान

आजकल उत्तर प्रदेश के मथुरा हरियाणा के गुड़गांव, फरीदाबाद और राजस्थान के भरतपुर और अलवर जिला में मेव जाति मिलती है ।आज इनमें से अधिकांश लोग मुसलमान बन गए हैं , पर कभी यह लोग अपने आपको यदुवंशी होने का गर्व किया करते थे । यदुवंशी होने के नाते हिन्दू रक्षक होना इनका अपना स्वभाव था ।आरडीजी अलवर के द्वारा हमें ज्ञात होता है कि यह मेव जाति स्वभाव से बहुत ही उपद्रवी अर्थात हिन्दू हितों के विपरीत कार्य करने वालों को सहन न करने वाली रही है । इस वीर हिन्दू रक्षक जाति ने कई सौ वर्षों तक ( फिरोज तुगलक के शासन काल तक जब तक कि यह मुसलमान बनी ) हिन्दू हितों की रक्षा की । यही लोग थे जिन्होंने बलबन के सेनापति उलुघ खान को नाकों चने चबा दिए थे। उनके सामने उस मुस्लिम आक्रमणकारी को दुम दबाकर भागना पड़ा था । इसी प्रकार हिन्दू वीर गक्खरों के सामने से भी उलुघ खान को दुम दबाकर भागना पड़ा था । बलबन ने स्वयं एक बड़ी सेना लेकर मेवों का विनाश करने का संकल्प लिया था। परन्तु इसके उपरान्त भी वह यदुवंशी मेवों का विनाश करने में सफल नहीं हो पाया था । इसका कारण केवल एक ही था की मेव अकेले नहीं थे , उनके साथ पूरी हिन्दू शक्ति खड़ी थी ।
सल्तनत काल में आसाम , मध्यप्रदेश दोआब में सर्वत्र हिन्दुओं का स्वतन्त्रता संघर्ष चलता रहा । हिन्दुओं के नित्य प्रति के स्वतन्त्रता आन्दोलनों और विद्रोहों से झुंझलाकर बलबन ने हमारे लाखों हिन्दू वीर योद्धाओं अर्थात स्वतन्त्रता सैनानियों की हत्या कर दी थी।

स्वामी श्रद्धानन्द जी का महत्वपूर्ण सुझाव

स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपनी पुस्तक ‘हिंदू संगठन’ में बहुत उत्तम बात कही है । वह लिखते हैं – “मेरा सर्वप्रथम सुझाव यह है कि प्रत्येक नगर और शहर में एक हिन्दू राष्ट्र मन्दिर की स्थापना की जानी चाहिए । जिसमें 25000 व्यक्ति एक साथ समा सकें और उन स्थानों पर प्रतिदिन भगवत गीता , उपनिषद , रामायण और महाभारत की कथा होनी चाहिए । इन राष्ट्र मन्दिरों का प्रबन्ध स्थानीय सभा के हाथ में रहना चाहिए और वह इन स्थानों के भीतर अखाड़ा , कुश्ती, गदा आदि खेलों का भी प्रबन्ध करें । जबकि हिंदुओं के विभिन्न सांप्रदायिक मंदिरों में उनके इष्ट देवताओं की पूजा होती है। उदार हिन्दू मन्दिरों में तीन मातृ शक्तियों की पूजा का प्रबन्ध होना चाहिए और वह हैं – गौ माता , सरस्वती माता और भूमि माता । वहाँ कुछ जीवित गायें रखी जाएं जो हमारी समृद्धि की द्योतक हैं, उस मन्दिर के प्रमुख द्वार पर गायत्री मन्त्र लिखा जाए जो प्रत्येक हिन्दू को उसके कर्तव्य का स्मरण कराएगा तथा अज्ञानता को दूर करने का सन्देश देगा और उस मन्दिर के बहुत ही प्रमुख स्थान पर भारत माता का एक सजीव नक्शा बनाना चाहिए। इस नक्शे में उसकी विशेषताओं को विभिन्न रंगों द्वारा प्रदर्शित किया जाए और प्रत्येक बच्चा मातृभूमि के सामने खड़ा होकर उसे नमस्कार करे और यह प्रतिज्ञा दोहराए कि वह अपनी मातृभूमि को उसी प्राचीन स्थान पर पहुँचाने के लिए प्राणों तक की बाजी लगा देगा जिस स्थान से उसका पतन हुआ था ।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक उगता भारत

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betnano giriş
vdcasino
Vdcasino giriş
vdcasino giriş
ngsbahis
ngsbahis
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
kolaybet giriş
kolaybet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
casibom giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
damabet
casinofast