अपने पूर्व अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती के अवसर पर दिल्ली के राजेंद्र भवन में अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद समस्याएं और समाधान विषय पर आयोजित गोष्ठी संपन्न

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भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत की अनमोल की धरोहर : विपिन खुराना

संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए पार्टी के कार्यालय मंत्री विपिन खुराना ने कहा कि भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद वैश्विक धरोहर है। जिसे आज के संदर्भ में सारे संसार को स्वीकार करना चाहिए । क्योंकि मानवतावाद की भावना यदि किसी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से ली जा सकती है तो वह भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है ।

उन्होंने भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आहत करने वाले राजनीतिक दलों व नेताओं की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि जो लोग भारत की मौलिक चेतना को नहीं समझते वे भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की वास्तविक परिभाषा से अनभिज्ञ हैं । उन्होंने कहा कि भारत की मौलिक संस्कृति समस्त मानवता को साथ लेकर चलने वाली संस्कृति है , जो लोग संकीर्णता और सांप्रदायिकता की राजनीति करते हैं वे तुष्टीकरण और छद्म धर्मनिरपेक्षता के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक और राजनीतिक मूल्यों का हनन कर रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट में हिंदू महासभा का भी हो प्रतिनिधित्व : मनीष पांडे

अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन में 1949 से अब तक हिंदू महासभा ने सबसे अहम भूमिका निभाई है । इसलिए राम मंदिर ट्रस्ट में योगी आदित्यनाथ जी को हिंदू महासभा का कोई प्रतिनिधि भी लेना चाहिए । साथ ही उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने विशेष परिश्रम से राम मंदिर आंदोलन को ऊंचाई दी और गोलियां खाई ,उनमें से एक श्री विंध्यवासिनी पांडेय को भी इस ट्रस्ट का सदस्य बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल भावनात्मक बातें करने या भाषणबाजी करने से देश नहीं चल सकता। देश चलाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है । उन्होंने कहा कि हिंदुओं का सैनिकीकरण और राजनीति का हिंदूकरण समय की आवश्यकता है । इसी के आधार पर हम ‘माला और भाला , शस्त्र और शास्त्र , संत और सिपाही’ की पूजा करने वाली भारत की सांस्कृतिक चेतना और विरासत को सुरक्षित रख पाने में समर्थ होंगे।

सावरकर को समय ने स्थापित कर दिया है, उन्हें किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं : रणजीत सावरकर

अपने पूर्व अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज की जयंती के पवित्र अवसर पर ‘भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : समस्याएं और समाधान’- विषय पर अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा आयोजित संगोष्ठी यहां दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित राजेंद्र भवन में विगत 2 फरवरी को संपन्न हुई।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए क्रांति वीर सावरकर जी के पौत्र और हिंदूवादी नेता रणजीत सावरकर ने कहा कि सावरकर जी जैसे महानायक को किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है, समय ने सिद्ध कर दिया है कि वह अपने समय में सही सोच रहे थे और उनके दृष्टिकोण से ही देश व संसार का भला हो सकता है। रंजीत सावरकर ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह क्रांतिवीर सावरकर जी की विरासत को आगे लेकर चल रहे हैं और वे उनके उत्तराधिकारी हैं । उन्होंने कहा कि सावरकर जी एक स्थापित नेता हैं । जिनकी विचारधारा कालजयी है , जिसमें कभी जंग नहीं लग सकता और जो सदा अपने आप को शुद्ध रखने में सक्षम है । उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी देश शस्त्र और शास्त्र के उचित समन्वय से ही आगे बढ़ सकता है , जो देश शस्त्र और शास्त्र का समन्वय स्थापित करने में असफल हो जाता है वह समय आने पर युद्ध को भूल जाता है। वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। संसार में उन्हीं संस्कृतियों ने अपनी अमरता को प्राप्त किया है या अपने आप को बचाए रखने में सफल रही हैं जिन्होंने शस्त्र और शास्त्र का उचित समन्वय करके शासन सत्ता को चलाया है या अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को लोगों में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने अखिल भारत हिंदू महासभा के लोगों का इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बाबा पंडित नंदकिशोर मिश्र व उनके साथी वास्तविक सावरकरवाद को लोगों में परोस रहे हैं। निश्चय ही वे देश के लिए एक शुभ संदेश दे रहे हैं और यह बता रहे हैं कि सावरकर जी की विचारधारा को लेकर चलने वाले लोग अभी इस देश में है । उन्होंने कहा कि आने वाला समय निश्चित रूप से हिंदू महासभा का होगा।

सांस्कृतिक चेतना हमारे राष्ट्रवाद में समाहित है : बाबा नंदकिशोर मिश्र

अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीयअध्यक्ष बाबा नंद किशोर मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए संगोष्ठी में कहा कि सांस्कृतिक चेतना हमारे राष्ट्रवाद में समाहित है । उन्होंने कहा कि आज भारत की सांस्कृतिक चेतना को उजागर कर जन-जन में उसका प्रचार करने की आवश्यकता है ।

श्री मिश्र ने कहा कि वैचारिक क्रांति का सूत्रपात हम अपने समाचार पत्र उगता भारत के माध्यम से कर चुके हैं । जिसने इतिहास के पुनरलेखन के संबंध में विशेष कार्य किया है। उन्होंने कहा कि इतिहास का गौरवमयी लेखन समय की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति हम सामूहिक रूप से कर रहे हैं। इसके लिए हमने इतिहास पुनर्लेखन समिति का गठन किया है। जिसकी अध्यक्षता डॉ राकेश कुमार आर्य को दी गई है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर के सपनों का भारत बनाने के लिए उनकी इच्छा को दृष्टिगत रखते हुए भारत के इतिहास को हम फिर से लिखने पर गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगोष्ठी में उपस्थित हुए सभी महानुभावों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें आश्वस्त किया कि पार्टी भविष्य में भी वैचारिक क्रांति का सूत्रपात करने के लिए ऐसी गोष्ठियों का आयोजन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज की जयंती के अवसर पर हम सब यह प्रतिज्ञा लेते हैं कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हिंदू महासभा प्राणपण से कार्य करती रहेगी और सरकार की गलत नीतियों का जहां विरोध करेगी वहीं उसकी राष्ट्रवादी नीतियों का खुले दिल से स्वागत भी करेगी।

हिंदुओं का सैनिकीकरण समय की आवश्यकता : संदीप कालिया

अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से अपने विचार रखते हुए पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया ने कहा कि हिंदुओं का सैनिकीकीकरण समय की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सुरक्षा तभी संभव है , जब इस देश की सांस्कृतिक धरोहर और विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हिंदुओं का सैनिकीकरण किया जाएगा । श्री कालिया ने कहा कि सैनिकीकरण का अभिप्राय किसी संप्रदाय विशेष के विरुद्ध कार्यवाही करना नहीं है , बल्कि जो लोग इस देश की सांस्कृतिक विरासत को समाप्त कर विदेशी सांस्कृतिक आक्रमण का समर्थन कर रहे हैं , उनका पूर्णतया सफाया करना है और यह तभी संभव है जब देश की मूल चेतना का प्रतिनिधित्व करने वाला हिंदू जागृत ,सचेत और सावधान हो।

श्री कालिया ने कहा कि देश इस समय सांस्कृतिक संक्रमण के काल से गुजर रहा है ।जिसके लिए विशेष परिश्रम करने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को क्षति पहुंचाने वाले जो लोग इस देश में रहकर पाकिस्तान के गीत गाते हैं या एनआरसी , एनपीआर या सीएए जैसे राष्ट्रवादी कार्यों को लेकर धरना प्रदर्शन करते हैं वे इस देश के लिए समस्या बन चुके हैं । क्योंकि ये देश की मौलिक चेतना का विरोध करने वाले लोग हैं । जिनके प्रति सरकार को कठोर कार्रवाई करनी ही चाहिए , अन्यथा यह रोग कोढ बनकर देश में फैल जाएगा , जिसका इलाज करना एक दिन असंभव हो जाएगा।

देश की मौलिक चेतना ही इसका सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है : देवेंद्रसिंह आर्य

अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा आयोजित ‘ भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद :समस्याएं और समाधान ‘- संगोष्ठी में पश्चिम उत्तर प्रदेश विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री देवेंद्रसिंह आर्य ने अपनी पार्टी की ओर से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की मौलिक चेतना ही इस देश का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है । जिसमें वेद का यह संदेश मौलिक रूप से छिपा हुआ है कि जो लोग देश और समाज की मुख्यधारा को गंदला करते हैं या उसका विरोध करते हैं उनका विनाश किया जाए और जो लोग देश की मुख्यधारा में विश्वास रखते हुए आगे बढ़ते हैं वे चाहे किसी भी जाति , बिरादरी या समाज के हों उन सबके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की जाए । कृण्वन्तो विश्वमार्यम् और वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर विश्वास व्यक्त करते हुए श्री आर्य ने कहा कि यह तभी संभव है जब दुष्टों का विनाश और सज्जनों का विकास करने के लिए शासन संकल्पित होगा ।

श्री आर्य ने कहा कि जो लोग आज सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए राजनीति को तुष्टीकरण और धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढाकर हिंदू विरोध करते-करते राष्ट्र विरोध पर आ गए हैं वे देश के संविधान की तो हत्या कर ही रहे हैं , साथ ही समाज की हत्या भी कर रहे हैं। ऐसे लोगों से देश के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को खतरा है। जिसके लिए सरकार को सचेत होकर कठोर कानून बनाने चाहिए । जिससे किसी को भी इस देश के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मौलिक चेतना को क्षतिग्रस्त करने का अवसर उपलब्ध न हो।

उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश विकास पार्टी जहां सर्व जनहित में विश्वास रखती है वहीं सावरकर जी के इस सिद्धांत का भी समर्थन करती है कि राष्ट्र प्रथम के आधार पर ही राजनीति का निर्धारण किया जाए और किसी भी अतिवादी व्यक्ति के साथ तुष्टीकरण का खेल न खेला जाए।

हिंदू महासभा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सच्चा संगठन : योगी जयनाथ जी महाराज

हिंदू महासभा के संगठन मंत्री योगी जयनाथ जी महाराज ने कहा कि भारत प्राचीन काल से दुनिया को राजनीतिक , सामाजिक ,धार्मिक चिंतन देकर मानवीय मूल्यों का सच्चा प्रहरी बनकर मानवता का मार्गदर्शन करने वाला देश रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी भारत के पास यह सारे सांस्कृतिक मूल्य हैं। इन्हीं की सामूहिक चेतना का नाम भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है। जिसे अखिल भारत हिंदू महासभा अक्षरश; स्वीकार और अंगीकार करके आगे बढ़ रही है । योगी जयनाथ जी महाराज ने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा ही भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सच्ची प्रहरी है।

उन्होंने कहा कि हम न केवल सावरकर के चिंतन में विश्वास रखते हैं बल्कि हम पटेल जी के राष्ट्रवाद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस शरीके अनेकों क्रांतिकारियों के बलिदानों से उपजे भारत के राष्ट्रवाद का भी समर्थन करते हैं। जिन्होंने अनेकों कष्ट सहकर भी इस देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया । उन्होंने कहा कि आज भी हम इसी क्रांतिकारी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य में भारत के इतिहास को इसी प्रकार की दिशा देने के लिए कार्य करते रहेंगे। संगठन मंत्री ने कहा कि वैचारिक क्रांति के लिए अखिल भारत हिंदू महासभा की यह सेमिनार शुरुआत मात्र है , अभी इस दिशा में हम अनेकों सेमिनारों का आयोजन करेंगे , जिससे देश की सांस्कृतिक चेतना का संचार लोगों के भीतर हो सके।

इतिहास के पुनर्लेखन से ही होगा भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का वास्तविक प्रचार प्रसार : डॉ राकेश कुमार आर्य

अखिल भारत हिंदू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रवादी इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि इतिहास के पुनर्लेखन के माध्यम से ही भारत के वास्तविक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रचार प्रसार करना संभव होगा। श्री आर्य ने कहा कि एक योजना के अंतर्गत देश की कांग्रेसी सरकारों ने कम्युनिस्टों के साथ मिलकर देश के इतिहास का विकृतिकरण किया है। जिससे हमारे क्रांतिकारी शूरवीरों को और इतिहासनायकों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने का राष्ट्रघाती कार्य किया गया है। श्री आर्य ने कहा कि जब तक भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद के प्रतीक इन इतिहासनायकों को इतिहास में सही स्थान नहीं दिया जाएगा तब तक भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समझना कठिन हो जाएगा । उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवपूर्ण अतीत के बारे में बताने के लिए भारत के इतिहास का गौरवमयी पुनर्लेखन समय की आवश्यकता है।

डॉ आर्य ने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से इस दिशा में ठोस कार्य किए जाने हेतु भारतीय इतिहास पुनर्लेखन समिति का गठन किया गया है । जिसमें देश के राष्ट्रवादी इतिहासकारों को सम्मिलित कर एक ऐसी टीम का गठन किया गया है जो देश के गौरवमयी इतिहास का पुनर्ल करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि देश का नायक छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप ही बन सकते हैं , कोई अकबर या औरंगजेब नहीं।

क्रांतिकारी हुतात्माओं के सपनों में छिपा है भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : राज्यश्री

संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए बिहार प्रदेश संयोजक श्रीमती राज्यश्री ने कहा कि क्रांतिकारी हुतात्माओं के सपनों में ही भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद छिपा हुआ है । उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने विदेशी धरती पर रहकर भारत की आजादी का आंदोलन चलाया उन्होंने भारत की चेतना को जागृत किया ,उनका सपना भारत की सांस्कृतिक चेतना को झंकृत कर गया।

उन्होंने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा ने ऐसे अनेकों बलिदानियों को जन्म दिया जिन्होंने विदेशी धरती पर रहकर भारत के वेदों , उपनिषदों और अन्य ऐतिहासिक व धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर भारत के लोगों को आजादी के लिए प्रेरित किया। उनका लक्ष्य भारत में भारतीयता के अनुरूप शासन स्थापित करना था ।

जबकि अमित सिन्हा ने कहा कि जिन लोगों ने क्रांतिकारी बलिदानियों के इन बलिदानों का अपमान करते हुए इतिहास का लेखन किया है उन्होंने भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विरुद्ध जाकर इतिहास लिखा है । जिससे हमारी बलिदानी परंपरा का हनन हुआ है। श्री सिन्हा ने कहा कि भारत की आजादी भीख मांग कर नहीं मिली थी , बल्कि इसके लिए लाखों करोड़ों लोगों ने अपना बलिदान दिया था। जब तक उन लाखों-करोड़ों लोगों का बलिदान इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से नहीं लिखा जाएगा , तब तक भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की मौलिक चेतना को समझ पाना कठिन होगा।

देश के शत्रुओं को कुचलना ही भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : विनोद सर्वोदय

हिंदूवादी चिंतक लेखक और विचारक एवं वक्ता के रूप में उपस्थित हुए श्री विनोद सर्वोदय ने संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के शत्रुओं को कुचलना ही भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है । जब तक देश के धर्म व संस्कृति पर प्रहार करने वाले लोग देश के भीतर या बाहर कहीं पर भी मौजूद हैं , तब तक भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए गंभीर खतरे बने रहेंगे।

श्री सर्वोदय ने कहा कि भारत एक जीवंत राष्ट्र है। इसकी सनातन संस्कृति सनातन इसलिए है कि यह पुरातन होकर भी अधुनातन है। इसका अधुनातन स्वरूप सदा वर्तमान व नवीन रहता है । उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को समाप्त करने वालों के विरुद्ध भारत ने लंबा संघर्ष किया है। यह सारा संघर्ष भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को जागृत किए रखने के लिए लड़ा गया । उसके लिए जिन – जिन लोगों ने बलिदान दिए उनके बलिदानों को यदि आज देश भुला देगा तो समझिए कि भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हम अपने हाथों मार देंगे।

उन्होंने कहा कि गांधीवाद के कारण इस देश में संस्कृतिपुरुषों और धर्मप्रेमी लोगों पर आज भी हमले होते हैं , जो बहुत ही चिंता का विषय है । जबकि देश के परिवेश को गंदला करने वाले दुष्ट अत्याचारी लोगों के विरुद्ध यदि कुछ भी होता है तो मानवाधिकारवादी तथाकथित संगठन के सामने आते हैं और विपक्ष में बैठे कई लोग भी उनका साथ देते दिखाई देते हैं। जिसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा । अब ऐसे लोगों से कड़ाई से निपटने का समय आ गया है।

भारतीय चिकित्सा पद्धति को अपनाना समय की आवश्यकता : डॉक्टर अर्जुन पांडे

हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर अर्जुन पांडे ने कहा कि वर्तमान में केंद्र की मोदी सरकार आयुष मंत्रालय के माध्यम से भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली को न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है । जिस पर सभी उपस्थित सदस्यों ने मेजे थपथपा कर सरकार के इस निर्णय का स्वागत व समर्थन किया। डॉक्टर अर्जुन पांडे ने आगे कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद को अपनाया जाना समय की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने के लिए हम अपने प्राचीन चिकित्सा शास्त्रियों के बताए हुए रास्ते को अपनाएं और उसका अनुगमन करें जिससे आज हम कई बीमारियों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

हिंदू महासभा के युवा नेता नीरपाल भाटी ने इस अवसर पर कहा कि इस समय दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करने का समय आ गया है । यदि हमने समय और परिस्थितियों को नहीं समझा तो शत्रु अपने षड़यंत्रों के माध्यम से देश को बर्बाद करने में सफल हो जाएगा । इसलिए हिंदू के जागरण में ही देश का जागरण निहित है। जिसके लिए हम यहां से संकल्पित होकर जाना चाहिए कि हम प्रत्येक क्षेत्र में अपने हिंदू भाइयों का जागरण करेंगे और उसे देश के सामने खड़ी समस्याओं से अवगत कराएंगे।

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