देश की राजनीतिक साख और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मामला

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तनवीर जाफरी

तनवीर जाफ़री

पड़ोसी देश बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की आवामी लीग सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में व्यापक हिंसा हुई । वहां नौकरियों में विवादित आरक्षण व्यवस्था पर हुये राष्ट्रव्यापी विरोध तथा अपनी सरकार के विरुद्ध हुए व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख़ हसीना प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर 5 अगस्त को भारत आ गई थीं। इस हिंसा के दौरान बांग्लादेश में आवामी लीग से जुड़े अनेक नेताओं सहित स्थानीय अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू समुदाय के लोगों व उनके घरों व व्यवसायिक ठिकानों पर भी अनेक हमले हुए हैं। बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस नाम के एक ग़ैर -राजनीतिक हिन्दू संगठन के दावों के अनुसार पांच अगस्त को शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद से 48 ज़िलों में 278 स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय को या तो हमलों अथवा धमकियों का सामना करना पड़ा है। निश्चित रूप से यह अत्यंत निंदनीय व गहन चिंता का विषय है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुये हमले की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि इसकी धमक संयुक्त राष्ट संघ में भी सुनाई दी है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले से अपने सम्बोधन में कहा कि ‘‘बांग्लादेश में जो कुछ हुआ है उसको लेकर पड़ोसी देश के नाते हमें चिंता होना स्वाभाविक है। मैं आशा करता हूं कि वहां हालात जल्द सामान्य होंगे। 140 करोड़ देशवासियों की चिंता यह है कि वहां हिंदू, अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित हो। ” प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि ‘‘भारत हमेशा चाहता है कि हमारे पड़ोसी देश सुख और शांति के मार्ग पर चले। शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है, हमारे संस्कार हैं। आने वाले दिनों में बांग्लादेश की विकास यात्रा के लिए हमेशा हमारी शुभेच्छा रहेगी, क्योंकि हम मानव जाति की भलाई के बारे में सोचने वाले लोग हैं।”

                     प्रधानमंत्री मोदी की इस चिंता का ही परिणाम था कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोo मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी से फ़ोन पर बातचीत की और बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व संरक्षण का आश्वासन दिया। प्रोo मोहम्मद यूनुस हिन्दू समुदाय के साथ एकजुटता दिखाते हुए बांग्लादेश के सबसे प्रमुख हिंदू मंदिर ढाकेश्वरी मंदिर भी गए और हिंदू समुदाय के लोगों को बंगलादेश के परिवार का सदस्य बताते हुये उन्हें पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन भी दिया। परन्तु बांग्लादेश की घटनाओं को लेकर हमारे देश में चिंताओं के साथ साथ अफ़वाहों का बाज़ार भी बहुत गर्म रहा। केवल सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि वाट्सएप जैसे फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाले माध्यम को ही आधार मानकर देश के अनेक गोदी मीडिया चैनल्स ने उन्हीं फ़ेक न्यूज़ को प्रसारित कर भारत में भी तनाव बढ़ाने की पूरी कोशिश की। ऐसे अनेक टी वी चैनल व अख़बार जिनके नेटवर्क बांग्लादेश में नहीं हैं वे सभी वाट्सएप व फ़ेक न्यूज़ का सहारा लेकर विचलित कर देने वाली झूठी वीडिओ चलाकर अपना एजेंडा थोपने में लगे थे। 

                   भारत में इसी तरह के झूठ को प्रसारित कर यह भ्र्म फैलाने की कोशिश की गयी कि बांग्लादेश में हिन्दुओं का नरसंहार हो रहा है तथा वहां हिन्दू महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया जा रहा है। हद तो यह है इस झूठे प्रचार तंत्र ने 2021 के अपने ही देश में बंगलौर में हुये एक सामूहिक बलात्कार के विडिओ क्लिप को बांग्लादेश में हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार का क्लिप बताकर प्रसारित कर दिया ? बांग्लादेश में वहां की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मशरफ़े मुर्तज़ा के घर में आग लगा दी गयी। मुर्तज़ा 2 बार आवामी लीग के सांसद चुने गए थे तथा शेख़ हसीना के क़रीबी लोगों में थे। इसीलिये प्रदर्शनकारियों ने उन्हें निशाना बनाया परन्तु भारत में यह दिखाया गया कि बांग्लादेश टीम के हिन्दू क्रिकेटर लिटन दास के घर को जला दिया गया। मज़े की बात तो यह है कि भारत में अपने घर को जलने की ख़बर ख़ुद लिटन दास अपने ही घर में भारतीय टीवी चैनल पर देखते नज़र आये। क्या यही विश्वसनीयता है हमारे देश के फ़रेबी बेलगाम पूर्वाग्रही मीडिया की ? इसी तरह बांग्लादेश के मशहूर शहर चिटगांव में शेख़ हसीना के एक क़रीबी सलमान फ़ज़लुर्रहमान की दुकान में आग लग दी गयी देश के एक साम्प्रदायिकता भड़काने वाले टीवी चैनल ने इसे हिन्दू व्यक्ति का घर जलाने के नाम से प्रसारित कर हमारे देश में नफ़रत फैलाई। वहां का एक प्रसिद्ध राज कॉफ़ी एंड रेस्टूरेंट शॉप को आग लगाई गयी उस रेस्टूरेंट भवन को मंदिर भवन में आग लगना बताया  गया।

                           इसी तरह एक  वीडिओ हिन्दू महिला के अपहरण की वीडिओ बताकर चलायी गयी। जबकि यह छ महीने पुराना वीडिओ था जिसमें किसी हिन्दू समुदाय के एक नशेड़ी पति द्वारा अपनी ही पत्नी का अपहरण कराया गया था जो उसे छोड़कर चली गयी थी। एक पूरे  मुस्लिम परिवार को मारा गया उसे हिन्दू परिवार बताया गया। एक विडिओ हिन्दू व्यक्ति को तालाब में पत्थर मार मारकर डुबोने की बताकर वायरल की गयी। जबकि यह मौलवी बाज़ार ज़िला बांग्लादेश की वीडिओ है जिसमें आवामी लीग का सेक्रेटरी जोकि स्थानीय मेयर भी है, उसे लोग तालाब में पत्थर मार कर उसे डुबोना चाह रहे हैं। ऐसे सैकड़ों झूठे मनगढ़ंत समाचार चलाकर बांग्लादेश के बहाने भारत में नफ़रत फैलाने की कोशिश उसी वर्ग द्वारा की गयी जो दिन रात अपने इसी एकमात्र उद्देष्य में लगा हुआ है। 

                        सवाल यह भी है कि जब मुख्य मीडिया व आई टी सेल के प्रचारतंत्र द्वारा बार बार बांग्लादेश की हिंसा को हिन्दू विरोधी बताकर वहां ‘हिन्दुओं का नरसंहार’ व ‘महिलाओं का सामूहिक बलात्कार’ बताया गया। देश में सैकड़ों जगह प्रदर्शन कर ‘बांग्लादेश में नरसंहार’ व ‘हिन्दू महिलाओं का सामूहिक बलात्कार’ जैसे शब्द प्रयोग में लाये गए तो आख़िर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में वह शब्द क्यों नहीं इस्तेमाल किये ? विदेश मंत्री जयशंकर ने इन शब्दों का प्रयोग क्यों नहीं किया ? उसी बांग्लादेश से ऐसे वीडिओ व चित्र भी आये जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग दिन रात मंदिरों की रखवाली करते दिखाई दिये ? सेना की टुकड़ी मंदिर की रक्षा करते व फ़ौजी सौहार्दपूर्ण वातावरण में पुजारी के हाथों जलपान करते दिखाई दिये। इसे दिखने में फ़रेबी मीडिया ने इतनी तत्परता क्यों नहीं दिखाई ?

                      बेशक अल्संख्यकों की सुरक्षा हर देश की सत्ता की पहली ज़िम्मेदारी होनी चाहिये। चाहे वह बांग्लादेश हो,पाकिस्तान,अफ़ग़ानिस्तान,लंका या फिर भारत। और हर देश की सरकारों को इस ज़िम्मेदारी को प्राथमिकता के आधार पर कर्तव्य की तरह निभाना चाहिये। इसमें सरकार का ही नहीं बहुसंख्यक समाज का भी भरपूर योगदान होना चाहिये। जिस भी देश में जो भी साम्प्रदायिकतावादी शक्तियां हैं उन्हें परास्त करना चाहिये क्योंकि इनकी वजह से ही दुनिया में उस देश की बदनामी होती है। सवाल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का ही नहीं बल्कि देश के मान सम्म्मान का भी है।  

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