पुस्तक का नाम : मेरे मानस के राम अध्याय__ 3 , सीता स्वयंवर और भगवान परशुराम

images (43)

अब अपने गुरु विश्वामित्र जी के साथ चलते हुए रामचंद्र जी अपने भाई लक्ष्मण के साथ जनकपुरी पहुंच गए। यहां पर गुरुवर विश्वामित्र जी को पता चला कि राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह को लेकर चिंतित हैं। उन्हें इस घटना की भी जानकारी हुई कि किस प्रकार सीता जी ने शिव जी के धनुष को किसी समय विशेष पर उठाकर एक ओर रख दिया था। तब राजा जनक ने यह निश्चय किया था कि वह अपनी पुत्री का विवाह उस राजकुमार के साथ करेंगे जो इस धनुष को तोड़ देगा। इस प्रकार सीता जी का यह स्वयंवर नहीं था अपितु राजा जनक की शर्त के अनुसार होने वाला विवाह था। स्वयंवर में कन्या को अपनी पसंद का वर चुनने का अधिकार होता है, पर जब पिता की यह शर्त हो कि मेरी पुत्री का विवाह उस राजकुमार के साथ होगा जो प्रत्यंचा लगाकर इस धनुष को तोड़ देगा तो उस विवाह को वीर्यशुल्का ( मेरी पुत्री का विवाह उसके साथ होगा जो अपने पराक्रम – वीर्य का शुल्क देगा अर्थात प्रमाण देगा) कहा जाता था। यहां पर सीता जी अपने पिता के प्रण के साथ बंधी हुई हैं । यही बात राजा जनक के लिए चिंता का विषय बन गई है कि यदि कोई भी इस धनुष को तोड़ नहीं सका तो क्या उनकी पुत्री अविवाहित ही रह जाएगी ?
जब अनेक राजा इस धनुष को तोड़ने में असफल हो गए तब रामचंद्र जी का वहां आगमन राजा जनक के लिए प्रसन्नता का विषय तो था पर उन्हें शंका थी कि यह राजकुमार इस धनुष को तोड़ भी पाएगा या नहीं ? परंतु :-

जनक सभा के बीच में, किया धनुष को भंग।
देख वीरता राम की, जनक भी रह गए दंग।।

रामचंद्र जी के इस पराक्रम को देखकर राजा जनक उनके दरबारीजन और उनकी रानी सहित सभी महिलाएं दंग रह गईं ।सबको असीम प्रसन्नता हो रही थी । राजा जनक और उनकी रानी इस बात को लेकर अत्यंत प्रसन्न थे कि अब उनकी पुत्री सीता का विवाह होने जा रहा है। विवाह के कार्य को विधिवत संपन्न करने के लिए विश्वामित्र जी के साथ परामर्श कर राजा जनक ने राजा दशरथ को निमंत्रण भेजा। उसके पश्चात राजा जनक अपने सभी विशिष्ट जनों को साथ लेकर वरयात्रा के रूप में जनकपुरी पहुंच गए। तब राजा जनक ने राजा दशरथ के सामने प्रस्ताव रखा कि यह एक अद्भुत संयोग है कि आपके चार पुत्र हैं और इधर मेरी व मेरे अन्य भाइयों की कुल चार कन्याएं हैं । यह अति उत्तम होगा कि इस समय आपके चारों पुत्रों का विवाह मेरी चारों पुत्रियों के साथ हो। राजा दशरथ ने राजा जनक के इस प्रस्ताव को अन्य विद्वज्जनों की सहमति और सम्मति प्राप्त कर स्वीकार कर लिया।

दशरथ जी बुलवा लिए, किया विवाह संस्कार।
दशरथ जी प्रसन्न थे, मिल गईं वधुएं चार ।।

राजा जनक ने इस समय राजा दशरथ के सम्मान में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी। उन्हें पर्याप्त दान दहेज देकर विदा किया। वाल्मीकि जी ने विवाह संस्कार के समय की तैयारियों का मनोरम चित्रण किया है।

जनक भी प्रसन्न थे, दे दिया बहुत दहेज।
लाख गाय दी दान में, पुष्पों की सजी सेज।।

जिस समय विवाह के उपरांत राजा जनक राजा दशरथ सहित अपने सभी अतिथियों को विदा कर रहे थे, उस समय वहां पर भगवान परशुराम ए उपस्थित हुए। तुलसीदास जी ने परशुराम जी का आगमन उस समय बताया है ,जिस समय रामचंद्र जी ने धनुष तोड़ा था। परंतु मूल रामायण में यही बताया गया है कि अतिथियों को विदा करते समय परशुराम जी उपस्थित हुए थे। इसी बात को प्रमाणिक मानना चाहिए।

सोना , चांदी दान की, मोती, मूंगे खूब।
भगवान परशु आ गए, धारे थे जटाजूट।।

भगवान परशुराम जी के आगमन पर राजा दशरथ अत्यंत चिंतित हो उठे थे। उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि कहीं ऐसा ना हो कि भगवान परशुराम जी उनके पुत्रों का वध कर दें, पर ऐसा नहीं हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपनी विवेकशीलता, धैर्य ,संयम और वीरता का परिचय देते हुए परशुराम जी को ही पराजित कर दिया और वह लज्जित होकर वहां से चले गए।

किया पराभव गर्व का, परशु पर था सवार।
परशुराम लज्जित हुए, देख राम के वार ।।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin
grandpashabet giriş
sahabet giriş
casibom giriş
onwin giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
tipobet giriş