विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई पर विशेष

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आज हम विश्व जनसंख्या दिवस की औपचारिकताएं निभा रहे हैं। 1989 से हम इस दिन प्रत्येक वर्ष की 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाते हैं। 1989 तक संसार की जनसंख्या 5 अरब से नीचे थी। 11 जुलाई 1989 को जैसे ही विश्व जनसंख्या ने 5 अरब का आंकड़ा छुआ तो कुछ लोगों ने अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए इस बात को सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि विश्व जनसंख्या को नियंत्रित करने के ठोस उपाय किए जाने चाहिए। जिससे भूमंडल पर रहने वाले सभी मनुष्यों को विकास के समान अवसर उपलब्ध हो सकें।

यह संकल्प तो अच्छा था परंतु इस संकल्प के रहते रहते ही मात्र 30 वर्ष में ही आज विश्व की जनसंख्या लगभग 8 अरब हो चुकी है । इसी से पता चल जाता है कि वैश्विक स्तर पर लिए गए इस संकल्प की इतनी फजीहत उन तथाकथित विश्व नेताओं , बुद्धिजीवियों और इस क्षेत्र में काम करने वाले उन लोगों ने करके रख दी है , जिन्होंने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए बड़े-बड़े इनाम लिए हैं । ऐसा केवल इसलिए हुआ है कि ऊपर से लेकर नीचे तक किसी भी व्यक्ति ने इस ओर गंभीरता से काम लेने की नहीं सोची । संकल्पविहीन विकल्प चुनते रहना हमारा वैश्विक संस्कार बन चुका है। उसी ने हमें इस स्थिति तक पहुंचा दिया है कि संपूर्ण भूमंडल जनसंख्या विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है।

यदि भारत की बात करें तो यहां पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही है। देश जब आजाद हुआ था तो उस समय 32 – 33 करोड़ की आबादी थी , जो आज बढ़कर 4 गुना से भी अधिक अर्थात लगभग एक अरब 35 करोड़ हो चुकी है । यदि यहां पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून की मांग की जाती है तो कुछ लोगों की पर्सनल आस्था पर चोट लगने लगती है , जबकि कुछ राजनीतिज्ञों की वोट बैंक की राजनीति हिलने लगती है। चारों तरफ भूकंप आ जाता है और फिर इस देश को इसी के भाग्य पर छोड़ दिया जाता है।

कुछ समय पहले किसी समुदाय विशेष के लिए कहा गया था कि यदि वह गटर में पड़ा रहना चाहता है तो पड़ा रहने दीजिए , परंतु क्या यही बात हमारे सारे देश के लिए लागू नहीं होती कि हम गटर में हीं पड़े रहना देना चाहते हैं अपने आप को ?

हम गटर में पड़े रहकर ही इस जनसंख्या दिवस को मना लेते हैं । गटर से बाहर आकर खुली हवा की परिकल्पना करते हुए हम यह सोच नहीं पाते कि जनसंख्या नियंत्रण कर हम देश के प्रत्येक आदमी को उसके विकास के सारे अवसर कैसे उपलब्ध करा सकते हैं ? ऐसे में क्या लाभ है – इस जनसंख्या दिवस को मनाने का ?

सारी की सारी व्यवस्था पंगु हो चुकी है और सारी व्यवस्था के सामने बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह आकर खड़ा हो गया है। क्या समाधान हो सकता है इस सारी समस्या का कुछ आप भी विचार करें।

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