चुनावी बांड और भारत में चुनाव सुधार की अनिवार्यता

images (20)

इस समय इलेक्ट्रोल बॉन्ड को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। जिन राजनीतिक दलों को चंदा वसूली की इस प्रक्रिया से कोई लाभ नहीं हुआ है, वे उन राजनीतिक दलों पर आक्रामक दिखाई दे रहे हैं जिन्हें इस प्रकार की प्रक्रिया से पर्याप्त लाभ मिला है। आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी कांग्रेस को इस समय बीजेपी पर हमला करने का अच्छा अवसर उपलब्ध हो गया है। कांग्रेस इस समय चुनाव के लिए कोई मुद्दा ढूंढ रही थी । इलेक्ट्रोल बॉन्ड पर मचे शोर ने उसे तात्कालिक आधार पर बीजेपी पर आक्रमण करने के लिए एक मुद्दा अवश्य दे दिया है । जिससे कांग्रेस के लिए डूबते हुए को तिनके का सहारा वाली कहावत चरितार्थ हो गई है।
हम सभी यह भली प्रकार जानते हैं कि हमारे देश में सैकड़ों छोटे-बड़े राजनीतिक दल काम कर रहे हैं। जिस किसी के भी सिर में महत्वाकांक्षा या नेतागीरी की खुजली होती है वही एक नया राजनीतिक दल लेकर आ जाता है। यह माना जा सकता है कि लोकतंत्र में बहुदलीय व्यवस्था के लिए स्थान होता है, पर वह इतना भी नहीं होता कि सारे स्थान को राजनीतिक दल ही ग्रहण कर लें । यह भी एक सर्वमान्य सत्य है कि इन सैकड़ों राजनीतिक दलों में से कुछ राजनीतिक दल ही ऐसे होते हैं जिन्हें देश की जनता सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाती है। अधिकांश राजनीतिक दल उनके राष्ट्रीय अध्यक्षों की एक ऐसी फौज होते हैं जिन्हें उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुछ अन्य पदाधिकारी लोगों से पैसा ऐंठने और अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए प्रयोग करते हैं। भारत निर्वाचन आयोग की अधिसूचना दिनांक 15 मई 2023 के अनुसार देश के 26 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 58 दलों को राज्य पार्टी का दर्जा प्राप्त है। जबकि 2500 से अधिक राजनीतिक दल पंजीकृत हैं।
भारत में इलेक्ट्रोल बॉन्ड को लाने का उद्देश्य यही था कि इतनी बड़ी संख्या में कुकुरमुत्तों की तरह फैल गये ये राजनीतिक दल और उनके नेता देश की जनता की जेब पर डाका न डाल सकें। उद्देश्य था कि देश की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी बने। चुनावी बॉन्ड की इस प्रक्रिया से निश्चित रूप से लोगों की जेब पर डाका डालने वाले कुछ राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर नकेल लगाने में सफलता भी मिली। चुनावी बांड की इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि चुनावी फंडिंग केवल वही पार्टियां प्राप्त कर सकती हैं जिन्हें आम चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ हो। यदि कोई राजनीतिक दल एक प्रतिशत से कम वोट लेता है तो उसे चुनावी फंडिंग लेने का अधिकार नहीं होगा। निश्चित रूप से जिन राजनीतिक दलों का केवल कागजों में अस्तित्व है वे तो अब चुनावी फंडिंग लेने की प्रक्रिया में दूर-दूर तक भी नहीं आते हैं।
इस प्रकार के प्राविधानों से यह स्पष्ट हो जाता है कि चुनावी बांड के माध्यम से चुनावी फंडिंग को पूरी तरह सुरक्षित और डिजिटल बनाने में सहायता मिली है। केंद्र की मोदी सरकार का यह एक लक्ष्य भी रहा है कि सारी चीजें सुरक्षित और डिजिटल हो जाएं। अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि कोई व्यक्ति ₹2000 से अधिक का कोई दान चुनावी बांड और चेक के रूप में नहीं दे सकता। इसके बावजूद भी यदि वह ऐसा करता है तो यह कार्य गैर कानूनी होगा। यही कारण है कि चुनावी बांड के सभी लेन-देन चेक या डिजिटल माध्यम से किए जाते हैं।
हम सभी जानते हैं कि इंदिरा गांधी के जमाने में जब सीताराम केसरी पार्टी के कोषाध्यक्ष हुआ करते थे तो स्वयं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी यह पता नहीं होता था कि पार्टी के खाते में कितने रुपए हैं ? उस समय सारी प्रक्रिया बड़ी गोपनीय रहती थी सीताराम केसरी को इंदिरा गांधी ने उनके पद से हटाने का भी प्रयास किया था। पर वह ऐसा कर नहीं पाई थीं। क्योंकि सीता राम केसरी ने सारा हिसाब किताब बहुत गोपनीय रखा हुआ था जिसे बिना बताए हुए पार्टी के कोषाध्यक्ष पद से जाने की धमकी दे दिया करते थे। उस समय कांग्रेस में यह चर्चा आम तौर पर रहती थी कि खाता ना बही, जो चाचा ने कही, वही – सही।
निश्चित रूप से वह स्थिति अच्छी नहीं थी। आज बहुत हद तक यह पारदर्शिता है कि किसी भी राजनीतिक दल के खाते में पैसा कहां से आ रहा है और कितना आ रहा है ? कुछ लोगों की यह मान्यता रही है कि चुनावी बांड की इस प्रक्रिया को केंद्र की मोदी सरकार ने विपक्षी दलों को मिलने वाली चुनावी फंडिंग को रोकने के उद्देश्य से प्रेरित होकर लागू किया है। लोकतंत्र में आलोचना करने का सभी को अधिकार होता है। वैसे भी हमारा संविधान भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। परंतु इसके उपरांत भी हम यह कहना चाहेंगे कि केंद्र की मोदी सरकार ने यदि विपक्षी दलों की चुनावी फंडिंग की पड़ताल करने के लिए ही यह कदम उठाया है तो उसने अपने अपनी पार्टी अर्थात भाजपा को भी इसके दायरे से बाहर नहीं रखा है। जहां लोकतंत्र में आलोचना के साथ-साथ भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोगों को प्राप्त होती है , वहीं सरकार को ‘राष्ट्रप्रथम’ की पवित्र भावना को विकसित करने और उस पवित्र भावना को लागू करने में आने वाली बाधाओं को भी समीक्षित, निरीक्षित और परीक्षित करने का अधिकार होता है। जिस समय चाचा केसरी की राजनीतिक संस्कृति देश में काम कर रही थी, उस समय चुनावी फंडिंग की गोपनीयता लोगों के राइट टू इनफार्मेशन का उल्लंघन कर रही थी। पर आज उसे केंद्र की मोदी सरकार ने सबके लिए सहज सुलभ करवा दिया। इसे उचित ही कहा जाना चाहिए।
इस नई प्रक्रिया के बारे में हम सब यह भी जानते हैं कि चुनावी बांड आर्थिक रूप से स्थिर कंपनियों को किसी भी तरह से खतरा नहीं पहुंचाते हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य एक राजनीतिक दल को दूसरे राजनीतिक दल की तुलना में अधिक वित्तपोषित करना है। विशेषज्ञों की मान्यता है कि किसी राजनीतिक दल को कंपनी के वार्षिक लाभ का 7.5% दान करने की सीमा समाप्त होने से इसे और बढ़ावा मिला है।
इसमें दो मत नहीं हैं कि जिन राजनीतिक दलों के हाथों में देश की या किसी प्रदेश की बागडोर होती है, लोग उसे अधिक चंदा देते हैं। इसके चलते इस समय सबसे अधिक चंदा भाजपा को प्राप्त हुआ है। जिससे उसके विरोधियों का दिन का चैन और रात की नींद हराम हो गई है। इसलिए ऐसे राजनीतिक दलों का भाजपा के विरुद्ध मुखर हो जाना समझ में आ सकता है, पर इस सब के उपरांत भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनावी बॉन्ड की जिस प्रक्रिया को वर्तमान में लागू किया गया है वह पहले वाली चुनावी फंडिंग की प्रक्रिया से बहुत अधिक पारदर्शी है। यदि इसमें कहीं कुछ खामियां हैं ( जिनका रह जाना स्वाभाविक होता है) तो उन्हें दूर किया जा सकता है।
चुनाव सुधार की ओर चुनावी फंडिंग की यह प्रक्रिया पहला कदम है, अंतिम नहीं। इसे अंतिम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए यदि सभी राजनीतिक दल स्वच्छ राजनीति करते हुए स्वच्छ और स्वस्थ मानसिकता का परिचय दें तो देश के लिए और भी अच्छा हो सकता है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
timebet
timebet
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino
vaycasino giriş
gobahis giriş
gobahis giriş
vdcasino giriş
pusulabet giriş
betorder giriş
betorder giriş
ikimisli
ikimisli
ikimisli