समाधान की राह पर बढ़ता ज्ञानवापी मस्जिद का मामला

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आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी

चार खंड में आई है एएसआई की सर्वे रिपोर्ट :-
ज्ञानवापी सर्वे की एएसआई रिपोर्ट चार खंड में है। पहले खंड में 137 पेज हैं। इसमें स्ट्रक्चर और ब्रीफ फाइडिंग ऑफ सर्वे रिपोर्ट है। दूसरे खंड में पेज संख्या 1 से 195 तक साइंटिफिक सर्वे की रिपोर्ट है। तीसरे खंड में पेज नंबर 204 पर बरामद वस्तुएं का जिक्र है। चौथे खंड में तस्वीरे व डायग्राम हैं, जो 238 पेज में है। एक हजार फोटोग्राफ भी हैं।
एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक हुई :-
ज्ञानवापी का 355 वर्ष पुराना विवाद एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से समाधान की राह पर आ गया है। ज्ञानवापी से संबंधित मां शृंगार गौरी मूल वाद की सुनवाई 14 जुलाई 2023 को पूरी कर ली थी। जिला जज की अदालत ने 23 जुलाई को आदेश सुनाया था। हिंदू और मुस्लिम पक्ष की मौजूदगी में अदालत ने रडार तकनीक एएसआई से सर्वे कराने का आवेदन मंजूर किया था। साथ ही, एएसआई के निदेशक को सर्वे कराने के लिए आदेशित किया था।
सर्वे की प्रक्रिया:-
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट 24 जनवरी 2024 को जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने सार्वजनिक कर दी है। जिसमें दावा किया गया है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। एएसआई को सर्वे के दौरान इससे जुड़े कुल 32 सबूत मिले हैं। विष्णु जैन के अनुसार 839 पेज की इस रिपोर्ट में मंदिर के कई साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। इनके आधार पर कहा जा सकता है कि ज्ञानवापी में मसजिद से पहले बड़ा मंदिर था। दीवारों और स्तंभों पर भगवान शिव के तीन नाम जर्नादन, रुद्र और उमेश्वर भी लिखे मिले हैं। मसजिद के सारे पिलर मंदिर के ही थे। इसके अलावा मंदिर की पश्चिमी दीवार पर भी कई स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं , जो वहां मंदिर होने का खुलासा करते हैं। निष्कर्ष में बताया है कि वर्तमान ढांचा 2 सितम्बर 1669 के आसपास का है। उसके पूर्व वहां काफी प्राचीन मंदिर रहा होगा। जिसके साक्ष्य जीपीआर तकनीकी की जांच में सामने आये हैं। जीपीआर तकनीक में गुंबद के नीचे व कॉरिडोर के बगल में एक चौड़ा कुआं दिखाई दिया है। नीचे चार तरह के चैम्बर मिले हैं। जिसमें एक बीचोबीच, दूसरा उत्तर, तीसरा पश्चिम और चौथा दक्षिण में है।
हिंदू शैली की बनावट :-
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट्रल चैंबर के पास मुख्य प्रवेश द्वार और एक काफी प्राचीन मुड़ावदार ढांचा है। पश्चिम चैंबर और वॉल में जो बनावट की शैली उभरी है वह हिंदू मंदिर की है। नीचे मौजूद खंभों पर दोबारा ढांचा बनाया गया है। ये पूरी तरह तय है कि वर्तमान ढांचा किसी दूसरे ढांचे के ऊपर बनाया गया है। पुराना ढांचा मंदिर शैली की बनावट वाला है। इस पर हिंदू पक्ष का कहना है कि भोले बाबा मिल गए हैं। एएसआई ने माना कि ये एक पुराना ढाँचा है, जिसके ऊपर नया स्ट्रक्चर बनाया गया है। मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई । अब हिंदुओं को पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए।
सर्वे की रिपोर्ट पक्षकारों को सौंपा गया :-
जिला अदालत ने 25 जनवरी 2024 की रात दस बजे काशी विश्‍वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट पक्षकारों को सौंप दी।हिंदू याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के बारे में दावा किया था कि 17वीं सदी की इस मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के ऊपर किया गया था। इसके बाद अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया था। एएसआई ने 18 दिसंबर 2023 को सीलबंद लिफाफे में अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट जिला अदालत को सौंप दी थी।
अदालत में 33 वर्षों से मुकदमेबाजी चल रही है। 1991 में लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ का केस दाखिल हुआ था। एएसआई के विशेषज्ञों की टीम ने जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर 2023 तक ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का काम किया है। सील वजूखाने को छोड़कर परिसर के कोने-कोने से साक्ष्य जुटाए गए हैं। मिट्टी की जांच की गई। दीवारों पर बने प्रतीक चिन्ह की फोटो, वीडियोग्राफी कराई गई। यह भी देखा गया कि प्रतीक चिन्ह किस सदी में बने हैं।ज्ञानवापी के तहखानों से तमाम साक्ष्य मिले हैं, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञानवापी में मस्जिद की वर्तमान संरचना के निर्माण से पहले बड़ा हिन्दू मंदिर था।
सर्वे रिपोर्ट की 10 मुख्य बिन्दु :-
1. मस्जिद से पहले वहां बने मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
2. सतरहवीं शताब्‍दी में मंदिर को तोड़कर उसके हिस्‍से को मस्जिद में समाहित किया गया।
3. मस्जिद के निर्माण में मंदिर के खंभों के साथ ही अन्‍य हिस्सों का बिना ज्‍यादा बदलाव किए इस्‍तेमाल किया गया।
4. कुछ खंभों से हिन्‍दू चिह्नों को मिटाया गया है।
5. मस्जिद की पश्चिमी दीवार पूरी तरह हिन्‍दू मंदिर का हिस्‍सा है।
6. सर्वे में 32 शिलापट और पत्‍थर मिले हैं, जो वहां पहले हिन्‍दू मंदिर होने के साक्ष्‍य हैं।
7. शिलापटों पर देवनागरी, तेलुगु और कन्‍नड में आलेख लिखे हैं।
8. एक शिलापट में जनार्दन, रुद्र और उमेश्‍वर लिखा है, जबकि एक अन्य शिलापट में ‘महामुक्ति मंडप’ लिखा है।
9. मस्जिद के कई हिस्‍से में मंदिर के स्‍ट्रक्‍चर मिले हैं।
10. मस्जिद के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का प्रयास किया गया है।
ज्ञानवापी के सर्वे विस्तृत सूची
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम को ज्ञानवापी के सर्वे में 55 मूर्तियां मिलीं हैं। इसमें सबसे ज्यादा विग्रह शिवलिंग के मिले हैं। ज्ञानवापी की दीवार सहित कई स्थानों पर 15 शिवलिंग और अलग-अलग काल के 93 सिक्के भी मिले हैं। पत्थर की मूर्तियों के साथ ही अलग-अलग धातु, टेराकोटा सहित घरेलू इस्तेमाल की 259 सामग्रियां मिली हैं। एक पत्थर ऐसा है, जिस पर राम लिखा है। हिंदू पक्ष के अनुसार, वह जो दलीलें दे रहा था और दावे कर रहा था उसकी तस्दीक एएसआई के सर्वे में मिले सबूत करते हैं। सर्वे रिपोर्ट जो सामने आई है और उसमें जिन साक्ष्यों का जिक्र है उसने एक बार फिर अयोध्या मामले की याद दिला दी है।
जीपीआर सर्वे में मुख्य गुंबद के नीचे बेशकीमती पन्नानुमा टूटी कीमती धातु मिली है। इसे मुख्य शिवलिंग बताया जा रहा है। इस स्थान पर खनन और सर्वे की बात कही गई है। एएसआई की 176 सदस्यीय टीम ने ज्ञानवापी परिसर का जो सर्वे किया था, उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है। रिपोर्ट में ज्ञानवापी को बड़ा हिंदू मंदिर बताया गया है। इसमें 32 अहम हिंदू स्थलों का जिक्र है। शिवलिंग के साथ नंदी, गणेश की मूर्तियां भी मिली हैं।
विष्णु, कृष्ण ,हनुमान वा अन्य देवी-देवताओं के विग्रह :-
वैज्ञानिक पद्धति से हुए सर्वे में मंदिर के प्रमाण के साथ ही विष्णु, मकर, कृष्ण, हनुमान, द्वारपाल, नंदी, पुरुष और मन्नत तीर्थ सहित अन्य विग्रह मिले हैं। मुगल काल, अंग्रेजी हुकूमत सहित अन्य समय काल के चिह्न मिले हैं। शाह आलम और सिंधिया काल के सिक्के (एक और 25 पैसे) संरक्षित किए गए हैं।
सिक्के और टेराकोटा की मूर्तियां :-
एएसआई ने 93 सिक्के जुटाए हैं। इनमें विक्टोरिया महारानी, विक्टोरिया रानी, धीरम खलीफा, किंग चार्ज सहित अन्य काल के सिक्के शामिल हैं। एएसआई ने टेराकोटा की 23 मूर्तियों, 2 स्लिंग बॉल, एक टाइल्स, एक डिस्क, देवी-देवताओं की दो मूर्तियां, 18 मानव की मूर्तियां, तीन जानवरों की मूर्ति को साक्ष्य के तौर पर जुटाया है। 113 धातु की सामग्रियां भी मिलीं हैं। इनमें लोहे की 16, तांबा की 84, एल्युमिनियम की 9, निकेल की तीन और एलॉय की एक सामग्री मिली है।
ज्ञानवापी परिसर में मिले पत्थर से निर्मित विग्रह
विग्रह संख्या
शिवलिंग 15
विष्णु 3
मकर 1
कृष्ण 2
गणेश 3
हनुमान 5
द्वारपाल 1
नंदी 2
अपस्मार पुरुष 1
मन्नत तीर्थ 1
विग्रह के टुकड़े 14
मिश्रित मूर्ति 7
विग्रह और धार्मिक चिह्नों की उम्र दो हजार वर्ष पुरानी:-
एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ज्ञानवापी की दीवार सहित कई स्थानों पर मिले विग्रह और धार्मिक चिह्नों की विधिवत जांच की गई। जीपीआर सहित अन्य तकनीक से हुई जांच में कुछ चिह्नों की उम्र दो हजार वर्ष पुरानी मिली है। एएसआई ने प्रत्येक चिह्न को पूरे विवरण के साथ ही प्रस्तुत किया है।
मुस्लिम पक्ष किरायेदारों की मूर्तियां बता रहा :-
ज्ञानवापी परिसर की एएसआई रिपोर्ट पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता एखलाक अहमद ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में जो फिगर्स हैं, वे मलबे में मिले हैं तो कोई बड़ी बात नहीं है। हमारी एक बिल्डिंग में पांच किरायेदार थे। वे सभी मूर्तियां बनाते थे। जो मलबा होता था, उसे पीछे की तरफ फेंक देते थे। सारी मूर्तियां खंडित मिली हैं, कोई ऐसी मूर्ति नहीं मिली, जिसे कहा जाए कि यह भगवान शिव की मूर्ति है। उन्होंने कहा कि मूर्तियां मस्जिद के अंदर नहीं मिली हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ेंगे। इसमें देखेंगे क्या गलत रिपोर्ट दी गई है। उस पर हम आपत्ति दाखिल करेंगे।
औरंगजेब ने ध्वस्त कराया था मंदिर:-
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669 में ज्ञानवापी मंदिर को ध्वस्त कराया था। मंदिर के ऊपरी हिस्से को मस्जिद का रूप दिया था। इसके लिए तीन गुंबद बनाए थे। मुख्य गुंबद के नीचे एक और शिवलिंग है। वहां धप-धप की आवाज आती है।
अरबी व फारसी के लिखे शिलालेख मिले :-
विष्णु शंकर जैन ने बताया कि तहखाने के अंदर अरबी और फारसी में लिखे शिलालेख भी टूटे मिले हैं। जिन्हें साक्ष्य के तौर पर जुटाया गया है। रिपोर्ट में बार-बार लिखा है कि पूर्व में स्थित ढांचा प्राचीन मंदिर का है। जिसके ऊपर वर्तमान ढांचे (मस्जिद) का निर्माण कराया गया है।
चार भाषाओं में अभिलेखों की व्याख्या :-
मौजूदा संरचना के निर्माण से पहले एक हिंदू मंदिर मौजूद था। यहां मसजिद की दीवारों पर कन्नड़, तेलुगू, देवनागरी सहित चार भाषाओं की लिखावट में कन्नड़, देवनागरी और तेलुगु भाषा में कई शिलालेख मिले हैं।
तेलुगु में तीन अभिलेख भी महत्वपूर्ण :-
एएसआई निदेशक (पुरालेख) के मुनिरत्नम रेड्डी के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने तेलुगु में तीन सहित 34 शिलालेखों की व्याख्या की और काशी विश्वनाथ मंदिर के अस्तित्व पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुनिरत्नम ने बताया कि 17वीं शताब्दी के शिलालेखों में से एक में नारायण भटलू के पुत्र मल्लाना भटलू जैसे व्यक्तियों के नाम स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं। यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि नारायण भटलू एक तेलुगु ब्राह्मण हैं जिन्होंने 1585 में काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण की देखरेख की थी। ऐसा कहा जाता है कि जौनपुर के हुसैन शर्की सुल्तान (1458-1505) ने 15वीं शताब्दी में काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। दूसरे तेलुगु शिलालेख को मस्जिद के अंदर पाया गया। इस शिलालेख पर ‘गोवी’ लिखा है। गोवी चरवाहे हैं। तीसरा शिलालेख, जो 15वीं शताब्दी का है, ए. एस. आई. विशेषज्ञों को मस्जिद के उत्तरी हिस्से में मुख्य प्रवेश द्वार पर मिला था। इसमें 14 लाइनें हैं, जो पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। एक विशेषज्ञ ने बताया कि सभी 14 लाइनें क्षतिग्रस्त हैं। ऐसा लगता है कि वे शाश्वत दीयों को दफनाने के लिए कुछ उपहार दर्ज करते हैं। अन्य विवरण खो गए हैं। तेलुगु के अलावा, शिलालेख कन्नड़, देवनागरी और तमिल भाषाओं में मिले हैं।
हिंदू धर्म से जुड़े तमाम चिह्न भीं मिले :-
जीपीआर में नीचे एक स्टोन प्लेटफार्म की फ्लोरिंग दिखी है। जो पश्चिमी चैम्बर व दीवार से जुड़ी है। पश्चिमी दीवार के पत्थर मंदिर में इस्तेमाल होने वाले पत्थर है। दीवार पर उभरी आकृति व डिजाइन हिंदू धर्म से जुड़े तमाम चिह्न से सम्बंध रखती हैं। सर्वे रिपोर्ट में लिखा गया है कि 21 जुलाई 2023 को दिए गए आदेश के बाद जो सर्वे की कार्रवाई अंदर की गई थी और जो भी चीजें कार्रवाई के दौरान मिली हैं। वे पूर्ण रूप से हिन्दू मंदिर से मिलती जुलती हैं। सर्वे में क्वाइन, बर्तन, टेराकोटा उत्पाद मेटल और स्टोन भी मिले हैं।
सन 1669 ई में मंदिर को तोड़कर मसजिद बनवाया गया है। वर्तमान ढांचे की पश्चिमी दीवार प्राचीन मंदिर की है। वादी अधिवक्ताओं का कहना है कि वुजूखाना में बचे हिस्से का सर्वे कराने की मांग कोर्ट से की जाएगी। 24 जनवरी 2024 को जिला जज की अदालत ने प्रकरण के सभी पक्षों को एएसआई रिपोर्ट की कॉपी सौंपने का आदेश जारी किया था। गुरुवार को रिपोर्ट की प्रति मिलने के बाद अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने प्रेसवार्ता आयोजित कर इसके संबंध में विस्तृत जानकारी दी है।
मंदिर तोड़ कर बनाई गई थी मस्जिद:-
ज्ञानवापी मामले में अदालत ने एएसआई के निदेशक को चार अगस्त तक सर्वे के संबंध में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट गया। जिसके बाद दोबारा चार अगस्त 2023 से सर्वे शुरू हुआ, जो दो नवंबर तक पूरा हो सका। 18 दिसंबर 2023 को सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई थी। इसके बाद से ही हिंदू पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहा था। हिंदू पक्ष का कहना था कि सर्वे में हिंदू पक्ष की दलीलों को माना गया है।
हिंदू पक्ष की मांग, पूजा का मिले अधिकार:-
हिन्‍दू पक्ष के वकील विष्‍णु शंकर जैन ने बताया कि 839 पेज की रिपोर्ट में वजूखाने को छोड़कर हर कोने का एक-एक ब्‍योरा एएसआई ने लिखा है। रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। इसलिए अब हिन्दुओं को वहां पूजा-पाठ की खुली अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर के वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी आकृति का भी एएसआई सर्वे होने पर साफ हो जाएगा कि आकृति शिवलिंग ही है और इसके साथ ही कई अन्‍य ऐसे साक्ष्‍य मिलेंगे जो हिन्‍दू पक्ष के दावे को और मजबूत करेंगे।
दूसरी तरफ से मुस्लिम पक्ष ने कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का एलान किया है।
ज्ञानवापी पर केके मोहम्मद के विचार :-
एक इंटरव्यू में जब केके मोहम्मद से पूछा जाता है कि ज्ञानवापी के वजूखाने के अंदर शिवलिंग है या फव्वारा? तो वह कहते हैं कि बात सिर्फ वजूखाना की नहीं है, बल्कि ज्ञानवापी मस्जिद का पूरा स्ट्रक्चर सवालों के घेरे में है। वह स्ट्रक्चर कभी मंदिर का हिस्सा था। बाद में औरंगजेब ने उसको ध्वस्त कर मस्जिद में तब्दील करवाया।
‘दीवारें कहती हैं कि वहां मंदिर था:-
केके मोहम्मद कहते हैं कि जब ज्ञानवापी या मथुरा के शाही ईदगाह का जिक्र आता है तो एक पक्ष कहता है कि चूंकि पहले हिंदू मंदिरों में खजाने रखे रहते थे, इसलिये इनपर हमला हुआ। अगर ऐसा है तो फिर मंदिर ध्वस्त क्यों किए गए। वह कहते हैं कि अगर ज्ञानवापी मस्जिद की दीवारों, ढांचा को देखें तो साफ पता लगेगा कि वह हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है. इसमें बहस की बात ही नहीं है।
हिन्दुओं को सौंपना ही ज्ञानवापी का समाधान :-
केके मोहम्मद कहते हैं कि चाहे ज्ञानवापी मस्जिद हो या मथुरा शाही ईदगाह, इन्हें हिंदुओं को सौंपना ही एकमात्र विकल्प है। सभी मुस्लिम धर्म गुरुओं को एकजुट होकर इन मस्जिदों को हिंदू पक्ष को सौंप देना चाहिए, क्योंकि ये स्थान हिंदू पक्ष के लिए बहुत खास हैं। जहां ज्ञानवापी भगवान शंकर से जुड़ा है तो मथुरा भगवान कृष्ण से। यहां की मस्जिदों के साथ मुसलमानों की कोई भावना नहीं जुड़ी है।
हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली:-
ज्ञानवापी में मंदिर होने की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी एएसआई की रिपोर्ट के बाद हिन्दू पक्ष ने नई याचिका दाखिल कर दी है। हिन्दू पक्ष ने कथित शिवलिंग की पूजा को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वज़ूखाने में शिवलिंग जैसी संरचना मिलने के बाद से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वो जगह सील है।अब हिंदू पक्ष का कहना है कि कोर्ट एएसआई के डीजी को निर्देश दे कि शिवलिंग के आसपास की दीवार को हटाया जाए और शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए बिना इस वैज्ञानिक सर्वे को अंजाम दिया जाए। दिल्ली में ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग जैसी सरंचना के वैज्ञानिक सर्वे की मांग को लेकर हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा मंडल ,आगरा में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुआ है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए समसामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करता रहता है।)

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