पशुपतिनाथ मंदिर में जयशंकर  : नेपाल से पशुपतिनाथ जी ने भेजी हैं, अयोध्या में शालिग्राम की बड़ी बड़ी चट्टानें जिससे बनी है रामजी की मूर्तियां 

images (11)

  

प्रवीण गुगनानी, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार में सलाहकार
                            
                गाजियाबाद।( ब्यूरो डेस्क )  हमारे विदेशमंत्री एस जयशंकर जी  वर्ष दो हज़ार चौबीस की अपनी पहली यात्रा में नेपाल गये। समय बड़ा ही प्रासंगिक है, जिसे कि परफ़ेक्ट टाइमिंग कहा जाता है। इधर अयोध्या में नेपाल से आई शालिग्राम शिलाओं से शिल्पित मूर्तियों का पूजन प्रारंभ होना है और उधर एस. जयशंकर काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में ॐ नमः शिवाय कर आये। एक ऐसा देश जो आज भी अपनी मानसिकता से एक हिंदू राष्ट्र है, एक ऐसा देश जहां गौवंश हत्या प्रतिबंधित है, एक ऐसा देश जहां धर्मांतरण प्रतिबंधित है और एक ऐसा देश जिसकी सीमाएं हमारे पांच राज्यों से मिलती हों; उससे हमारे केवल कूटनीतिक ही नहीं अपितु सभी प्रकार के संबंध सुदृढ़ होना ही चाहिये। अट्ठारह सौ पचास किमी की सांझी सीमा वाले भारत और नेपाल वस्तुतः एक ही संस्कृति, भाषा, धर्म, इतिहास, पूर्वज वाले देश हैं।

            कुछ समय पूर्व तक चीन के संक्रमण में चल रहे नेपाल की यह भारतीय विदेश मंत्री जी की आधिकारिक यात्रा अनेक दृष्टियों से एक इतिहास लिखने जा रही है। सबसे बड़ी बात यही है कि, नेपाल अब पुनः भारतोन्मुखी हो रहा है। एस जयशंकर जी ने नेपाल में एक पुस्तकालय, पच्चीस विद्यालय, बत्तीस स्वास्थ्य परियोजनाओं व एक सांस्कृतिक विरासत क्षेत्र परियोजना का शुभारंभ किया है।
     चीनी ड्रैगन को झटका देते हुए भारत ने नेपाल के साथ एक बड़े ऊर्जा समझौते को आगे बढ़ा लिया है। भारत नेपाल के मध्य दस हज़ार मेगावाट की बिजली क्रय करने के इस समझौते पर बीजिंग लगातार गिद्ध दृष्टि गड़ाये हुए था व इस अनुबंध का मुखर विरोध कर रहा था और नेपाल को भयभीत भी कर रहा था। भारत के सहयोग से कई  हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट विकसित करने वाले नेपाल के साथ अब भारत आगे भी नेपाल के साथ ऊर्जा परियोजनाओं को प्रारंभ करने का मार्ग खोल चुका है। रोटी और बेटी के संबंध वाले भारत नेपाल के हाइड्रोपाइवर सेक्टर पर चीन की तिरछी नज़र कई वर्षों से लगी हुई थी। इसी हाइड्रोपॉवर पर नज़र गड़ाये चीन ने बड़ी सक्रियता से बिल्ड एंड रोड नाम की चीनी पहल के माध्यम से  नेपाल में सड़कें बनाई हैं। भारतीय विदेश नीति ने हाल ही में किए गये अपने प्रयासों से नेपाल के हाइड्रोपॉवर का दोहन करने का अपना तंत्र बड़ी ही प्रभावशाली रीति नीति से विकसित करके चीन को मात दे दी है। अब नेपाल की छः हज़ार नदियों के तंत्र से बनी बयालीस हज़ार किलोवॉट बिजली उत्पादन क्षमता का भारत द्वारा व्यवस्थित उपयोग किया जा सकेगा। फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, चीन और भारत के रूप में एशिया की दो बड़ी ताकतों के बीच नेपाल खुद को असहज पाता है; किंतु यह सत्य नहीं है। नेपाल चीन के साथ असहज है क्योंकि उसके साथ नेपाल अर्थशक्ति व सैन्यशक्ति के दबाव में रहता है व उनके संबंध कृत्रिम हैं जबकि भारत नेपाल की ओर सहज सहोदर की दृष्टि से देखता है और इसी अनुरूप आचरण भी करता है। अब के दौर में अवश्य चीन  व भारत के मध्य नेपाल पर प्रभाव को लेकर प्रतिद्वंदिता का वातावरण बना हुआ है। 6000 नदियों के साथ नेपाल के पास 42,000 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है।

            नेपाल व भारत का संबंध तो वैदिक काल से रहा है। वेदों में व अन्य प्राचीनतम शास्त्रों में भारत के ही एक अंग के रूप नेपाल का उल्लेख होता रहा है। नेपाल व भारत की सांझी ऐतिहासिक विरासत इस प्रकार की है कि नेपाल स्वयं को भारत से दूर कर ही नहीं सकता है। मध्य मध्य में नेपाल के कुछ राष्ट्राध्यक्षों के कार्यकाल में, चीन के कूटनीतिक प्रभाव ने अपना रंग अवश्य दिखाया था। नेपाल भारत की जनता मानसिकता के स्तर पर इस प्रकार जुड़ी हुई है कि नेपाली शासन द्वारा चीन की ओर बढ़ाये गये कदमों को उन्हें वापिस लेना ही पड़ता है। 
           भारत की ओर से नेपाल संग संबंधों को आर्थिक, कूटनीतिक, सामरिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक आधार देने हेतु समय समय पर बड़प्पन भरे कदम उठाये जाते रहे हैं। पिछले ही वर्ष भारत ने इस दिशा में एक ओर बड़ा कदम उठाया था जब हमने अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के विग्रहों के निर्माण हेतु शालिग्राम की बड़ी बड़ी शिलाएं नेपाल के पोखरा की गंडकी नदी से निकलवाकर बुलवाई थी। अयोध्या जो कि शीघ्र ही भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में समूचे विश्व में प्रसिद्ध होने वाला है, वहां के मंदिरों में, मूर्ति निर्माण हेतु,  नेपाल के पत्थर का उपयोग निश्चित ही भारत-नेपाल के संबंधों को एक सांस्कृतिक आधार प्रदान करेगा। यह एक प्रकार का भावनात्मक संबंध होगा जिसे क्षीण या दुर्बल करना दोनों देशों के शासनाध्यक्षों के बस में भी नहीं होगा। जब इन शिलाओं को भारत लाया जा रहा था तो भारत व नेपाल के दीर्घ सड़क मार्ग पर इन शिलाओं का करोड़ों भारतीयों व नेपालियों ने भावभीना पूजन किया था। इन शिलाओं को भारत लाते समय नेपाल व भारत के कई राजनेता, गणमान्य नागरिक व सामान्य जनता ने इन ट्रकों के साथ कई कई किमी पदयात्रा की थी। यह भारत नेपाल के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का एक नवीन स्वरूप था जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पनाशक्ति का परिणाम है। अब नेपाल व भारत की कई कई आगामी पीढ़ियां इस बात पर  गर्व करेंगी कि भारत की  सांस्कृतिक राजधानी अयोध्या में जन्मभूमि मंदिर में विराजित प्रतिमाओं का शिलाएं भगवान पशुपतिनाथ जी की ओर से भेजी गई थी। 
              इस आधारभूमि पर विकसित हुई अपनी नेपाल यात्रा में एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री प्रचंड, राष्ट्रपति पौडेल सहित कई राजनेताओं से स्नेहवार्ता की है। 
         इस यात्रा में भारत ने नेपाल के प्रति जहां अत्यंत स्नेहपूर्ण व्यवहार प्रस्तुत किया है वहीं भारत ने नेपाल में चीन द्वारा निर्मित पोखरा व भैरवा हवाईअड्डों को मार्ग देने के प्रस्ताव को पुनः सुदृढ़ता से नकार दिया है। नेपाल की पूर्व ओली सरकार ने भारत के विरोध के पश्चात भी इन हवाईअड्डों का निर्माण ठेका चीन को दे दिया था। भारत ने अपने विदेशमंत्री की इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य; कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग में वृद्धि; को प्राप्त कर लिया है। अब भारत आगामी दस वर्षों में नेपाल से दस हज़ार मेगावाट बिजली लेगा। इस हेतु ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन कर दिया गया है। हमारे विदेशमंत्री एस जयशंकर ने नेपाल में पुनर्निर्माण परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने पड़ोसियों विशेष रूप से नेपाल के साथ अपने संबंधों को फिर से परिभाषित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वे यह भी बोले कि, विगत वर्ष आए भूकंप से प्रभावित नेपाल में बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भारत 75 मिलियन डॉलर (करीब 1000 करोड़ नेपाली रुपये) का वित्तीय पैकेज देगा। 

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
casinofast
safirbet giriş
safirbet giriş
betebet giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
damabet
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
damabet
betvole giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betnano giriş
casinofast