अंध विश्वासों में डूबी भारतीय नारी और समाज

images (8)

ज्योति आनंद – विनायक फीचर्स
यद्यपि आज लोग चांद सितारों तक पहुंच गए हैं और नये-नये ग्रहों की खोज भी कर रहे हैं लेकिन भारतीय नारी अभी भी अंधविश्वासों में डूबी हुई है। इसका मूल कारण है तर्क शक्ति की कमी। प्राय: स्त्रियों में तर्क क्षमता की कमी पाई जाती है। भारतीय समाज में स्त्रियों की सामाजिक परिस्थितियां ज्यादा अच्छी नहीं रही। असुरक्षा की भावना के कारण तर्क शक्ति क्षीण होती है। स्त्रियां प्राय: सुनी-सुनाई बातों पर ज्यादा विश्वास करती हैं। हमारा भारतीय समाज ऐसे विश्वासों के साथ बंधा हुआ है जो प्राय: अंदर से खोखले हो चुके हैं। शिक्षित और पढ़ी-लिखी स्त्रियां भी जादू-टोनों के चक्कर में पड़ कर ऐसे कार्य करती हैं जो उनको शोभा नहीं देते। अंध विश्वास-ऐसी मान्यताएं या धारणाएं हैं जो मानव की विवेकशक्ति को नष्ट कर देती है तथा उसे जादू टोने आदि में आस्था रखने व भाग्यवादी बनने पर मजबूर कर देतीं हैं, जिसका ढ़ोंगीलोगों को बहुत लाभ मिलता है। यहां तक कि महिलाओं में व्रत रखना भी एक खोखला विश्वास है। व्रत रखना तब सार्थक है जब सारा दिन कुछ खाया न जाए। ढोंगी पंडित धार्मिक स्त्रियों का जहां शोषण करते हैं। वहीं व्रत की कथा पंडितों की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों में भयंकर अंधविश्वास का प्रचलन है। संतान न होने पर बलि देना भी प्रचलित है। कुछ लोग तो पड़ोसियों या रिश्तेदारों के बच्चों तक की बलि दे देते हैं।
छोटे-छोटे अंधविश्वास जैसे वृहस्पतिवार को कपड़े न धोना, इसी तरह मंगलवार को बाल नहीं कटवाना, यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो अशुभ माना जाता है। बच्चे को नजर लग जाने पर मिर्च और फिटकरी आग में डालना। कई तिथियों को अशुभ माना जाता है जैसे 3,13 और 23। चौराहे पर जल डालने, पीछे से आवाज देने इत्यादि विश्वासों पर कई व्यक्तियों की दृढ़ आस्था है। इनमें से कई विश्वासों को मानव दिमाग की उपज तो नहीं माना जा सकता लेकिन मन की उपज अवश्य कहा जा सकता है। यह कटु सत्य है कि ऐसे अंध विश्वासों का सृजन ढ़ोंगी पंडि़तों और धर्म के पांखडी लोगों ने किया है। यह लोग स्त्रियों को झूठा भय दिखाकर भ्रमित करते रहते हैं फिर उसे दूर करने का उपाय बताते हैं अंतत: वह उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। याद रहे कि जादू टोना कोई चिकित्सा या उपाय नहीं है बल्कि ढ़कोसला है। लाल मिर्च को काले धागे में बांधकर, लाल धागे में 5 गांठें लगाकर, उबले चावल अथवा लड्डू रखकर टोना करके अपना हित साधा नहीं जा सकता। अंधविश्वासी लोग मानते हैं कि ऐसा करने से दूसरों का अहित होगा।
कुछ लोगों का मानना है कि फलानी पूजा से फलाना फल मिलता है। इन मूर्ख लोगों को कौन समझाये कि फल तो केवल परिश्रम, मेहनत लगन से ही मिलता है। कुछ लोगों ने देवी देवताओं के नाम पर गोरख धंधा शुरू कर दिया है। भोली-भाली स्त्रियां क्षमतानुसार दान देती हैं क्या उनसे पूछा जाए कि दान-दक्षिणा ईश्वर तक पहुंच जाती है। ढ़ोंगी प्राय: ऐसी बातें करते हैं कि ऐसा न किया तो देवता रूष्ट हो जाएगा, जिसका परिणाम बहुत बुरा होगा, मंगलमय जीवन अशांत हो जाएगा, शाप लगेगा, सर्वनाश हो जाएगा। दान-दक्षिणा मांगने वाले लोग ‘माता’ और कई देवताओं के नाम पर भी चंदा एकत्रित करते हैं।
विवाह का मुहूर्त निकलवाना भी एक अंधविश्वास है। स्त्रियां इस बात पर विशेष जोर देती है कि विवाह का शुभ दिन पंडित से पूछ कर निश्चित किया जाए। पंडितों द्वारा पैसा ऐंठने का यह सरल ढंग़ हैं सत्य यह है कि भविष्य का किसी को कोई पता नहीं है। हिन्दुओं में तारा डूबने पर विवाह-शादी इत्यादि शुभ कार्य नहीं किए जाते। केवल ब्राह्मïण लोगों द्वारा बनाई गई रूढिय़ां है जिनके पीछे सच्ची-झूठी कहानियां बनाई गई है। सिख लोग इस बात को नहीं मानते। अत: वह तारे छिपे होने के बावजूद भी विवाह-शादियां करते है। क्या यह उनके लिए अशुभ नहीं है।
पितरों की मुक्ति के लिए पितृपक्ष में गया तीर्थ पर जाते हैं जहां गऊदान के अतिरिक्त वस्त्र एवं पिंड़ दान दिए जाते है। मुंडन के पश्चात् पितरों की मुक्ति के लिए लम्बी-चौड़ी प्रक्रिया चलती है। पितरों की मुक्ति के लिए प्रार्थनाएं की जाती है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों की भटकती आत्माएं शांत हो जाती है। हिन्दुओं का ऐसा विश्वास है कि गया में भटकती आत्माएं निवास करती हैं। इन पंडितों से पूछा जाए कि भारत की सभी आत्माएं गया में ही क्यों शांत होती हैं? चांद-सितारों पर पहुंचने वाले वैज्ञानिक अभी तक आत्मा की खोज नहीं कर पाए हैं।
मृत आत्माओं के लिए हिन्दू श्राद्घ भी करते हैं इसमें पंडितों को खीर-पूड़ी खिलाई जाती है। पंडितों को कपड़े यथाशक्ति अनुसार दान में दिए जाते हैं। मैंने देखा है जो जीवित माता-पिता को धक्के मारते हैं, मृत्यु के पश्चात ढकोसले रचते हैं। पंडितों के पेट पहले ही भरे हुए होते हैं उनको खाना-खिलाने से भला क्या लाभ। यदि आपको कोई भला कार्य अपने पितरों के लिए करना ही है तो वृद्घ, भिखारी, विकलांग व्यक्ति को भोजन परोसे। जिससे उसकी भूख से तड़पती आंते शांत हो सकें और आप और आपके पितरों को नेक दुआएं दे सकें।
हिन्दू पवित्र नदी गंगा में मृतकों की अस्थियां प्रवाहित करते हैं उसके पीछे भी अंधविश्वास है। यदि मृतकों की राख स्थानीय नदी में प्रवाह की जा सकती है तो अस्थियां क्यों नहीं। वहां बैठे पण्ड़े भी भावनाओं में बहते लोगों को खूब लूटते हैं। एक तो घर का आदमी चला जाता है, दूसरा आर्थिक बोझ भी पड़ जाता है।
जगह-जगह बैठे बाबाओं ने भी अपना धंधा जोरों पर शुरू कर दिया है। इन बाबाओं के पास बहुत से दु:खी लोग आते हैं पर स्त्रियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। यह लोग जनता को बहुत बेवकूफ बनाते हैं। इन संतों के पास ताबीज, काला धागा इत्यादि चीजें होती हैं जो कोरे अंधविश्वास के अलावा कुछ भी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को जिन्दगी में कुछ न कुछ परेशानियां तो अवश्य होती हैं या फिर बड़ी-बड़ी इच्छाएं। पत्थर जड़ी अंगूठी पहनने से व्यापार में तेजी नहीं आ सकती, काला धागा पहनने से रोगी रोग-मुक्त नहीं हो सकता, ताबीज बांधने से लड़का पैदा नहीं हो सकता।
गुरू नानक देव जी ने ऐसे निराधार मतों का खण्डन किया था। हरिद्वार में नानक जी ने देखा कि लोग सूर्य को पानी चढ़ा रहे हैं। उन्होंने भी उत्तर-पश्चिम की तरफ मुंह करके गंगाजल हाथ में लेकर चढ़ाना आरम्भ कर दिया। पंडे हंसने लगे और ऐसा करने का कारण पूछा तो नानक जी ने उत्तर दिया यदि हजारों मील दूर सूर्य देवता को पानी पहुंच सकता है तो मेरे खेत जो यहां से कम दूरी पर है वहां भी यह पानी पहुंच जायेगा। ऐसी बातें अंधविश्वास को निर्मूल सिद्घ करती हैं। सिख समुदाय में भी कई बातें अंधविश्वास पर आधारित है। गुरूद्वारे में आये लोगों द्वारा उतारे गए जूतों को साफ करना, उनकी धूल अपने माथे पर लगाना, स्त्रियां इसे महान सेवा का नाम देती है। इस कार्य से भला क्या सेवा? लोग जूते पहनकर बाहर निकलते हैं धूल पुन: लग जाती है। सिख लोग कहते हैं कि यह साध-संगत की धूल है माथे पर लगाने से कल्याण होता है। यदि व्यक्ति समाज में सही कार्य न करे तो ऐसी धूल क्या करेगी। इन जूतों में कई जोड़ी जूते, चोरों, तस्करों, आतंकवादियों के भी होंगे। सिख समुदाय में सबसे बड़ा अंधविश्वास है सरोवर का जल ग्रहण करना। सरोवर में जहां श्रद्घालु स्नान करते हैं वहीं से लोग जल ग्रहण करने को शुभ मानते हैं परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से यह उचित नहीं है। असंख्य श्रद्घालुओं के स्नान करने से पानी दूषित हो जाता है जिसे पीना स्वास्थ्य के हित में नहीं। इससे पानी से पैदा होने वाली बीमारियां लग जाती हैं।
पढ़ी-लिखी स्त्रियों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बच्चों के सामने अंधविश्वास वाली बातें कभी भी न करें क्योंकि व्यक्तित्व निर्माण की मूल वस्तु परिवार ही है। यदि उनका बच्चा बाहर से अंधविश्वास भरी बातें सुनकर आता है तो माता-पिता को चाहिए तर्क देकर उसे समझायें और अंध विश्वास भरी बातों को उसके दिमाग में घर न होने दें।
समय की मांग है कि प्रत्येक ढ़ोंग व पाखंड़ का डटकर मुकाबला किया जाए। धार्मिक कट्ïटरता को त्याग कर वैज्ञानिक सोच रखनी चाहिए। पंजाब के शहरों-कस्बों में पिछले दिनों समाचार प्रकाशित हुए थे कि घरों में कपड़े अपने आप जल जाते थे, कई घरों में रात को ईटों की बरसात होती थी लेकिन जब पुलिस ने मामलों की जांच की तो दोषियों को पकड़ लिया गया।
साधु संतों की भभूत से दु:ख, कष्ट एवं बीमारियां दूर नहीं होती है परिश्रम और योग्य डाक्टरों से इलाज कराना ही केवल एक मात्र साधन है।
हमें प्रत्येक उस बात का विरोध करना चाहिए जो मानव की चेतना को ठेस पहुंचाती हो। (विनायक फीचर्स)

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
aresbet giriş
aresbet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
Grandpashabet Giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
vipslot giriş
vipslot giriş
orisbet giriş
orisbet giriş
bahiscasino giriş
bahiscasino giriş
perabet giriş
perabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş