महाभारत की शिक्षाप्रद कहानियां अध्याय – १४ ख मंकि मुनि की कहानी

20231126_114438
मुनि कहते जा रहे थे कि "सुख के चाहने वाले मनुष्य को धन कमाने की ओर वैराग्य के भाव से ही आगे बढ़ना चाहिए। धन कमाने की चेष्टा में डूबना नहीं चाहिए। संसार में रहकर असंग भाव पैदा करना चाहिए और उसी का अभ्यास करना चाहिए। जितना जितना संगभाव अपनाया जाएगा , उतना - उतना ही दु:ख मिलता जाएगा। धन कमाने की चेष्टा से निराश होकर जो विरक्त  हो जाता है, वह सुख की नींद सोता है। धन कमाने के प्रति कभी पागल नहीं होना चाहिए। हां , धर्म कमाने में अवश्य ही व्यक्ति को जुनून पैदा करना चाहिए। जो मनुष्य अपनी इच्छाओं को पूर्ण कर लेता है और जो इनका त्याग कर देता है इन दोनों में कामनाओं का त्याग करने वाला ही श्रेष्ठ है। संसार के जितने भी झगड़े हैं उन सबके पीछे धन कमाने की होड़ काम कर रही है।

कामनाओं के पीछे भागना मूर्खता है। यदि व्यक्ति स्वयं ही मृग मरीचिका का शिकार होना चाहता है तो समझो कि वह अपनी मौत अपने आप बुला रहा है। कामनाओं को त्याग देना ही समझदारी है। जो कामनाओं के पीछे दौड़ता है , उसे कामनाएं दौड़ा-दौड़ा कर मारती हैं और जो व्यक्ति कामनाओं की ओर से पीठ फेर कर बैठ जाता है ,उसे आनंद की प्राप्ति होती है।
अपने बछड़ों की हालत को देखकर मुनि समझ गए थे कि अब से पहले भी जो व्यक्ति कामनाओं के पीछे दौड़े हैं उनकी यही हालत हुई है जो आज उनके बछड़ों की हो रही है। कोई भी व्यक्ति संसार में कामनाओं का पार नहीं पा सका। आज पहली बार मुझे लग रहा है कि “मेरी आंखें खुल गई हैं। मैं समझ पा रहा हूं कि मैं अब तक का जीवन व्यर्थ ही खो दिया है। नाशवान चीजों की प्राप्ति में मैंने अपने अनश्वर आत्मा को भटकाया, यह मेरी अज्ञानता और मूर्खता थी। इसलिए मैं कामनाओं को त्यागने के प्रति सचेत हो गया हूं। मैं काम के मूल को अर्थात जड़ को जानता हूं। निश्चय ही काम संकल्प से पैदा होता है।”
ऐसा कहकर मुनि ने विचार लिया कि ” हे काम !अब मैं तेरा संकल्प ही नहीं करूंगा, संकल्प के अभाव में तेरा पूर्णतया नाश हो जाएगा । मैं समझ गया हूं कि धन की इच्छा सुख प्रदान नहीं करती । जब धन की प्राप्ति हो जाती है तो उसकी रक्षा के लिए उतने ही अनुपात में चिंता बढ़ जाती है। धन कमाने के पश्चात व्यक्ति फिर उसकी रक्षा के उपाय खोजने में लग जाता है, जिससे उसकी ऊर्जा का नाश होता है। संसार में रहकर एक चीज प्राप्त करो तो दूसरी की अपेक्षा अपने आप खड़ी हो जाती है । फिर उसकी प्राप्ति करने के यत्न में लगा मनुष्य तीसरी चीज या कामना की प्राप्ति की ओर बढ़ जाता है। इस प्रकार अंतहीन सिलसिले का शिकार होकर मृत्यु का ग्रास बन जाता है।
यदि धन प्राप्त होकर वह नष्ट हो जाए तो मनुष्य को मृत्यु के समान कष्ट होता है। क्योंकि धन में उसका ममता का भाव जुड़ जाता है।
यह भी पता नहीं है कि धन की चेष्टा करने पर धन प्राप्त हो ही जाएगा। जैसे मैंने धन कमाने के अनेक प्रयास किए पर सब व्यर्थ गए, वैसे ही संसार में अनेक लोगों के साथ होता है। धन न मिलने के दु:ख में वे जीवन को ही दु:खों का ढेर मान लेते हैं। यदि धन मिल भी जाए तो धन नष्ट होने पर जो दु:ख होता है वह सबसे खतरनाक है। इधर संसार में ऐसा भी देखा जाता है कि धनहीन व्यक्ति को उसके अपने भाई बंधु भी अपमानित करने लगते हैं। वे लोग धनहीन व्यक्ति की कदम कदम पर उपेक्षा करते हैं उसे अपने साथ बैठाने में भी बुराई देखते हैं।
बहुत प्रयास करने के उपरांत भी यदि धन प्राप्त नहीं होता है तो मनुष्य को अपार कष्ट होता है। यदि धन मिल भी जाए तो उतने ही से वह संतुष्ट नहीं होता। इसके बाद और अधिक धन संग्रह की चेष्टा में जुट जाता है। इस प्रकार की चेष्टा करने में अनेक प्रकार के अपराध करता है। उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। मैं समझ गया हूं कि धन तृष्णा की वृद्धि करने वाला है।
इसके पश्चात मुनि कहने लगे कि मैं यह भी समझ गया हूं कि यह तृष्णा की वृद्धि मेरे नाश का कारण है। धन में चित्त लगाना दु:ख का सबसे बड़ा कारण है । कामना बालक के समान होती है। इसे संतुष्ट करना बड़ा कठिन है। जैसे अग्नि का पेट नहीं भरा जा सकता, वैसे ही कामनाओं का भी पेट नहीं भरा जा सकता। पाताल के समान तुझे भरना कठिन है। हे कामना ! तू मुझे दु:खों में फंसाना चाहती है, परंतु अब मैं तेरी ओर देखूंगा भी नहीं। जब व्यक्ति का अचानक धन नष्ट हो जाए तो वैराग्य को प्राप्त होकर परम सुख मिलता है, इसी प्रकार का सुख आज मुझे भी अनुभव हो रहा है । अतः मैं आज से भोगों का चिंतन ही नहीं करूंगा। कभी मैं बड़े-बड़े दु:ख उठाता था , क्योंकि धन की कामना में लगा रहता था और मैं इस बात को समझ नहीं पाता था कि धन की कामना में दु:ख के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। परंतु धन का नाश होने से इस प्रकार के भाव से मैं मुक्त हो गया हूं और आज असीम आनंद की अनुभूति कर रहा हूं। अब यह काम ना तो मेरे साथ रह पाएगा और ना ही मुझे दु:खी कर किसी प्रकार का आनंद मना सकेगा।
मुनि मंकि ने स्पष्ट रूप से यह घोषणा कर दी कि हे काम ! अब तू भली प्रकार यह बात समझ जा कि मैं तेरे मोहपाश में अब बंधने वाला नहीं हूं । क्योंकि मुझे वैराग्य, सुख, तृप्ति, शांति, सत्य, दम, समता और समस्त प्राणियों के प्रति दया भाव के सभी भाव प्राप्त हो गए हैं । सदगुण प्राप्त हो गए हैं। काम, क्रोध , लोभ , मोह, मद , मत्सर और ममता सभी देहधारियों के सात शत्रु हैं। इनमें सातवां कामरूपी शत्रु सबसे भयंकर है। जो व्यक्ति इस काम नाम के शत्रु से मुक्त हो जाता है अथवा इसका नाश करने में सफल हो जाता है, वह ब्रह्मपुर में स्थित होकर राजा के समान सुखी अनुभव करता है। मैं आज से इसी सुख की खोज में लग जाऊंगा और इसी को प्राप्त करके रहूंगा।”
अंत में भीष्म जी ने युधिष्ठिर से कहा कि “राजन ! इस प्रकार की बुद्धि का आश्रय देकर मंकि धन और भोगों से दूर हो गए उनके भीतर वैराग्य का भाव पैदा हो गया। उन्होंने सब प्रकार की कामनाओं को त्याग दिया और परमानंद स्वरूप परब्रह्म को प्राप्त कर लिया।”
कहानी का सार है कि धन में चित्त लगाने से लोभ बढ़ता है। लोभ के वशीभूत होकर संसार में जो भी काम किए जाते हैं वे सब पाप कराते हैं। जिससे मनुष्य संसार की दुर्गति को प्राप्त हो जाता है। सद्गति अर्थात मोक्ष पद को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को कामनाओं पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।

डॉ राकेश कुमार आर्य

( यह कहानी मेरी अभी हाल ही में प्रकाशित हुई पुस्तक “महाभारत की शिक्षाप्रद कहानियां” से ली गई है . मेरी यह पुस्तक ‘जाह्नवी प्रकाशन’ ए 71 विवेक विहार फेस टू दिल्ली 110095 से प्रकाशित हुई है. जिसका मूल्य ₹400 है।)

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
Hitbet giriş
millibahis
millibahis
betnano giriş
bahisfair giriş
betnano giriş
bahisfair giriş