छोटे राज्यों का गठन: एक आकलन

उत्तर प्रदेश  के पुनर्गठन में उत्तर प्रदेश की कु॰ मायावती सरकार के प्रस्ताव से छोटे राज्यों की ओर लोगों का ध्यान पुन: गया हैं । संविधान लागू होने के बाद से 1950 से लेकर अब तक आंध्रप्रदेश (1953 आंध्रप्रदेश एक्ट, मद्रास राज्य से अलग करके)  केरल (1956 त्रावणकोर और कोचीन को मिलकर ) कर्नाटक (1956, मैसूर  राज्य से अलग करके बनाया गया ) गुजरात और महाराष्ट्र (1960 में बॉम्बे राज्य का विभाजन करके बनाये गये) नागालैंड (1962 में असम से अलग करके बनाया गया ) हरियाणा (1966 में पंजाब से अलग करके बनाया गया) हिमाचल प्रदेश (1970 में केन्द्र शासित राज्य से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया ) मेघालय (1971, में नॉर्थ ईस्ट्रर्न एरियाज एक्ट से पूर्ण राज्य बनाया गया ) मणिपुर और त्रिपुरा (1971 में पूर्ण राज्य बनाये गये ) सिक्किम (1974 से पहले यह एक सहयोगी राज्य था बाद में 1975 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला ) मिजोरम (1986 स्टेट ऑफ मिजोरम एक्ट द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा मिला) अरुणाचल प्रदेश (1986 स्टेट ऑफ अरुणाचल प्रदेश एक्ट के तहत 1986 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया ) गोवा (1987) केन्द्र शासित प्रदेश गोवा दमन और दीव से अलग करके 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। छत्तीसगढ़ (2000 मध्य प्रदेश से अलग करके एक नवम्बर 2000 को अलग पहचान दी गयी ) उत्तराखण्ड (2000 नौ नवम्बर को उत्तर प्रदेश से अलग करके बनाया गया) झारखण्ड ( 2000,  15 नवम्बर से बिहार से अलग करके बनाया या। इन सारे प्रांतो की कुल संख्या 18 हैं । इसका अर्थ हुआ कि डेढ दर्जन नये राज्य स्वतंत्रता के पश्चात ही अस्तित्व मे आये हैं । नये राज्यों का यह नया स्वरूप समय-समय पर देश के विभिन्न आंचलों के निवासियों की राजनीतिक आवश्यकताओं और परिस्थितियों के दृष्टिगत अस्तित्व में आया । लोगो ने महसूस किया कि छोटे राज्यों में विकास अच्छा होता हैं । यदि उत्तराखण्ड सहित उत्तर प्रदेश की विकास की वार्षिक प्रवृत्ति पर नजर दौड़ाये तो 1993 से 2001 तक यह 3.9 प्रतिशत थी । जबकि उत्तराखण्ड ने 2008-09 में यह प्रगति 9.0 प्रतिशत प्राप्त की । यू॰पी॰ और उत्तराखण्ड मिलकर इसी अवधि में क्रमश: 3.8 प्रतिशत तथा 6.1 प्रतिशत की वार्षिक प्रगति कर रहे थे । यही स्थिति छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की थी । ये दोनों संयुक्त रूप से 1993 से 2001 के मध्य 4.1 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर को प्राप्त कर रहे थे , जबकि 2008-09 में यह दर 5.6 प्रतिशत तक थी । इस दौरान 2008-09 में छत्तीसगढ़ 7.9 प्रतिशत की दर को प्राप्त कर रहा    था । बिहार का झारखण्ड आँचल 1993 से 2001 के मध्य 4.6 प्रतिशत की दर को प्राप्त कर रहा था तो 2008-09 में 8.7 प्रतिशत की विकास की प्रव्रति को छू रहा था । इससे स्पष्ट हो जाता हैं कि छोटे राज्यों में विकास का सही परिणाम देखने को मिलता हैं । छोटे राज्यों पर यदि नजर दौड़ाई जाए तो वहाँ के मुख्यमंत्री की सीधी पकड़ अपने जिलास्तर तक के ही नहीं अपितु गाँव स्तर तक के प्रधानों तक सीधी रहती हैं । जिससे अपराध भी कम होता हैं । होते हैं तो उनकी जाँच या जानकारी शासन प्रशासन को आराम से हो जाती हैं । इसलिए छोटे राज्यों की स्थापना की ओर जनता का ध्यान जा रहा हैं । 20 करोड़ की आबादी का मुख्यमंत्री अपने लोगों से सीधे सम्बन्ध या संवाद स्थापित नहीं कर पाता । वह आम आदमी से जोड़कर रहता हैं और नौकरशाही उस स्थिति का लाभ उठाती हैं। इसलिए छोटे राज्यों की स्थापना को उचित ही माना जाना चाहिए  ।

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