सोनिया गांधी की हिंदू विरोधी चाल

विदेश प्रेरित हिंदुत्व विरोधी विकृत मानसिकता वाले अंतर्राष्टï्रीय तत्वों द्वारा तैयार किये गये सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011 को यदि भारत की वर्तमान लकवाग्रस्त सरकार ने संसद से पारित करवाकर राष्टï्रपति की मोहर लगवा ली तो यह एक ऐसा काला कानून होगा जो भारत के बहुसंख्यक राष्टï्रीय समाज हिंदू को अल्पसंख्यकों (मुसलमान, ईसाई) का गुलाम बना देगा। अर्थात जो काम मुस्लिम आक्रांता और अंग्रेज शासक पिछले 1200 वर्षों में नहीं कर सके वह इस कानून की आड में वर्तमान सरकार द्वारा संपन्न हो जाएगा।
हिंदू संस्कृति पर चोट :-
इस विधेयक को उन लोगों ने तैयार किया है जो विदेश (ईसाई एवं मुस्लिम देशों) के इशारे पर भारत की संस्कृति, धर्म और राष्टï्रवाद को समाप्त करने के षडयंत्र रच रहे हैं। किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत की राजनीति में सक्रिय संप्रग और कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी की रहनुमाई में गठित राष्टï्रीय सलाहकार परिषद के दिमाग की उपज इस विधेयक के अनुसार ंिहदू समाज आतंकवादी, कातिल और असभ्य है एवं अल्पसंख्यक (मुसलमान, ईसाई) शांत एवं अहिंसक हैं। अर्थात बहुसंख्यक होना कानूनन अपराध है।
इस काले कानून से हिंदू धर्म को जड़मूल से उखाड़ फेंकने का स्वप्न देख रही राष्टï्रीय सलाहकार परिषद के अधिकांश सदस्य अपने हिंदुत्व विरोधी कुकृत्यों के लिए प्रसिद्घ है। 22 सदस्यों वाली इस परिषद के संयोजक है फराइ नक वी और हर्ष मंदर। अन्य सदस्यों ने सैयद शाहबुद्दीन और तीस्ता जावेद जैसे लोग हैं जो भारत में एक और पाकिस्तान के निर्माण की भूमिका तैयार करने में जुटे हैं। सभी जानते हैं कि तीस्ता को गुजरात में हुए दंगों के संबंध में झूंठा शपथ पत्र पेश करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने जिम्मेदार माना है।
असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक उपक्रम :
दरअसल हिंदू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद, बहुसंख्यक कट्टïरवाद और संघी आतंकवाद जैसे जुमले गढकर हिंदुत्व को समाप्त करने में पूरी तरह विफल रही सोनिया मंडली ने अब हिंदुओं पर कानूनी प्रहार करके भारत की राष्टï्रीय पहचान व सांस्कृतिक राष्टï्रवाद को खोखला कर देने की मंशा बनाई है। इसी एकमेव इरादे का व्यावहारिक रूप है यह विधेयक। राष्टï्रीय सलाहकार परिषद और इसके द्वारा गढा गया यह विधेयक दोनों ही असंवैधानिक एवं अलोकतांत्रिक है।
भारत के संविधान के तहत इस परिषद का गठन नहीं हुआ। इस परिषद के सदस्यों को देश की जनता, विधायकों एवं सांसदों ने नहीं चुना। यह गैर कानूनी संस्था जनता सहित किसी के प्रति भी उत्तरदायी नहीं है। डा मनमोहन सिंह की सरकार को सलाह अथवा आदेश देने वाली इस असंवैधानिक संस्था का गठन वास्तव में बहुसंख्यक हिंदू समाज को भारत में दूसरे दर्जे का प्रभावहीन नागरिक बनाने का एक ऐसा जघन्य प्रयास है जो देश के दूसरे विभाजन की नींच रखेगा।
मौलिक अधिकारों का हनन:-
इस विधेयक के 9 अध्यायों में समेटी गयी 138 धारायें भारत के संविधान द्वारा यहां के नागरिकों को दिये गये सभी मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। इसकी सबसे खतरनाक धारा 8 है जिसके अंतर्गत भारत में रहने वाले सभी मजहबी एवं भाषाई अल्पसंख्यकों को, एक ऐसे समूह की परिभाषा में बांधा गया है जो कभी भी दंगा या कोई सांप्रदायिक झगडा नहीं करते। इस विधेयक की धाराओं 7-8 और 74 के अनुसार एक अल्पसंख्यक महिला के साथ हुए दुव्र्यव्हार को भी अपराध माना जाएगा। किसी अल्पसंख्यक न किसी बहुसंख्यक का मकान किराये पर मांगा तो वह देना ही पड़ेगा, अन्यथा प्राधिकरण द्वारा ऐसे बहुसंख्यक (हिंदू) को अपराधी माना जाएगा। इसी तरह हिंदुओं द्वारा गैर हिंदुओं के खिलाफ किये गये कथित अपराध तो दंडनीय हैं परंतु गैर हिंदुओं के द्वारा किये गये सांप्रदायिक अपराध दंडनीय नहीं हैं।
इस विधेयक के अंतर्गत अल्पसंख्यकों द्वारा किये जाने वाले अपराध का शाब्दिक विरोध भी वर्जित है। अर्थात आतंकी हादसों की निंदा, इमामों और पादरियों के भडक़ाऊ भाषणों का विरोध समान नागरिकता की चर्चा, गोहत्या का विरोध, राष्टï्रगीत वंदेमातम का गायन, बांगलादेशी घुसपैठियों की वापिसी, बलात मतांतरण पर रोक, मजहब पर आधारित धारा 370 को हटाने का मुद्दा और अफजल, कसाब जैसे आतंकियों को फांसी इत्यादि जैसे मुद्दों पर चर्चा करना भी कानूनन अपराध माना जाएगा।
समाज को तोडने का षडयंत्र :-
भारतीय संस्कृति, धर्म, राष्टï्रवाद एवं सनातन तत्वज्ञान के पूर्णतया विरूद्घ सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्टï्रीय सलाहकार परिषद ने इस विधेयक का प्रारूप तैयार करके भारतीय समाज को मजहब, जाति पंथ, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित करने का राष्टï्रघातक दुस्साहस किया है। यह प्रयास भारत के संविधान के मूलाधिकार अनुच्छेद 15 का आपराधिक उल्लंघन है। भारतीय संविधान में किसी भी अपराध को मजहब, पंथ, जाति के आधार पर परिभाषित नहीं किया गया। परंतु इस विधेयक ने मुसलमानों, ईसाईयों के हाथ में एक ऐसा चाबुक देने की कानूनी व्यवस्था की है जिसकी मार हिंदू समाज पर पडेगी।
इस विधेयक के अनुसार गोधरा में हिंदू कारसेवकों को जिंदा जला देने वाले अल्पसंख्यक मुसलमान अपराधी नहीं हो सकते परंतु इस कांड के बाद प्रतिक्रिया जताने वाले बहुसंख्यक हिंदू दोषी हैं। किसी भी ऐरे गैरे अल्पसंख्यक द्वारा छोटी सी अथवा मनगढंत शिकायत करने पर प्रमुख हिंदू संगठनों के प्रमुखों, जगदगुरू शंकराचार्य, महामंडलेश्वरों एवं धार्मिक सामाजिक संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में पहुंचाया जा सकता है।

Comment:

betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
alobet
vegabet giriş
vegabet giriş
restbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
roketbet giriş
imajbet giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
begaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
roketbet giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
Betkolik giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
Safirbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
roketbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş