हिंदी की हत्या के लिए प्रतिबद्घ सरकार

इस देश की स्वतंत्रता के साथ सबसे बड़ा छल करने वाले व्यक्ति का नाम पंडित नेहरू है, जो देश के दुर्भाग्य से इस देश का प्रथम प्रधानमंत्री कहलाया। संविधान सभा में पंडित नेहरू अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो इस देश में अंग्रेजी को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्घ थे। संविधान सभा के सदस्यों की संम्मति की उपेक्षा करके हिंदी के विरोध में खड़े रहे और एक एक सदस्य से संपर्क कर उन्हें दस वर्ष तक इस देश में अंग्रेजी को बनाये रखने के लिए तैयार कर लिया। दस वर्ष बाद सभी प्रदेशों द्वारा हिंदी स्वीकार्य होने पर ही उसे राष्टï्रभाषा बनाया जा सकता है, ऐसी शर्त लगाकर अंग्रेजी को सदा के लिए इस देश पर थोप दिया।

उसी परंपरा के सिपाही, नेहरू परिवार के वफादार, देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिंदी की हत्या के संकल्प को कार्य रूप देना प्रारंभ कर दिया। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की हिंदी समिति की अध्यक्षता करके उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा एक परिपत्र जारी करवा दिया है। जिसमें हिंदी को सरल बनाने के नाम पर अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करने का निर्देश दिया है। आगे से भोजन के स्थान पर लंच, रात्रि के स्थान पर नाइट, सोमवार को मंडे, महाविद्यालय को कालेज जैसे शब्दों के प्रयोग को यह परिपत्र बढाने की बात करता है। सरकार की मान्यता है ऐसा करने से हिंदी सरल होकर सामान्य जन की भाषा बन जाएगी। अंग्रेजी समर्थक लोगों की बेईमानी और दोहरे चरित्र की बात देखें जब डा. रघुवीर ने अंग्रेजी शब्दों के स्थान पर हिंदी शब्दों के प्रयोग की बात की तब इन लोगों ने उन शब्दों के प्रयोग को रघुवीरी हिंदी कहकर परिहास किया था वे ही लोग आज हिंदी के नाम पर अंग्रेजी सीखने की बात कर रहे हैं।

देशद्रोही हिंदी समाचार पत्रों में सबसे अग्रणी पत्र है नवभारत टाइम्स, यह हिंदी के नाम पर अंग्रेजी की दलाली करता है। इस समाचार पत्र को पढकर कोई शुद्घ भाषा का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। इस समाचार पत्र में आधे से अधिक हिंदी शब्दों के स्थान पर अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया जाता है। यह समाचार पत्र अंग्रेजी का गुणगान करता है और हिंदी व हिंदी वालों का मजाक उडाता है। यही कार्य करने के लिए गृह मंत्रालय का परिपत्र भी प्रोत्साहित करता है।

इन अंग्रेजी के पिटï्ठू समाचार पत्रों ने इस परिपत्र की जमकर प्रशंसा की है। इसके समर्थन में लेख लिखे हैं तथा इसे सरकार की दृढ इच्छाशक्ति का परिणाम बताया है। ध्यान देने की बात है कि जिस सरकार और मंत्रालय का राजभाषा विभाग हिंदी को बढाने के लिए कर्मचारी नहीं हैं। राजभाषा मंत्रालय का कार्य जिस गृहमंत्री के अधीन आता है उसे हिंदी में काम करना आता ही नहीं है। जिस इच्छाशक्ति है यह बात तब पता लगी जब अंग्रेजी को बढ़ावा देने काा अवसर आया।

मनमोहन सिंह ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिस व्यक्ति को हिंदी आती ही नहीं, जो अंग्रेजी या उर्दू जानता है, वह व्यक्ति इस देश की भाषा को सामान्य जन की भाषा बनाने के लिए अंग्रेजी की वकालत करता है। पाठक सोच सकते हैं जो व्यक्ति जीवन भर अमेरिका और अमरीकी संस्थाओं का निष्ठावान सेवक रहा है, आज उसकी निष्ठा कैसे बदल सकती है?

यह सरकार बहुराष्टï्रीय निकायों की आरती उतारती है वे इस देश में केवल व्यापार नहीं करते वे यहां अपनी सभ्यता, संस्कृति और भाषा की खेती भी करते हैं। उन्होंने इस देश के लोगों को बताया जब यहां की जनता अंग्रेजी सीख जाएगी तो इनके देश में शेक्सपीयर पैदा होने में देर नहीं लगेगी। इस देश में अंग्रेजी शेक्सपीयर तो पैदा नहंी कर सकती परंतु इस देश की कालीदास और तुलसीदास पैदा करने की क्षमता को अवश्य नष्टï कर सकती है। इस कार्य से यह देश अंग्रेजी का बाजार बन रहा है और अपनी बड़ी जनसंख्या के कारण विश्व के अंग्रेजी व्यापार के विस्तार में सहायक हो रहा है। इन बहुराष्टï्रीय निगमों ने देश में अवैध बेईमान तरीके से प्रशासन और सरकार में जो अधिकार बना रखा है, उसे ये निरंतर व वैध बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इन्हीं  में से माइका नामक संस्थान द्वारा इस देश का भविष्य अंग्रेजी में ही सुरक्षित है यह बताने के लिए मुंबई में एक भव्य सम्मेलन का बायोजन किया गया था। सरकार की अंग्रेजी परस्त नीति ने इस देश में अंग्रेजों की नीति लागू करके पांच सौ वर्ष का कार्य साठ साल में पूरा कर दिया और शेष कार्य को जल्दी पूरा करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इस हत्या के प्रयास को उचित सिद्घ करने के लिए सभी अंग्रेजी समर्थक पक्ष इस कार्य में जी जान से जुट गये हैं। इसीलिए अंग्रेजी प्रकाशकों ने इस प्रयास के समर्थन में पुस्तकें भी प्रकाशित कर डाली हैं, जिससे इस प्रयास के समर्थकों को भारतीय भाषा समर्थकों के तर्कों का खण्डन करने के लिएा सामग्री मिल सके।

किसी भी भाषा के अस्तित्व के समाप्त करने का यही प्रकार होता है जो प्रकार प्रधानमंत्री और उनकी सरकार अपना रही है। भाषा को अपने शब्दों से दूर कर दी। यह प्रकार आसान इसलिए होता है कि यह परिवर्तन शब्दों का होने से भाषा बोलने वालों को बदले शब्द नयापन देते हैं और व्यक्ति को पढे लिखे होने का गौरव अनुभव कराते हैं। इस प्रक्रिया से बढते बढते भाषा में परिवर्तित भाषा के शब्दों के अभ्यस्त हो जाते हैं, अपनी भाषा  के प्रति उनमें कोई अनुराग शेष नहीं रहता, तब ये सरलता से पूरी भाषा को बदल सकते हैं। यही प्रक्रिया मंत्रालय ने प्रारंभ की है। धीरे धीरे हिंदी में अंग्रेजी शब्दों की भरमान ही नहीं, और इसदेश की जनता के हृदय और मस्तिष्क पर अंग्रेजी का साम्राज्य अपने आप स्थापित हो जाएगा। इस परिपत्र में अपनाई गयी प्रक्रिया से केवल हिंदी का ही अहित नहीं होगा अपितु इस देश की सारी प्रादेशिक भाषाएं भी अंग्रेजी के आक्रमण से अक्रांत हो जाएंगी और इस देश की भाषाएं बिना मारे अपनी मौत मर जाएगी। देश ही नहीं इस महाद्वीप की सारी भाषाएं की भी यही नियति होगी।

इस षडयंत्र को तार्किक बनाने के लिए इस बात का प्रचार किया जाता है कि देश में अनेक भाषाएं होने से संपर्क में रूकावट पैदा होती है, अत: अनेक भाषाओं के स्थान पर एक ही भाषा होनी चाहिए। इस हथियार से अंग्रेजी साम्राज्य ने अफ्रीकी की सारी भाषाओं को काल के गर्त में समाविष्टï कर दिया। वही सब कुछ आज भारत और भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाओं के साथ हो रहा है। अंग्रेज सरकार ने भारत में केवल शासन ही नहीं किया, केवल अपने प्रशासनिक तंत्र की ही स्थाना नहीं की अपितु अपनी भाषा और संस्कृति का राज्य भी इसदेश की भाषाओं, संस्कृति व परंपराओं पर स्थापित किया। केरल में मलयालम का कोष सैकडों वर्ष पहले बना परंतु अंग्रेज ने इस बात का विशेष ध्यान रखाा कि मलयालम के संस्कृत शब्दों केा कोष में स्थान न दिया जाए, जिससे भाषा का अपने मूल से संबंध विच्छेद हो जाएं। आज तक भी वही प्रक्रिया हमारी सरकार और हमारी भाषाविद अपनाये हुए है।

भारतीय कम्युनिस्टों ने इस परंपरा को जारी रखा और बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार ने भी अपनी प्रादेशिक भाषा को राष्टï्रीय मूल से तोडने के प्रयासों में कोई न्यूनता नहीं आने दी और उसी क्रम को आगे बढ़ाया। 

संस्कृत के बड़े कोषों के निर्माण के समय कोषकार को विशेष निर्देश जारी था कि वेद के शब्दों का अर्थ करते हुए मांस भक्षण जैसे अर्थों को शब्दों से जोड़ें। यह प्रयास अंग्रेज सरकार पोषित रचनाओं पर दृष्टिïगत होता है। अंग्रेज सरकार ने दो बार पं. भगवदत जी से ऐसा अनुसंधान कराने का प्रयास किया था जिससे, यहां की किसान जातियां इस देश में बाहर से आई, ऐसा सिद्घ हो पर पं. भगवत जी ने ऐसा करने मना कर दिया। लोग लोग इस देश की सभ्यता भाषा का अस्तित्व कैसे स्वीकार कर सकते हैं? केन्द्र सरकार सुविधा व सरलता के नाम पर भाषा के साथ उसकी देवनागरी लिपि पर भी आक्रमण कर रही है। सेना व केन्द्रीय सेवाओं में जो हिंदी निर्देश पुस्तकें बनती हैं उनको रोमन में ही लिखाया गया है और उनकी अपनी मूल भाषाओं से दूर कर दिया गया। यह सरकार भी दिशा में बढ रही है। पहले भाषा को सरल करने के नाम पर हिंदी व प्रांतीय भाषाओं में अंग्रेजी शब्दों की भरमार कर दो, फिर देश में एकरूपता और कठिनता दूर करने के नाम पर हिंदी को देवनागरी लिपि से हटाकर रोमन में लिखने का निर्देश दे दिया जाए। सरकार को इस कार्य को करने के लिए विश्व व्यापार संगठन, अंतर्राष्टï्रीय मुद्राकोष, बहुराष्टï्रीय मुद्राकोष,  बहुराष्टï्रीय निगम, विशेष दबाव डाल रहे हैं। इनके साथ समाचार पत्र व दूरदर्शन ने पैसे के लिए गठबंधन कर लिया है। उनके द्वारा भाषा का अपमिश्रण और हिंदी के लिए रोमन लिपि की वकालत करने का घृणित और निंदनीय कृत्य किया जा रहा है।

इस षडयंत्र का अनुभव करके इस कुकृत्य को रोकने की आवश्यकता है। राष्टï्रप्रेमियों को चाहिए कि वे इस परिपत्र का विरोध करें। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को इस कार्य की भत्र्सना करते हुए इसे वापस लेने के लिए पत्र लिखें। अपने सांसद और विधानसभा सदस्यों को इसका विरोध करने के लिए प्रेरित करें। साहित्यकारों साहित्य संगठनों का भी कर्तव्य है कि वे जनता को इस सरकारी षडयंत्र से परिचित करायें तथा सरकार को इस कृत्य के प्रति विरोध व्यक्त करें। भाषा ही राष्टï्र की एकता, ऐश्वर्य को देने वाली है, ज्ञान के प्रकाश का स्रोत है। अत: वेद ने कहा है- 

अहं राष्टï्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betnano
Hititbet Giriş
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
betnano
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
hititbet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
meritbet
bets10
meritbet
bets10
betnano
bets10
bets10
betnano
betnano
atlasbet
atlasbet
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
xslot giriş
xslot giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betkom giriş
betkom giriş