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महाशय राजेंद्र सिंह आर्य जी की 32वीं पुण्यतिथि पर आयोजित की गई विचार गोष्ठी : परिवारों को मंदिर का रूप देने से ही बनेगा विश्व मंदिर पवित्र : रवि चाणक्य

ग्रेटर नोएडा ( विशेष संवाददाता) यहां पर समाजसेवी रहे महाशय राजेंद्र सिंह आर्य की 32वीं पुण्यतिथि के अवसर पर “माता-पिता का राष्ट्र निर्माण में योगदान” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक रवि चाणक्य ने कहा कि माता-पिता का हमारे जीवन में विशेष योगदान होता है। माता-पिता के दिए गए संस्कार राष्ट्र को एक सुसंस्कृत, सुशिक्षित और सुसभ्य नागरिक देने का काम करते हैं।


उन्होंने कहा कि पितृ भक्त से बढ़कर कोई चीज नहीं। रामायण में वनगमन के प्रसंग में पितृ-भक्ति का एक सुन्दर प्रेरणादायक उदाहरण मिलता है। जब दशरथ जी राम के पूछने पर अपनी उस दुर्दशा का कारण बता नहीं रहे थे और राम को चैदह वर्ष के लिये वन जाने को कह नहीं पा रहे थे, तब राम ने प्रतिज्ञापूर्वक कहा था कि ‘हे पिते! आप मुझे आज्ञा कीजिये। यदि आप मुझे जलती हुई चिता में कूदने की आज्ञा भी करेंगे तो मैं बिना सोच-विचार किए चिता में कूद जाऊंगा।’
नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि यह राम का और वैदिक भारतीय संस्कृति का आदर्श था। आज ये बातें अंग्रेजी शिक्षा ने विलुप्त कर दी हैं। आज तो एल.के.जी. से ही माता-पिता व अध्यापक बच्चों को ईसाई मत प्रधान अंग्रेजी की कवितायें सुनाते व याद कराते हैं। जिससे भारतीय संस्कारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के प्रति पवित्र भाव रखने से राष्ट्र में पवित्रता का संचार होता है । राष्ट्र की पवित्रता को वैश्विक पवित्रता बनाने के लिए हमें परिवारों को मंदिर बनाना होगा।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि और साहित्यकार प्रोफेसर विजेंदर सिंह आर्य ने कहा कि माता-पिता के दिव्या संस्कार संतान को दिव्या और भाव बनाते हैं। उन्हीं के दिए संस्कार जीवन में पथ प्रदर्शन करते हैं और दीप स्तंभ के रूप में हमारे जीवन में प्रकाश फैलाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि महाशय राजेंद्र सिंह आर्य जीवन भर वैदिक संस्कारों के प्रति निष्ठावान रहे और उन्हें फैलाने का काम करते रहे । उनका जीवन एक दीप स्तंभ के रूप में आज भी हम सबका मार्गदर्शन कर रहा है । उनकी भव्य प्रेरणा हमारे दिव्य जीवन का आधार है। वरिष्ठ समाजसेवी और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री देवेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि माता-पिता की प्रेरणा शक्ति बड़ी बलवान होती है। उनकी प्रेरणा शक्ति के आधार पर शिवाजी एक छोटे से घर से निकलकर विशाल साम्राज्य का निर्माण करते हैं। इतना ही नहीं माता के दिए संस्कारों के आधार पर वह तत्कालीन मुगल सत्ता को उखाड़ कर हिंदू राष्ट्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी प्रकार हमारे जितने भर भी क्रांतिकारी थे वे सब के सब माता-पिता के संस्कारों के आधार पर ही आगे बढ़े।
भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता और वरिष्ठ इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि माता-पिता की चेतना शक्ति हमारी चेतना शक्ति के साथ जब सहकार कर उठती है तो हमारे भीतर विराट पुरुष का आविर्भाव होता है। जिसे जितने जितने संदर्भ और जितने जितने अर्थ में हम ग्रहण कर लेते हैं अपने अर्थ में ही हमारी चेतना मुखरित हो उठती है और हमारा जीवन धन्यता को प्राप्त होकर समाज, राष्ट्र और प्राणी मात्र के कल्याण में रत हो जाता है।
इस अवसर पर डॉ के0पी0 मिश्रा, डॉ0 कपिल कुमार, श्री शंखधर मिश्र, श्री प्रताप सिंह भाटी, श्री नवीन चंदेरिया, प्रिंस कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री प्रताप सिंह भाटी द्वारा की गई। इस अवसर पर अमृत सिंह आर्य, आदित्य आर्य, सौरभ सिंह ,भावना नागर , प्रियंका, सविता, श्रीमती मृदुला आर्या , श्रीमती ऋचा आर्या , श्रेया आर्या ,अमन आर्य , कविता देवी, विराट, विरल ,शुभ्रा, प्रज्ञा आदि उपस्थित रहे।

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