अपनी बनी बनाई दावेदारी से पीछे हटते नीतीश कुमार

Nitish_Kumar_(cropped)

अंकित सिंह

2024 चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 26 विपक्षी दल एक मंच पर आए हैं। उसे इंडिया का नाम दिया गया है। इंडिया गठबंधन की तीसरी बैठक मुंबई में 31 अगस्त और 1 सितंबर को होगी। इस बैठक से पहले कयासों और चर्चाओं का दौर एक बार फिर से जारी है। बैठक को लेकर बिहार में भी हलचल तेज है। लगातार इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन इंडिया का संयोजक बनाया जा सकता है। हालांकि अचानक इसके लिए अब मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सामने आ रहा है। नीतीश ने संयोजक बनने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक चर्चा का एक और नया दौर शुरू हो गया है।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्हीं की कवायद पर जून में विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक पटना में हुई थी और बेंगलुरु के लिए कहानी तैयार की गई थी। तब इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि नीतीश कुमार को इस गठबंधन का संयोजक बनाया जा सकता है। हालांकि, बेंगलुरु की बैठक में इसे मुंबई तक के लिए टाल दिया गया। सूत्रों ने दावा किया कि नीतीश कुमार इससे नाराज हो गए थे। हालांकि, नीतीश कुमार ने इससे इनकार किया। पर नीतीश की राजनीति को जो कोई भी समझता है, उसे इस बात का अच्छे से एहसास रहता है कि वह सामने कुछ बोलते हैं और उनके मन में कुछ और चलता है। वर्तमान में देखें तो नीतीश कुमार कहीं ना कहीं एक तरह से असमंजस में दिखाई दे रहे हैं।

नीतीश कुमार को इस बात की उम्मीद थी कि राष्ट्रीय स्तर पर लालू यादव उनके पक्ष में खुलकर बैटिंग करेंगे। लेकिन इशारों ही इशारों में लालू यादव ने पहली ही बैठक में राहुल गांधी को दूल्हा बनने के बाद कर दी थी। इसके बाद संयोजक को लेकर जब लालू यादव से सवाल पूछा गया उन्होंने कहा कि कोई एक आदमी संयोजक नहीं बनेगा। तीन-चार आदमी को संयोजक बनाया जाएगा। इसी के बाद सोमवार को नीतीश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी कोई अपनी महत्वाकांक्षा नहीं है। वह तो सभी को एकजुट करना चाहते हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि लालू प्रसाद ने कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार के अरमानों पर पानी फेर दिया है। इसके अलावा नीतीश को इस बात का भी एहसास है कि कहीं न कहीं उनकी पार्टी कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस की तुलना में थोड़ी कमजोर है। शायद इस वजह से भी उन्होंने अपने नाम को पीछे किया है।

इंडिया गठबंधन की की बात करें तो कहीं ना कहीं प्रधानमंत्री पद को लेकर भी तकरार दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हो जाने के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हुए हैं। तभी तो हाल के इंटरव्यू में कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेश बघेल ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने की बात की। हालांकि, जदयू भी नीतीश के नाम पर दावा ठोक रही है। उधर ममता बनर्जी की पार्टी भी उनके पक्ष में बैटिंग कर रही है। मामला बढ़ा तो जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश जी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और शरद पवार सभी में पीएम बनने की क्षमता है। हमारे (जेडीयू) लिए पीएम पद महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन नीतीश कुमार में पीएम/संयोजक पद के लिए जरूरी सभी क्षमताएं हैं। हमारे लिए विपक्षी एकता और 2024 का चुनाव महत्वपूर्ण है। हम न तो पीएम पद के दावेदार हैं और न ही संयोजक पद के।
नीतीश की विश्वसनीयता पर संदेश
अगर देखा जाए तो नीतीश कुमार की विश्वसनीयता अभी भी सवालों में है। कई बार उनके पलटी मारने की चर्चा तेज हो जाती है। लालू यादव को भी यह अच्छे से पता है। लालू यादव की राजनीति को देखें तो उन्होंने हमेशा कांग्रेस के साथ गठबंधन पर भरोसा जताया है। हालांकि नीतीश कुमार भाजपा के साथ रहें और अपने जरूरत के हिसाब से गठबंधन बदलते भी रहे हैं। यही कारण है कि लालू यादव उन पर थोड़ा भी भरोसा नहीं करते। इसके अलावा लालू नीतीश कुमार पर एक दबाव बनाकर रखना चाहते हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गाँधी के विपक्ष के अघोषित उम्मीदवार के रूप में उभरने से नीतीश कुमार अब इस पद के लिए दावेदारी करने की स्थिति में भी नहीं हैं, प्रधानमंत्री बनना तो दूर की बात। मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद भी नहीं चाहेंगे कि नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन का संयोजक या पीएम-उम्म्मीदवार बना कर उनका कद बढाया जाए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार खुली आँखों से प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। वहीं, प्रशांत किशोर ने कहा कि जहां तक नीतीश कुमार की कोशिशों की बात है तो उनकी खुद की हालत इतनी खराब है कि उनके अपने ही राज्य में पैर जमाने की कोई गारंटी नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के लिए वह क्या कर सकते हैं? यदि आप क्रम को देखें तो सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस है, टीएमसी है, उसके बाद डीएमके आती है- उन्होंने अपना पूरा राज्य जीता है और उनके पास 20-25 सांसद हैं। वे अपना राज्य जीतने का दावा कर सकते हैं। नीतीश कुमार के पास कुछ नहीं है- ना दल है, ना छवि है। उन्हें किस आधार पर (INDIA का संयोजक) बनाया जा सकता है?

राजनीति में जो दोस्त दिखता है, जरूरी नहीं वह आपका हमदर्द हो, आपका हमेशा बेहतर चाहे। राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ अड़ंगा लगाकर ही हर कोई आगे बढ़ने की कोशिश करता है। यहां जरूरत के हिसाब से नेता और उनकी नियत बदलती हैं। जनता भी उसी हिसाब से अपना फैसला लेती है। यही तो प्रजातंत्र है।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
onwin giriş
Kolaybet Giriş
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
jojobet giriş
bettilt giriş
sahabet
sahabet
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
bettilt giriş