Categories
भारतीय संस्कृति

क्या है शिवलिंग और पार्वतीभग पूजा का रहस्य

सत्यान्वेषी नारायण मुनि
पुराणों में में इसकी उत्पत्ति की कथाएं विभिन्न स्थानों पर विभिन्न रूपों में लिखी हुई मिलती हैं, देखिये हम यहां कुछ उदाहरण उन पुराणों के पेश करते हैं, यथा-
1 दारू नाम का एक वन था, वहां के निवासियों की स्त्रियां उस वन में लकडिय़ां लेने गयीं, महादेश शंकर जी नंगे कामियों की भांति वहां उन स्त्रियों के पास पहुंच गये। यह देखकर कुछ स्त्रियां व्याकुल हो अपनेअपने आश्रमों में वापिस लौट आईं, परंतु कुछ स्त्रियां उन्हें आलिंगन करने लगी। उसी समय वहां ऋषि लोग आ गये, महादेव जी को इस नंगी स्थिति में देखकर कहने लगे कि-
हे वेद मार्ग को लुप्त करने वाले तुम इस वेद विरूद्घ काम को क्यों करते हो?
यह सुन शिवजी ने कुछ न कहा, तब ऋषियों ने उन्हें श्राप दे दिया कि तुम्हारा यह लिंग कटकर पृथ्वी पर गिर पड़े उनके ऐसा कहते ही शिवजी का लिंग कट कर भूमि पर गिर पड़ा और आगे खड़ा हो अग्नि के सामने जलने लगा, वह पृथ्वी पर जहां कहीं भी जाता, जलता ही जाता था जिसके कारण संपूर्ण आकाश पाताल और स्वर्गलोक में त्राहिमाम्-त्राहिमाम् मच गया, यह देख ऋषियों को बहुत दुख हुआ। इस स्थिति से निपटने के लिए ऋषि लोग ब्रहमा जी के पास गये, उन्हें नमस्ते कर सब वृतांत कहा, तब ब्रहमा जी ने कहा आप लोग शिव के पास जाइये, शिवजी ने इन ऋषियों को अपनी शरण में आता हुआ देखकर बोले-हे ऋषि लोगों आप लोग पार्वती जी की शरण में जाइये। इस ज्योर्तिलिंग को पार्वती के सिवाय अन्य कोई धारण नहीं कर सकता।
यह सुन ऋषियों ने पार्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया, तब पार्वती ने उन ऋषियों की आराधना से प्रसन्न होकर उस ज्योर्तिलिंग को अपनी योनि में धारण किया। तभी से ज्योर्तिलिंग पूजा तीनों लोकों में प्रसिद्घ हुई तथा उसी समय से शिवलिंग व पार्वतीभग की प्रतिमा या मूर्ति का प्रचलन इस संसार में पूजा के रूप में प्रचलित हुआ।
(ठाकुर प्रैस शिव पुराण चतुर्थ कोटि रूद्र सहिंता अध्याय 12 पृष्ठ 511 से 513)
2 शिवजी दारू वन में नग्न ही घूम रहे थे, वहां के ऋषियों ने अपनी अपनी कुटियाओं को पत्नी विहीन देखकर शिवजी से कहा- आपने इन हमारी पत्नियों का अपहरण क्यों किया? इस पर शिवजी मौन धारण किये रहे, तब ऋषियों ने उनके लिंग को खंडित होने का श्राप दे डाला, जिससे उनका लिंग कटकर भूमि पर आ पड़ा और अत्यंत तेजी से सातों पाताल और अंतरिक्ष की ओर बढऩे लगा, क्षण भर में देखते ही देखते सारा आकाश और पाताल लिंगमय हो गया।
(साधना प्रेस स्कंत पुराण पृष्ठ 15)
3 शिवजी एक दम नंग-धडंग़ रूप में ही भिक्षा मांगने के लिए ऋषियों के आश्रम में चले गये, वहां उनके इस देवेश्वर रूप को देखकर ऋषि पत्नियां, उन पर मोहित हो गयीं और उनकी जंघाओं से लिपट गयीं।
यह दृश्य देख ऋषियों ने शिवजी के लिंग पर काष्ट और पत्थरों से प्रहार किया, लिंग के पतित हो जाने पर शिवजी कैलाश पर्वत पर चले गये।
(वामनपुराण खण्ड 1 श्लोक 58, 68, 70 पृष्ठ 412 से 413 तक)
4 सूत जी ने बताया कि दारू नाम के वन में मुनि लोग तपस्या कर रहे थे, शिवजी नग्न हो वहां पहुंच गये, और कामदेव को पैदा करने वाले मुस्कान गान कर नारियों ने कामवाना की वृद्घि कर दी। यहां तक कि वृद्घ महिलाएं भी भूविलास करने लगी, अपनी पत्नियों को ऐसा करते देख मुनियों ने शिव को कठोर वचन कहे।
(डायमण्ड प्रेस, लिंग पुराण पृष्ठ 43)
तीथ जाना निषेध है
जो पुत्र माता पिता की पूजा करके उनकी पदक्षिणा करता है, उसे पृथ्वी परिक्रमा जैसा फल सुलभ हो जाता है। जो पुत्र अपने माता पिता को घर पर छोड़, तीर्थ यात्रा के लिए चला जाता है वह माता पिता की हत्या से मिलने वाले पाप का भागी होता है। क्योंकि पुत्र के लिए माता पिता का चरण रज ही महान तीर्थ है।
यह तीर्थ तो सर्वत्र सुलभ है, पुत्र के लिए माता पिता और स्त्री के लिए पति ये दोनों तीर्थ घर में ही विद्यमान हैं, ऐसा वेद और शास्त्र घोषणा करते हैं।
(गीता प्रेस शिव पुराण रूद्र संहिता पृष्ठ 251)
मूर्ति पूजा करना निषेध है
1 देवता मूर्तियों में निवास नहीं करते।
(वैंक्टेश्वर प्रेस, चाणक्य नीति, अध्याय 4 श्लोक 12 पृष्ठ 48)
2 अल्पबुद्घियों को मूर्तियों में और समदर्शियों को सर्वत्र देवता दिखलाई पड़ते हैं।
(वैंक्टेश्वर प्रेस, चाणक्य नीति, अध्याय 4 श्लोक 12 पृष्ठ 48)
3 शालिग्राम पत्थर के पूजक कुकर्मी हो जायेंगे।
(ठाकुर प्रेस शिव पुराण, विन्ध्येश्वर संहिता, अध्याय 1 पृष्ठ 50)
4 मिट्टïी और पत्थर आदि की मूर्तियां देवता नही होती, जो मनुष्य पत्थर आदि मूर्तियों को ईष्टï देव मानता है वह मनुष्य गधे के समान है।
अब आप बतायें कि आप कौन से शिव की उपासना करते हैं? क्या ऐसा शिव उपासना के योग्य है। हमें लिखें, हम उसे प्रकाशित करेंगे।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betnano
holiganbet giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpas giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casibom giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş