मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र को उठाने होंगे कड़े कदम

images (31)

रमेश सर्राफ धमोरा

मणिपुर देश के पूर्वोत्तर में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है। जिसकी सीमा पड़ोसी देश म्यांमार से लगती है। पिछले 3 महीनों से मणिपुर राज्य अंदरूनी हिंसा से जूझ रहा है। यहां की आबादी के दो प्रमुख समुदाय मैतई व कुकी जनजाति के मध्य जातीय संघर्ष छिड़ा हुआ है। जिसमें अब तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है व 450 लोग घायल हो चुके हैं। तीन महीने बीत जाने के बाद भी आपसी संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मणिपुर में 2017 से भाजपा के एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री हैं। लेकिन इस समय एन बीरेन सिंह की सरकार वहां की हिंसा पर नियंत्रण करने पर पूरी तरह से विफल साबित हो रही है। हर दिन हो रही आपसी मारकाट के चलते मणिपुर का जनजीवन पूरी तरह से ठप्प हो गया है।

हाल ही में एक पुरानी घटना का वीडियो सामने आया था। जिसमें कुछ महिलाओं के साथ बलात्कार कर उनको नंगा घुमाया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद पूरा देश खुद को शर्मसार महसूस कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस घटना पर स्वतः प्रसंज्ञान लेते हुए केंद्र व राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में त्वरित कार्यवाही की जाए। विपक्षी दलों के नेता लंबे समय से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं।

प्रदेश में चल रही अशांति के चलते मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह कुछ समय पूर्व राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने जा रहे थे तो रास्ते में महिलाओं के समूह ने एकत्रित होकर उनके इस्तीफे को छीनकर फाड़ दिया था। विपक्ष द्वारा उस घटना को सरकार द्वारा प्रायोजित घटना बताया गया। वहीं उस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह प्रदेश को आपसी संघर्ष की आग में जलता हुआ छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के प्रसंज्ञान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मणिपुर की घटनाओं की निंदा करते हुए गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। मणिपुर की पुलिस भी आपसी जातीय गुटों में बंट चुकी है। पुलिस के जवान पुलिस थानों से आधुनिक हथियार छीनकर एक दूसरे के खिलाफ उपयोग कर रहे हैं। राज्य सरकार शांति बहाली की प्रक्रिया में पूरी तरह असफल रही है। ऐसे में केंद्र सरकार को त्वरित कार्रवाई करते हुए मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं आगे आकर सभी विपक्षी दलों के नेताओं से मणिपुर की स्थिति को लेकर चर्चा कर उनके सुझाव लेने चाहिए। मणिपुर से म्यांमार की 350 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। जिसके ज्यादातर हिस्से में किसी तरह की फेंसिंग नहीं होने के कारण लोगों का बिना किसी डर के आना जाना लगा रहता है। म्यांमार में सेना द्वारा तख्ता पलटने के बाद बड़ी संख्या में वहां से शरणार्थियों ने पलायन कर मणिपुर में घुसपैठ कर ली है। जिससे भी मणिपुर की स्थिति और अधिक खराब हो गयी है। म्यांमार से आने वाले शरणार्थियों का मणिपुर के कुकी लोगों के साथ जुड़ाव होने के चलते मैतई लोगों में भय है कि शरणार्थियों के कारण कुकी लोगों की आबादी बढ़ने से वह बहुसंख्यक बन जाएंगे।

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय मैतेई, कुकी और नगा हैं। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। कुकी-नगा ईसाई हैं व एसटी वर्ग में आते हैं। मैतई आबादी करीब 55 प्रतिशत है जो इम्फाल घाटी में रहते हैं। वहीं कुकी-नगा आबादी करीब 45 प्रतिशत है। जो ज्यादातर पहाड़ों में रहते हैं। मैतई समुदाय ने मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाकर उन्हें भी जनजाति का दर्जा देने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय होने से पहले उन्हें जनजाति का दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए।

नगा-कुकी दोनों जनजाति मैतई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। आदिवासी समूहों को डर है कि यदि मैतई को विशेष दर्जा मिलता है तो उनका पहाड़ी क्षेत्रों पर भी कब्जा हो जाएगा। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतई बहुल इम्फाल घाटी में हैं। ऐसे में मैतई को एसटी का आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा। मणिपुर के 60 में से 40 विधायक मैतई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 में से दो ही मुख्यमंत्री नगा, कुकी जनजाति से रहे हैं।

मैतई और कुकी कि अलग-अलग संस्कृति और परंपरा है। विवाद के मूल कारण पहाड़ी बनाम घाटी की पहचान का संघर्ष और समान विकास नहीं होना है। मैतई राजनीतिक प्रभुत्व वाला समुदाय है जिनके कारण राज्य का विकास घाटी तक ही सीमित है। सरकारी नौकरियों में भी मैतई समुदाय का प्रभुत्व अधिक है। राज्य के कानून के कारण मैतई समुदाय के लोग पहाड़ों में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। जबकि कुकी सहित अन्य जनजाति समूह के लोग राज्य के किसी भी हिस्से में जमीन खरीद सकते हैं। इसी कारण से मैतई लोगों को लगता है कि राज्य के कानून में जनजातियों को उनकी आबादी की तुलना में अधिक लाभ प्रदान किए गए हैं।

मणिपुर में चल रहे आपसी जाति युद्ध को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार को मणिपुर के सभी समुदायों में विश्वास पैदा करना होगा। केंद्र सरकार को वहां के लोगों को यह बताना होगा कि किसी भी जाति, धर्म, समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव नहीं होगा। उनके अधिकारों का किसी भी सूरत में हनन नहीं होने दिया जाएगा। केंद्र सरकार के बड़े नेताओं को मणिपुर जाकर शांति बहाली के प्रयास करने चाहिए।

आज मणिपुर में हिंसा की आग इतनी तेज हो गई है कि कोई भी राजनीतिक दल या नेता दिल्ली में बैठकर मणिपुर में शांति बहाल नहीं कर सकता है। अब तो मणिपुर के पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मणिपुर में चल रही हिंसा को लेकर चिंता जाहिर करने लगे हैं। उन्हें भी डर है कि यदि मणिपुर में भड़की हिंसा पर शीघ्र ही काबू नहीं पाया गया तो धीरे-धीरे उसका असर पड़ोसी राज्यों के लोगों पर भी पड़ने लगेगा। जिससे वहां भी कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है।

विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो हमेशा शांति व भाईचारे की बातें करते हैं। वह पिछले तीन महीने से मणिपुर को लेकर चुप क्यों हैं। प्रधानमंत्री मोदी को मणिपुर की हिंसा को रोकने के लिए मणिपुर का दौरा कर वहां के लोगों से बात करनी चाहिए। उन्हें विश्वास देना चाहिए कि केंद्र सरकार वहां के लोगों के अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती नहीं होने देगी। गृह मंत्री अमित शाह मई महीने में मणिपुर का दौरा कर विभिन्न समुदायों के लोगों से मिल चुके हैं। लेकिन उनके दौरे का मणिपुर में शांति बहाली के दिशा में कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री को सामने आकर प्रदेश में शांति बहाली की प्रक्रिया प्रारंभ करनी होगी तभी मणिपुर में शांति बहाली हो पाएगी।

Comment:

norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
mariobet giriş
betpas giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
dedebet
betkanyon
radissonbet
casinofast
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
norabahis giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betwild giriş
redwin giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
redwin giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
timebet giriş
timebet giriş