गीता प्रेस गोरखपुर का विरोध करने वाले लोगों की मानसिकता

images - 2023-06-24T135618.608

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

एक अन्य तथ्य भी ध्यान रखिए कि भारत की स्वतंत्रता के संकल्प को शक्ति देने के लिए ‘राम-नाम जाप’ का आग्रह लेकर जब भाई पोद्दार मुंबई में महात्मा गांधी से मिले थे, तब गांधीजी ने ‘राम-नाम’ का प्रसार करने के लिए प्रशंसा की थी।

भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने सर्वसम्मति से गीता प्रेस, गोरखपुर को प्रतिष्ठित ‘गांधी शांति पुरस्कार’ देने का निर्णय करके बहुत अच्छा काम किया है। इसी वर्ष गीता प्रेस ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण किये हैं। अपनी इस 100 वर्ष की यात्रा में इस प्रकाशन ने भारतीय संस्कृति की खूब सेवा की है। भारतीयता के विचार को जन-जन तक पहुँचाने में गीता प्रेस का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। वर्ष 1923 में स्थापित गीता प्रेस आज विश्व के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक मानी जाती है। इस प्रेस ने अब तक 14 भाषाओं में 41.7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित कर नया कीर्तिमान बनाया है। इनमें से श्रीमद्भगवद्गीता की 16.21 करोड़ प्रतियां शामिल हैं। गीता प्रेस की नीति के कारण श्रीमद्भगवतगीता, श्री रामायण, श्री महाभारत सहित अनेक भारतीय ग्रंथ घर-घर तक पहुँच सके।

पुरस्कार की घोषणा के बाद गीता प्रेस को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उचित ही कहा- “गीता प्रेस ने पिछले 100 वर्षों में लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में काफी सराहनीय कार्य किया है”। आश्चर्य है कि कुछ लोगों/संगठनों को गीता प्रेस को पुरस्कार दिए जाने का निर्णय भी चुभ रहा है। सामान्य लोगों को भी यह समझ आ रहा है कि विरोध के पीछे की मानसिकता क्या है- गीता प्रेस ने हिन्दू धर्म-संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाया है, क्या इसलिए उन्हें कष्ट है? देश में कुछ विचार समूह ऐसे हैं, जिन्हें प्रत्येक हिन्दू पहचान एवं भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित संस्थाओं से चिढ़ है।

“गीता प्रेस को ‘गांधी शांति पुरस्कार-2021’ दिया जाना, सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है”। यह विचार अत्यंत संकीर्ण सोच को प्रकट करता है। इस बेतुके बयान के समर्थन में जिस पुस्तक का जिक्र किया गया है, उसके लेखक को गीता प्रेस और उसके प्रकाशनों के प्रति बुनियादी जानकारी ही नहीं है। पुस्तक ‘गीता प्रेस एंड द मेकिंग ऑफ हिन्दू इंडिया’ में लेखक अक्षय मुकुल ने अनेक बुनियादी बातों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया है। एक मजेदार तथ्य यह है कि इस पुस्तक की प्रशंसा विवादित लेखिका अरुंधति रॉय ने की है। याद हो, अरुंधति मानवता के दुश्मन खूंखार नक्सलियों को बंदूकधारी गांधीवादी बताती हैं। इस पुस्तक के आधार पर पूर्व में भी गीता प्रेस की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयत्न किया जा चुका है। इस बात को तथ्यात्मक रूप से समझने के लिए डॉ. संतोष कुमार तिवारी का शोधपूर्ण आलेख ‘गीता प्रेस को बदनाम करने की कोशिश’ पढ़ना चाहिए, जो 20 मार्च 2017 को पांचजञ्य के वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। उल्लेखनीय है कि डॉ. तिवारी ने ब्रिटेन के कार्डिफ विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की है और वे झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग से प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

विरोधियों की मानसिकता देखिए कि वे गीता प्रेस के सम्मान को स्वातंत्र्यवीर सावरकर और नाथूराम गोडसे से जोड़कर एक यशस्वी प्रकाशन के संबंध में भ्रम और विवाद खड़ा करना चाहते हैं। ओछे राजनीतिक स्वार्थ के चलते स्वातंत्र्यवीर सावरकर के प्रति चिढ़ ने नेताओं को इतना अंधा कर दिया है कि उन्हें इस महान क्रांतिकारी के संबंध में न तो महात्मा गांधी के विचार स्मरण रहते हैं और न ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विचार एवं कार्य। वितंडा खड़ा करने में आनंद लेने वालों को समझना होगा कि तथ्यों के घालमेल से सच नहीं बदल जाएगा। सच यही है कि गीता प्रेस के प्रति प्रत्येक भारतीय के मन में अगाध श्रद्धा है। गीता प्रेस ने अपनी अब तक की अपनी यात्रा में भारतीय संस्कृति की महान सेवा की है।

विरोधियों द्वारा यह कहना कि महात्मा गांधी और गीता प्रेस के प्रबंधकों के बीच घोर असहमतियां थी- निराधार और मूर्खतापूर्ण कथन है। महात्मा गांधी और गीता प्रेस के संबंध कैसे थे, इसे दो प्रमाणों के आधार पर समझिए। गीता प्रेस की सुप्रसिद्ध पत्रिका ‘कल्याण’ के पहले अंक में महात्मा गांधी ने लेख लिखा था। इतना ही नहीं, बाद में भी गांधीजी कल्याण के लिए लिखते रहे। दूसरा तथ्य देखिए- पत्रिका के संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार और प्रबंधन ने महात्मा गांधी के आग्रह को शिरोधार्य करते हुए ‘कल्याण’ में कभी विज्ञापन प्रकाशित नहीं किए।

गीता प्रेस का अध्ययन करने वाले विद्वान डॉ. संतोष तिवारी ‘पांचजञ्य’ में 19 जून 2023 को प्रकाशित लेख ‘गीताप्रेस: गांधीजी और कल्याण के रिश्ते’ में लिखते हैं- “कल्याण के अक्टूबर 1946 के अंक पर एक बार ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध भी लगाया था। जब ‘कल्याण’ का प्रकाशन दोबारा शुरू हुआ तो श्री पोद्दार बापू से आशीर्वाद लेने गए थे। गांधीजी ने तब उनको यह सलाह दी थी कि कल्याण में कभी भी बाहर का कोई विज्ञापन या पुस्तक समीक्षा मत छापना। ‘कल्याण’ पत्रिका आज तक गांधीजी के उस परामर्श का अनुसरण करती आ रही है। गीता प्रेस किसी से कोई दान राशि भी स्वीकार नहीं करती है”।

एक अन्य तथ्य भी ध्यान रखिए कि भारत की स्वतंत्रता के संकल्प को शक्ति देने के लिए ‘राम-नाम जाप’ का आग्रह लेकर जब भाई पोद्दार मुंबई में महात्मा गांधी से मिले थे, तब गांधीजी ने ‘राम-नाम’ का प्रसार करने के लिए प्रशंसा की थी। वास्तविकता यह है कि महात्मा गांधी के साथ श्री पोद्दार का संबंध एक परिवार के जैसा था। 1932 में गांधीजी के पुत्र देवदास गांधी को अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार करके गोरखपुर जेल में रखा था। गांधीजी के कहने पर श्री पोद्दार ने देवदास गांधी का पूरा ख्याल रखा और नियमित रूप से जेल में उनसे मिलते रहे। रिहाई के फौरन बाद जब देवदास गांधी बीमार पड़े, तब भी श्री पोद्दार ने उनका ख्याल रखा। महात्मा गांधी ने 21 जुलाई 1932 को भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार को लिखे पत्र में प्रसन्नता एवं आश्वस्ति व्यक्त करते हुए लिख है- “भाई हनुमान प्रसाद, आज तुम्हारा पत्र मिला और तार भी। तुम जब तक वहाँ हो, तब तक मुझे देवदास की चिंता नहीं रहेगी। और फिर, देवदास ने मुझे लिखा है कि तुमने बहुत स्नेहपूर्ण बर्ताव किया है। डॉक्टर वाकई बहुत अच्छे आदमी हैं। समय-समय पर तुम्हारे पत्र मुझे मिलते रहेंगे, ऐसी मेरी सदैव आशा है” (देखें- संपूर्ण गांधी वाङ्मय (हिन्दी), खण्ड-50, पृष्ठ-274)। कई लोग यह भी झूठ फैलाते हैं कि ‘कल्याण’ में महात्मा गांधी की हत्या के बाद उन पर कोई सामग्री प्रकाशित नहीं हुई। वास्तविकता यह है कि जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब ‘कल्याण’ में दो श्रद्धांजलियां प्रकाशित हुईं, जिनमें से एक स्वयं संपादक भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार ने लिखी थी। अपने संदेश में उन्होंने लिखा- ‘‘गांधीजी धर्म और जाति के भेद से ऊपर उठे हुए थे और सत्य एवं अहिंसा के सच्चे पुजारी थे’’।

इसके बाद भी यदि कुछ लोग यह कहकर विरोध में छाती पीट रहे हैं कि महात्मा गांधी का गीता प्रेस के प्रबंधकों एवं संपादक भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार के साथ गहरा मतभेद था, तब वे किस-किस का विरोध करेंगे क्योंकि अनेक मुद्दों पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार भगत सिंह और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से लेकर अनेक महापुरुषों के साथ गांधीजी असहमतियां रखते थे।

गीता प्रेस का संकल्प देखिए कि उसने आज तक किसी से अनुदान प्राप्त नहीं किया। इसी संकल्प को बनाए रखते हुए गीता प्रेस के प्रबंधकों ने ‘गांधी शांति पुरस्कार-2021’ को तो स्वीकार किया लेकिन पुरस्कार में मिलने वाली एक करोड़ रुपये की राशि को स्वीकार करने से मना कर दिया। एक करोड़ रुपये की राशि, बहुत बड़ी राशि है। गीता प्रेस का विरोध करने वाले गिरोह में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो अवार्ड वापसी समूह का हिस्सा रहे हैं। उस बनावटी अभियान में इन लोगों ने अवार्ड तो लौटाए थे लेकिन उसके साथ मिली राशि को आज तक नहीं लौटाया है।

Comment:

vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
Vaycasino Giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betasus giriş
betasus giriş
bahiscasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betcio giriş
betcio giriş
betcio giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betcio giriş
nakitbahis giriş
nakitbahis giriş
betnano giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
hiltonbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
restbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
betnano giriş