भारत के गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत करने वाली फिल्म के 28 अप्रैल को जारी होने के अवसर पर : ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ अर्थात भारत की गौरव गाथा को प्रकट करने वाली फिल्म

Screenshot_20230403_080611_Gallery

पोन्नियिन सेल्वन पार्ट – 1 की सफलता के पश्चात अब पोन्नियिन सेल्वन 2 ,28 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। भारत की गौरव गाथा को प्रस्तुत करने वाली यह मूवी निश्चित रूप से नई पीढ़ी को अपने अतीत के बारे में बहुत कुछ समझाने में सफल होगी। पार्ट – 1 के माध्यम से देश के लोगों को इतिहास की बहुत ही सटीक जानकारी मिल चुकी है। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह मूवी रिलीज हो रही है। इस फिल्म के निर्माताओं ने ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ के शानदार पोस्टर के साथ फिल्म के ट्रेलर को जारी करने का निर्णय लिया है।


पोन्नियिन सेल्वन प्रसिद्ध लेखक कल्कि कृष्णमूर्ति के इसी नाम के सुप्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है। ‘पोन्नियिन सेल्वन’ (Ponniyin Selvan) 30 सितंबर 2022 रिलीज हुई थी। इंडियन बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने 250 करोड़ से अधिक की कमाई की थी।
वास्तव में जब हमारे देश की फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग देश की युवा पीढ़ी को सुधारने के दृष्टिकोण से कोई भी इस प्रकार का कार्य करते हैं तो बड़ी आत्मिक प्रसन्नता होती है। यह सच है कि फिल्म निर्माण का उद्देश्य भी यही है कि कोई ऐसा महत्वपूर्ण संदेश देश के लोगों के लिए और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए जाना चाहिए जिससे उन्हें प्रेरणा मिले और उन्हें सार्थक जीवन जीने के लिए सकारात्मक संदेश प्राप्त हो।
इस फिल्म के माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी समझ पाएगी कि किस प्रकार चोल राजवंश ने मां भारती की अनुपम सेवा करते हुए भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान की थी ? इस वंश के संस्थापक विजयालय नामक राजा ने 850 ई0 में जिस राजवंश की स्थापना की उसने भारत के इतिहास को 300 वर्ष तक प्रभावित किया।
जब उत्तर भारत में 712 ई0 में मोहम्मद बिन कासिम एक आक्रमणकारी के रूप में भीतर तक आने में सफल हो गया था तब जहां उत्तर भारत में उस समय बड़ी तेज राजनीतिक गतिविधियां चलीं और देश को विदेशी आक्रमणकारियों से बचाने के लिए नए-नए गठबंधन और राजनीतिक शक्तियों का उदय हुआ, उसी प्रकार दक्षिण में भी देश के सम्मान को बढ़ाने के लिए छठी सातवीं शताब्दी के बीच इस शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ। उत्तर भारत में जहां कश्मीर का कर्कोटक राज्य महत्वपूर्ण कार्य कर रहा था, वहीं चित्तौड़ के राणा वंश के संस्थापक बप्पा रावल और प्रतिहार वंश के नागभट्ट प्रथम और उनके पश्चात उनके अन्य उत्तराधिकारी देश के सम्मान को बढ़ा रहे थे, वहीं सुदूर दक्षिण का यह चोल साम्राज्य एक से बढ़कर एक प्रतापी शासक देकर देश का सम्मान बढ़ा रहा था। इसी वंश में राजेंद्र चोल प्रथम हुए।
राजेंद्र चोल प्रथम और उनके वंश के प्रतापी शासकों ने देश का सम्मान बढ़ाते हुए 3600000 वर्ग किलोमीटर का विशाल साम्राज्य स्थापित किया। यदि थोड़ी देर के लिए मुगल साम्राज्य के औरंगजेब कालीन साम्राज्य विस्तार को छोड़ दें तो किसी भी विदेशी आक्रमणकारी का भारत के इतने बड़े क्षेत्र पर शासन स्थापित नहीं हुआ था। इस राजवंश ने श्रीलंका, मालदीव, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो कंबोडिया, आज का बांग्लादेश , बर्मा इसके अतिरिक्त आज के कर्नाटक, उड़ीसा, प0 बंगाल , बांग्लादेश, इंडोनेशिया पर अपना विशाल साम्राज्य स्थापित किया था। इन सभी बाहरी देशों में आज भी भारतीय संस्कृति के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं। इन प्रमाणों से भी पता चलता है कि यहां पर कभी हमारे प्रतापी शासकों का शासन रहा है। कंबोडिया में स्थित अंकोरवाट के 16,26000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैले हुए विशाल मंदिर का निर्माण भी इसी काल में हुआ था । जिसे वहां के हिंदू राजा सूर्यवर्मन ने 1112 से 1153 ईसवी के बीच बनवाया था। इस मंदिर में भारत की वैदिक संस्कृति के स्पष्ट प्रमाण आज भी मिलते हैं। राजा जय वर्मा तृतीय ने कंबोडिया में अंकोरथोम को अपनी राजधानी बनाया था। जिसका निर्माण 40 वर्ष में 860 ईसवी से 900 ईसवी के बीच हुआ था। इसी राजा ने विष्णु मंदिर बनवाया था। जिसमें महाभारत, रामायण, वेद, उपनिषद व पुराणों का अध्ययन अध्यापन होता था।
राजेंद्र चोल ने उत्तर भारत में बंगाल और आज के बांग्लादेश तक अपना कब्जा किया था। उसने 1023 से 1027 ई0 के मध्य एक विशेष सैन्य अभियान चलाया था। जिसके माध्यम से वह सुदूर दक्षिण से चलकर 2000 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए गंगा तट पर आया था। जहां से गंगाजल लेकर वह अपनी राजधानी तंजावुर लौटा था। इस जल से उसने अपनी नई राजधानी का शिलान्यास किया था। अपनी नई राजधानी का नाम भी उसने गंगईकोंड चोलापुरम गंगा के नाम पर ही रखा था।
जब राजा इस विशेष अभियान पर था तो देश के अनेक राजाओं ने उसका वैसे ही स्वागत किया था, जैसे कोई अपने भाई का स्वागत करता है। कई राजाओं को राजेंद्र चोल प्रथम की विशाल सेना ने परास्त भी किया था। एक राजा अपनी बड़ी सेना के साथ ऐसे अभियान पर निकले और दूसरे राजा उसका स्वागत करें इससे हमारे सांस्कृतिक समन्वय और संबंधों की जानकारी होती है। जब राजेंद्र चोल अपने मित्र राजा भोज के साम्राज्य से निकल रहे थे तब राजा भोज और राजेंद्र चोल की संयुक्त शक्ति के भय से 60 किलोमीटर दूर कालिंजर में खड़ा महमूद गजनबी अपनी सेना लेकर वापस भाग गया था। उसे डर था कि ये दोनों ही उसका कचूमर निकाल सकते हैं।
हमें इतिहास के इस उजाले पक्ष से परिचित नहीं कराया गया कि राजाओं ने किस प्रकार संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन करते हुए और देश के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करते हुए कार्य किया ? हमें इस प्रकार इतिहास पढ़ाया गया है कि जब एक राजा किसी विदेशी आक्रमणकारी से जूझ रहा था तो दूसरे सभी राजा निरपेक्ष भाव से उसे देख रहे थे। यद्यपि ऐसी घटनाएं भी हुईं कि जब एक राजा किसी विदेशी आक्रमणकारी से लड़ रहा था तो कई राजा निरपेक्ष बने रहे, पर हमेशा ऐसा नहीं हुआ। ऐसे भी अनेक अवसर आए जब हमारे राजाओं ने संयुक्त सेना बनाकर अथवा राष्ट्रीय मोर्चा बनाकर विदेशी आक्रमणकारी को मैदान से भगाया। महत्वपूर्ण यही है कि हमें अपने राजाओं के इस प्रकार के पुरुषार्थ, पराक्रम और शौर्य से भी परिचित कराया जाए। जब उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों को अपने संयुक्त बल से भगाने में सफलता प्राप्त की।
इस फिल्म से हमारे देश के लोगों को इस प्रकार की कई गौरवपूर्ण घटनाओं की जानकारी होगी । जिनसे पता चलेगा कि हमारे चोल शासकों के पास कितनी विशाल जलसेना थी। लड़ाकू जहाज थे और उनके शासन में किस प्रकार चुनाव करवाने का पूरा एक तंत्र स्थापित था ? उनके शासन पर यदि सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाए तो जो आज की प्रशासनिक व्यवस्था है वह सारी की सारी इसी राजवंश से ली गई दिखाई देती है। चोल साम्राज्य में जजिया कर जैसा कोई टैक्स नहीं था। उस समय कुछ गांव ऐसे चिन्हित किए गए थे जिनसे टैक्स लिया जाता था और उसे जन कल्याण पर खर्च किया जाता था। जबकि कुछ गांव ऐसे होते थे जिनमें शिक्षा केन्द्र अर्थात गुरुकुल आदि स्थापित होते थे। इन गांवों से टैक्स नहीं लिया जाता था और उनके आचार्य व शिक्षा देने वाले शिक्षकों पर सरकार किसी प्रकार का बोझ नहीं डालती थी। कुछ गांव ऐसे भी चिन्हित किए गए थे जिनसे टैक्स लेकर सीधे मंदिरों में दे दिया जाता था।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक भारत को समझो अभियान के राष्ट्रीय प्रणेता और जाने-माने इतिहासकार हैं।)

Comment:

maritbet giriş
maritbet giriş
betplay giriş
betplay giriş
timebet giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
nesinecasino giriş
roketbet giriş
betci giriş
betci giriş
roketbet giriş
nisanbet giriş
İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
piabellacasino giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betplay
timebet giriş
timebet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
grandpashabet
grandpashabet
nitrobahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
betorder giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betorder giriş
casival
casival
vaycasino
vaycasino
betorder giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
meybet giriş
betorder giriş
betorder giriş
meybet
meybet
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
casival
casival
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
wojobet
wojobet
betpipo
betpipo
betpipo
betpipo
Hitbet giriş
nisanbet giriş
bahisfair
bahisfair
timebet giriş
timebet giriş
yakabet giriş
yakabet giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betci giriş
betci giriş
betgaranti giriş
bahisfair giriş
bahisfair giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bahisfair
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betpark
betpark
hitbet giriş
nitrobahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
casibom
casibom
casibom giriş
casibom giriş
casibom
casibom
hititbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
yakabet giriş
bahisfair giriş
bahisfair
betnano giriş
betorder giriş
betorder giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
timebet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
mariobet giriş
maritbet giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
kolaybet giriş
betpark
betpark
vaycasino
vaycasino
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
casibom giriş
betplay giriş
betplay giriş
roketbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş