Categories
भारतीय संस्कृति

ब्रह्म कुमारी मत का सच , भाग -4

डॉ डी के गर्ग

11 ब्रह्माकुमारों के काले-कारनामे-
बलात्कार व जबरन गर्भपात
छतरपुर, जिला भोपाल (म.प्र.) की एक 26 वर्षीय दलित महिला ने ब्रह्माकुमारीयों का अड्डा सिंगरौली और भोपाल में ब्रह्माकुमारों द्वारा बलात्कार करने तथा गर्भ ठहर जाने पर जबरन गर्भपात करा देने का आरोप लगाया। महिला ने बताया 17 साल की उम्र में तलाक होने के बाद 2001 में वह शांति पाने के लिए छतरपुर स्थित ब्रह्माकुमारी अड्डे में आयी जहां से उसे भोपाल भेज दिया गया। एस.पी. को लिखित शिकायती आवेदन में महिला ने कहा कि सिंगरौली और भोपाल के ब्रह्माकुमारीयों के अलग-अलग अड्डो में युवकों द्वारा बलात्कार किया गया। (देशबन्धु, 15 दिसम्बर 2013)
ब्रह्माकुमारियों का नयनयोग:
लेखराज द्वारा दृष्टिदान अर्थात् नयन योग (एक दूसरे के आखों में आखें डालकर त्राटक करना) शुरु किया गया था। अब वही नयन योग ब्रह्माकुमारियाँ करती हैं। अपने यहां आने वाले युवकों से आंख लड़ाती हैं काजल लगाकर। ब्रह्माकुमारीयों का पाखण्ड तेजी से फैल रहा है। ये प्रत्येक समाज के लिए विषघातक हैं। इनके अड्डेे धूर्तता, पाखण्ड, व्यभिचार प्रचार के केन्द्र हैं। सभी को चाहिए कि इन अड्डों पर अपनी बहू-बेटियों को न जाने दें।
सेक्स व व्यभिचार का अड्डा बना ब्रह्माकुमारी ध्यान-योग केन्द्र
पुलिस के मुताबिक ‘ब्रह्माकुमारी ध्यान योग केन्द्र‘ ट्राँस यमुना कॉलोनी आगरा, व्यभिचार एवं अय्याशी का अड्डा है, न कि ध्यान केंद्र। केन्द्र पर रहने वाले हरि भाई से सेविका भारती के अवैध संबंध ऐसे थे। पूरा केंद्र ही व्यभिचार का अड्डा बना हुआ था। भारती चाहती थी कि हरिभाई उससे शादी कर ले लेकिन वह तैयार नहीं हुआ। इस पर भारती ने हरिभाई की पोल खोलने की धमकी दी। जब भारती को यह पता चला कि हरिभाई उसे सिर्फ मौजमस्ती का साधन समझता है तो वह काफी उत्तेजित हो उठी थी। उसने बड़ा हंगामा मचाया। इसी के बाद वकील की सलाह से उसे ठिकाने लगाने की योजना तैयार की गई। 27 दिसम्बर 2003 की रात को हरिभाई भारती के साथ जिस कमरे में हमबिस्तर होता था, उसी कमरे में भारती को बेहद क्रूर तरीके से और अत्यन्त रहस्यमय परिस्थितियों में जिंदा जलाकर मार दिया गया। उसकी लाश को उसी रात फरह (मथुरा) पुल के नीचे फेंक दिया गया। (नवभारत टाइम्स 18 जनवरी 2004, पल-पल इडिया 14 दिसम्वर, 2013)
जनता की आवाजः
वास्तव में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ना तो कोई विश्वविद्यालय है और ना ही कोई धर्म, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक झूठ, फरेब से काम करने वाला अधार्मिक एवं गैरकानूनी काम करने वाले लोगों का संगठन है। – डॉ. सुरेंद्रसिंह नेगी (अधिकारी, सीमा सुरक्षा बल)
लेखराज की करतूतों को छुपाने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया गया है। वह धर्म के बारे में कुछ भी नहीं जानता और ना ही किसी धर्म का उसने कभी पालन किया है । – लोबो और कालुमल (न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय हैदराबाद)
ब्रह्माकुमारियों को साक्षात् विषकन्या समझना चाहिए। ये हिन्दू-सभ्यता, इतिहास, शास्त्र, धर्म एवं सदाचार सभी की शत्रु हैं। इनके अड्डे दुराचार प्रचार के केन्द्र होते हैं । – डा. श्रीराम आर्य (लेखक व महान विचारक)
ब्रह्माकुमारियाँ शब्दाडम्बर में हिन्दू जनता को फँसाने के लिए गीता का नाम लेकर अनेक प्रकार के भ्रम मूलक विचार बड़ी चालाकी से फैलाने का यत्न करती हैं। – श्री रामगोपाल शालवाले (लेखक व वरिष्ट आर्य समाजी)
ब्रह्मकुमारी वालो से प्रश्नः
१.सब वेदादि शास्त्रों व करोडों ऋषि मुनियों ने परमात्मा को सर्वव्यापक माना है परन्तु आप उसे एकदेशी बिन्दू रुप क्यों मानते हैं ?
इस मत के ठेकेदारो ने बिना वेद उपनिषद का अध्ययन किए ये झूट दावा किया है अन्यथा ये भ्रमित नहीं होते।
2.पशु पक्षियों पुरुष व स्त्रियों की आत्मायें अलग अलग हैं और सदा उसी योनि में जन्म लेती हैं- इसका क्या प्रमाण है?
3 सब शास्त्रानुसार कलियुग ४३२०००,द्वापरयुग ८६४०००,त्रेतायुग १२९६००० वर्ष सतयुग १७२८००० वर्ष होता परन्तु आप इन सब का काल ५००० वर्ष किस आधार पर मानते हैं ?संगम युग की कल्पना किस आधार पर की है?
4.सृष्टि का कर्ता धर्ता हर्ता ईश्वर है और आप यह किस आधार पर कहते हैं कि यह अपने आप बनी है कोई इसको बनाने वाला नहीं ?
5.दादा लेखराम की मुरली को ही यथार्थ गीता कैसे कहते हैं उनके मृत्यु के पश्चात हर रोज उनका संदेश मुरली के रुप में कैसे आ सकता है ? उनको शिव का अवतार कृष्ण का अवतार सिद्ध करने का प्रयास कहां तक उचित है ?
6.ईश्वरीय वाणी वेद का, यज्ञ का,पतंजलि अष्टांग योग का नाम तक नहीं लेते..हमने आपके परिसर में दैनिक यज्ञ करना चाहा परन्तु आपके प्रबन्धकों ने हमें यज्ञ करने से मना कर दिया…ऐसा क्यों ?
7.आप द्वारा स्थान स्थान पर लगाई जा रही चित्र प्रदर्शनीयों में दिखाये जा रहे चित्र लोगों को सृष्टि काल आदि के बारे में भ्रमित करने वाले हैं..ऐसा वेदविरुद्ध प्रचार करना कहां तक उचित है ?
8.ईश्वर, जीव ,प्रकृति, सृष्टि, योग, मोक्ष…आदि के बारे में आपकी सब मान्यतायें काल्पनिक हैं वेदविरुद्ध हैं.क्या आप या आपके गुरु दादा लेखराम जी वेदों से व करोडों ऋषि मुनियों से भी अधिक बुद्धिमान है?
9 जब दादा लेखराज पवित्र थे ,ईश्वर के दूत थे तो उनकी समय से पूर्व बीमारी उनकी मृत्यु क्यों हुई ,मृत्यु के तुरंत बाद उनकी नासिका में रुई क्यों लगायी, शरीर को सड़न से बचाने के लिए बर्फ पर क्यों रखा ?
10.सृष्टि को वैश्यालय बताने वाला ब्रह्मकुमारियो का दादा सिन्धी इस वैश्यालय पर करने क्या आया था ? और ब्रम्हकुमारी कौन ?
लेखराज महिलाओं से बोलता है ,अपने पति के साथ भाई बहन की तरह रहो. कुंवारी लड़कियो को बोलते है शादी मत करो बाबा की ब्रह्मकुमारी बनो ,बाबा तुमको स्वर्गलोक मे ले जायेंगे. अधिकांश अविवाहित कन्यायें महिलायें वहां ब्रह्मचारणियों के रुप में नहीं अपितु बन्धक के रुप में रह रही हैं ,सुना है उनकी धन सम्पत्ति भी आश्रम के नाम पर पहले ही करवा ली जाती है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş