बाबा बागेश्वर सरकार पर आखिर इतना हंगामा क्यों है?

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नवीन कुमार पाण्डेय

बागेश्वर महाराज पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर मीडिया कैमरों का फोकस हो गया है। हंगामा मचा है- बागेश्वर धाम में आस्था के नाम पर अंधेरगर्दी हो रही है। एक और बाबा सीधे-सादे लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। टीवी चैनल बागेश्वर धाम को लेकर विशेष कार्यक्रमों की महफिल सजा रहे हैं। वहां कथित विशेषज्ञों की फौज अपने विचारों के गोले दाग रहे हैं। कोई बाबा के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करवाना चाहता है, बुल्डोजर चलवार बागेश्वर धाम को तहस-नहस करने की जरूरत बता रहा है तो कोई बचाव में ऐसे-ऐसे दावे कर रहा है जैसे उसे भी ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो और बाबा की हर हकीकत से सौ फीसदी वाकिफ हो। विचारों के दो ध्रुवों के बीच बागेश्वर महाराज और उनके आचार-व्यवहार की वैचारिक चीर-फाड़ चल रही है।

आखिर बाबा पर विवाद क्यों छिड़ा है? वो ऐसा क्या करते हैं, क्या कहते हैं कि मीडिया की नजरों में आ गए हैं? या मामला कथनी या करनी का नहीं, कुछ और है? बाबा धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं- मैं संत नहीं हूं। मैं कोई चमत्कार नहीं करता। मुझे चमत्कारी कहने वाले मूर्ख हैं। मैं चमत्कार कर ही नहीं कर सकता। जो भी है, वो बागेश्वर बाबा का है- उन्हीं का आशीर्वाद, उन्हीं का चमत्कार। वो भक्तों से कहते हैं- आस्था हो तो आओ, मैं किसी को बुलाता नहीं हूं। इन बातों की पुष्टि आप भी कर सकते हैं। बागेश्वर धाम के यूट्यूब चैनल पर वीडियोज पड़े हैं।

मैंने कुछ वीडियोज देखे हैं। सबमें देखा कि बाबा पास में कागज-कलम रखते हैं। भक्त समस्या लेकर बाबा के पास जाते हैं। बाबा उन्हें अपने पास बिठाते हैं। कई बार बाबा सामने बैठे भक्त से बिना कुछ पूछे कुछ लिखने लगते हैं। फिर पूछते हैं- बताओ, क्यों आए? क्या समस्या है? भक्त कुछ बताता है तो बीच में ही टोककर थोड़ी देर पहले लिखा हुआ कागज बढ़ा देते हैं। कहते हैं- पढ़ो और सबको बताओ कि जो सोचकर आए, वही इस कागज पर लिखा है या नहीं? भक्त अपनी बात रखते हैं। कोई-कोई अपने मन की पूरी बात बताने लगते हैं। कोई बाबा के चरणों में लेटने लगता है। कहता है- बाबा बिल्कुल यही समस्या है जो आपने लिखा। फिर भीड़ से जयकारे लगने लगते हैं।

एक वीडियो में बाबा को कहते सुना- आओ, तुम्हारे मन में संदेह है। तुम पत्रकार हो। मेरा भेद खोलने आए हो। कथित पत्रकार कहता है- हां, आया तो सवाल और संदेह के साथ ही। लेकिन अब कोई संदेह नहीं रहा। पत्रकार बोलता है- मैं खुद हनुमान का भक्त हूं। फिर वो बताता है कि वो मुश्किल वक्त में भी हर सप्ताह मंदिर जाता है। एक अन्य वीडियो में बाबा भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति से कहते हैं- तुमको मुझ पर संदे है। अब यहां आ गए तो मेरी परीक्षा ले ही लो। बाबा उस व्यक्ति से कहते हैं कि हजारों की भीड़ में जहां से मर्जी हो, अपनी इच्छा से किसी भी व्यक्ति को मेरे पास लेकर आओ। एक पुलिस वाली बुलाई जाती है। फिर वही चमत्कार होता है और सवाल गौन।

26 वर्ष के पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक वीडियो में अपने बचपन की कहानियां सुनाते हैं। सामने उनके लंगोटिया यार डॉ. शेख मुबारक बैठे हैं। बाबा अपने मित्र की तारीफें करते नहीं थकते। अपनी यारी की कहानियां सुनाते हैं, मित्र शेख मुबारक की दरियादिली और उनके साथ बिताए कष्टों से भरे बचपन की बातें बताते हैं। फिर कहते हैं- भगवान, ऐसा पागल दोस्त सबको दे। वो कहते हैं- ऐसा पागल दोस्त सबको नहीं, नसीब वालों को ही मिलता है। जब-जब कैमरा डॉ. शेख मुबारक की तरफ जाता है, वो हाथ जोड़ते दिखते हैं। डॉक्टर साहब के चेहरे से भोलापन साफ झलकता है।

बात मुस्लिम दोस्त की हुई तो मुस्लिम भक्तों की भी हो जाए। मैंने कुछ वीडियोज में मुस्लिम भक्तों को भी देखा है। एक बच्चा तो महज 8-10 साल का है। उसके पिता बाबा से कहते हैं- बाबा! इसने मेरी नाक में दम कर रखा था- बाबा के पास ले चलो, बाबा के पास ले चलो। बाबा उस बच्चे और उसके पिता से कुछ बातचीत करते हैं और बच्चे को आशीर्वाद देते हैं। एक वीडियो में बाबा बताते हैं कि वो यूके गए और वहां की संसद में उनका दरबार लगा। कई गणमान्य अंग्रेज भी उनके भक्त बन गए।

आप भी कुछ वीडियोज देखेंगे तो पता लगने में देर नहीं होगी कि बाबा के दरबार में अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक स्तर के लोग होते हैं। पिछड़े से संपन्न तक, सब बाबा के पास आते हैं। अनपढ़ से लेकर बढ़िया पढ़े-लिखे महिला-पुरुषों से बाबा का दरबार सजता है। इसलिए अब तक मेरी यह राय नहीं बनी कि बाबा लोगों की गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन क्या, बाबा की बातें उस स्तर की होती हैं जिन्हें काफी वैज्ञानिक और तार्किक माना जा सकता है? यहीं बात आस्था की आ जाती है। आस्था में कहां वैज्ञानिकता और कहां तार्किकता!

मुझे बाबा की कई बातें हल्की और अतार्किक जान पड़ीं। कई बार बाबा मानव कल्याण के विशाल दायरे से हिंदू जागरण की संकुचित सीमा में सिमटते दिखते हैं। वो खुलेआम कहते हैं- हिंदुओं को जगाना है, मैंने ठान रखी है- हिंदुओं के धर्मांतरण को रोकना है। उन्हें अच्छे से पता है कि मीडिया में उनकी खूब चर्चा हो रही है और विवाद पैदा हो रहे हैं। वो कहते हैं- मैं सही हूं और हिंदू जागरण के लिए जो त्याग करना होगा, करूंगा।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ संभवतः अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की। उन पर फर्जीवाड़े का आरोप नहीं लगा है। किसी से ठगी की बात सामने नहीं आई है। दैदिप्यमान चेहरे पर मुस्कान लिए 26 वर्षीय ये बाबा अब तक यौन शोषण या इसकी कोशिश के आरोप से भी बिल्कुल मुक्त हैं। फिर मीडिया में हंगामा क्यों? संभव है आपके मन में भी यह सवाल कौंध रहा हो।

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