मणिशंकर अय्यर ने दिया कांग्रेस को बड़ा झटका

मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस के लिए गुजरात में बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। उन्होंने भाजपा के स्टार प्रचारक और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का प्रयोग करके स्पष्ट किया है कि उनके पास शब्दों की दरिद्रता है और वे प्रधानमंत्री के विरूद्घ घृणा से भरे हैं। वास्तव में लोकतंत्र एक ऐसी पवित्र शासन प्रणाली है जो अपने विरोधी को आप पर आक्रमण करने की छूट देती है और उस आक्रमण को आप हंसते हुए परंतु सावधान होकर झेलें और फिर संभलकर विरोधी पर जबरदस्त प्रहार करें यह अपेक्षा आपसे की जाती है। लोकतंत्र विचारों को बहने देना चाहता है और उन्हें उस ऊंचाई पर पहुंचाना चाहता है जहां जाकर लड़ाई भी मित्रतापूर्ण हो जाए। लड़ाई में भी घृणा न रहे-विरोधी भी अपना सा लगे और व्यक्ति विरोधी को भी यह आभास कराने में सफल हो जाए कि मतभेदों के उपरान्त भी मैं आपका शुभचिंतक हूं। ऐसी सोच को अपनाना और उसे विकसित करना ही लोकतंत्र को मजबूत करना होता है।
मणिशंकर अय्यर जैसे लोग कांग्रेस की कमजोरी हैं और ये कांग्रेस की उस कमजोरी का परिणाम हैं जिसके चलते कांग्रेस ने दमदार नेताओं को आगे बढ़ाने के स्थान पर आधारहीन, रीढ़विहीन, चाटुकार लोगों को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता देनी आरम्भ की थी। यदि इन लोगों को कांग्रेस अपना इतिहास भी पढ़ाये तो भी इनको लोकतंत्र के विषय में बहुत कुछ समझ आ सकता है। बात नेहरूजी के काल की है। डा. राममनोहर लोहिया नेहरूजी की नीतियों पर संसद में जमकर प्रहार किया करते थे और नेहरूजी उन प्रहारों को शान्तमना झेला करते थे। वहीं से भारत में मजबूत लोकतंत्र की नींव रखी गयी थी। एक बार राममनोहर लोहिया नेहरूजी पर इतना बिगड़ गये थे कि दर्शक दीर्घा में बैठे एक पत्रकार को तो ऐसा लगा था कि आज दोनों में हाथापाई भी संभव है। तभी भोजनावकाश हो गया। भोजनावकाश होते ही नेहरू जी लोहिया जी की ओर लपके। प्रत्यक्षदर्शी पत्रकार महोदय लिखते हैं कि नेहरू जिस प्रकार लोहिया की ओर लपके थे उससे उन्हें ऐसा लगा कि अब उनकी आशंका सच में बदलने ही वाली है। पर वह सुखद आश्चर्य में डूब गये थे-जब नेहरूजी ने लोहिया जी के पास आकर उनका कोट पकडक़र कहा कि ‘लोहिया लड़ाई तो खूब लड़ ली, पर चल अब कुछ खिला पिला दे।’ इस पर राजनीति के उस तपे हुए सच्चे समाजवादी ने अपने कोट में से अठन्नी निकालकर उसे नेहरू की ओर बढ़ाते हुए कहा कि-”यार, नेहरू आज तो जेब में यही अठन्नी है।” केवल अठन्नी को देखकर नेहरूजी भी आश्चर्यचकित रह गये थे। बहस पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर चल रही थी। तब नेहरूजी ने कहा था कि यदि लोहिया तेरी जेब में केवल अठन्नी है तो तेरी बात में लोगों का दर्द है, जिसे मुझे मानना ही चाहिए।
मणिशंकर अय्यर को अपनी ही पार्टी के नेता पं. नेहरू जी का वह वाकया भी याद रखना चाहिए जब उन्होंने संसद में अपनी ही सरकार की नीतियों की बखिया उधेडऩे वाले एक नवयुवक की पीठ थपथपाते हुए यह कहा था कि वह नौजवान अवश्य ही एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा और यह नवयुवक अटल बिहारी वाजपेयी थे, जो एक दिन देश के प्रधानमंत्री बने। मणिशंकर अय्यर को पता होना चाहिए कि यह लोकतंत्र खून पसीने से सींचा गया पौधा है। जिसमेें उनके अपने नेताओं का भी योगदान है। साथ ही उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जब वाणी का संयम समाप्त होता है और जब लोकतंत्र का गला घोंटा जाता है तो महाभयंकर विनाश होता है। कांग्रेस की वर्तमान दुर्दशा का कारण यही है कि उसने इस प्रवृत्ति को अपनाया और एक परिवार की चरण वंदना से अलग उसे कुछ भी दिखायी नहीं दिया। उसने बापू को जो कुछ वचन दिया था उसे उसने निभाया नहीं। बापू ने बोला था कि कांग्रेस को अब भंग कर दो। तब कांग्रेस के नेताओं ने 1947 में बापू को बोला था कि कांग्रेस पहले से भी बेहतर काम करेगी, इसलिए भंग मत कराओ। अटलजी ने लिखा है-
क्षमा करो बापू! तुम हमको, वचन भंग के हम अपराधी।
राजघाट को किया अपावन, मंजिल भूले यात्रा आधी।।
मणिशंकर अय्यर जैसे लोग हैं जो मंजिल भूले हुए और जिनकी यात्रा आधी है। प्रधानमंत्री मोदी को ‘नीच’ शब्द कहने पर कांग्रेस ने गुजरात में क्षतिपूत्र्ति करने के उद्देश्य से श्री मणिशंकर अय्यर को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पर श्री मोदी ने गुजरात की जनता की अदालत में अपनी अपील कर दी है उसे बता दिया है कि कांग्रेस के लोगों की ऐसी भाषा गुजरात का अपमान है। भारत की महान परम्परा का अपमान है। ये मुगलई मानसिकता है। ऊंच नीच का संस्कार भारत में नहीं है। मोदी ने कहा है कि कांग्रेसी नेताओं ने उन्हें गधा, नीच, नीची जाति वाला, गन्दी नाली का कीड़ा तक कहा। ऐसा लगता है कि कांग्रेस के महारथी मानसिक संतुलन खो चुके हैं। मुगलकालीन मानसिकता वाले ये लोग पहले गांव में दलितों को घोड़ी नहीं चढऩे देते थे, कोई अच्छे कपड़े पहनकर बाजार निकल जाए तो इनको अच्छा नहीं लगता था। हमने संस्कारों को नही छोड़ा लेकिन इन लोगों ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं।
गुजरात की जनता की अदालत में की गयी इस अपील का परिणाम तो 18 दिसंबर को पता चलेगा-पर मोदी जी ने जिस राजनीतिक चातुर्य के साथ कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर के अपशब्दों को इस समय जनता के सामने परोसा है उससे कांग्रेस की परेशानी बढ़ गयी है। पार्टी इससे बड़ा झटका लगना तय मान रही है। चुनाव के बारे में वह जानती है कि यह वह प्रदेश है जहां प्रधानमंत्री स्वयं लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे हैं और जिसने उनका निर्माण कर देश को सौंपा है। गुजरात की जनता अपने नेता को अभी प्रधानमंत्री देखना चाहती है-अत: वहां कांग्रेस को चुनाव जीतने से पहले ही पसीना आ रहा था….पर फिर भी राहुल गांधी बड़े सधे कदमों से विरोधी का सामना कर रहे थे, जिसे अब मणिशंकर अय्यर ने बिगाड़ दिया है? ऐसे लोगों पर निश्चय ही कठोर कार्यवाही करने का समय है। सचमुच देश में राजनीतिक आचार संहिता तैयार कर उसे कड़ाई से पालन कराने की आवश्यकता है। लगता है मणिशंकर अय्यर ने भाजपा का काम आसान कर दिया है।

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