Categories
आर्थिकी/व्यापार

आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में वस्तुओं के आयात के मामले में एक बार पुनः भारत की निर्भरता चीन पर बढ़ी है। हालांकि पिछले 3 साल के दौरान भारत के चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे परंतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में चीन एवं भारत के बीच 11,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 8,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में कहीं अधिक है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े यह अच्छी बात हो सकती है परंतु चिंता का विषय यह है कि चीन से भारत में आयात बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और भारत से चीन को निर्यात उस गति से नहीं बढ़ पा रहे है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत में चीन से आयात 9,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6,530 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा था। वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम दो माह में भी स्थिति संभलने के स्थान और अधिक बिगड़ी ही है, अर्थात इस दौरान चीन को भारत से निर्यात 31 प्रतिशत से घटा है और भारत में चीन से आयात 12.75 प्रतिशत बढ़ गया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के कुल व्यापारिक आयात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

कोरोना महामारी के बाद भारत में चूंकि आर्थिक विकास बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है अतः कई वस्तुओं का आयात चीन से बहुत भारी मात्रा में किया जा रहा है। परंतु चीन अभी भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है और चीन के कुछ प्रांतों में अभी भी लाक्डाउन लगाया जा रहा है अतः चीन में आर्थिक गतिविधियों में कमी आई है जिसके चलते भारत से चीन को निर्यात कम होता जा रहा है।

कुछ समय पूर्व की गई एक रिसर्च के अनुसार, भारत चीन से कुल 6,367 उत्पादों का आयात कर रहा था। जिनका मूल्य 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर (कुल आयात का 15.3 प्रतिशत भाग) था। कई मदों में तो भारत कुल आयात का एक बड़ा भाग चीन से आयात कर रहा था। 893 उत्पादों का तो 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत भाग (759 करोड़ अमेरिकी डॉलर) चीन से आयात किया जा रहा था। इसी प्रकार 364 उत्पादों का 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत भाग (549 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 386 उत्पादों का 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत भाग (909 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 428 उत्पादों का 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत भाग (656 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 476 उत्पादों का 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत भाग (972 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 461 उत्पादों का 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत भाग (914 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 550 उत्पादों का 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत भाग (890 करोड़ अमेरिकी डॉलर) एवं 706 उत्पादों का 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत भाग (524 करोड़ अमेरिकी डॉलर) चीन से आयात किया जा रहा था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट रूप से झलकता है कि इन उत्पादों के आयात के मामले में भारत की चीन पर जरूरत से अधिक निर्भरता हो गई है।

उक्त परिस्थितियां निर्मित करने में दरअसल देश की जनता ही अधिक जवाबदार है, क्योंकि देश के नागरिक विदेशी उत्पादों के पीछे दीवानगी की हद्द तक भागते हैं। और फिर, चीन के निम्न स्तरीय उत्पाद तो बहुत सस्ते दामों पर ही उपलब्ध हो जाते हैं। देश के व्यापारी बंधुओं ने भी इन उत्पादों का चीन से भारी मात्रा में आयात कर देश की जनता को उपलब्ध कराने में अपनी अहम भूमिका अदा की। इससे इन उत्पादों का भारत में निर्माण बंद हो गया। जिसके परिणामस्वरूप देश में रोजगार के कई अवसर नष्ट हो गए एवं कई कुटीर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बंद हो गए। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत के कई सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं स्वदेशी जागरण मंच भी शामिल है ने चीन में निर्मित वस्तुओं के स्थान पर भारत में निर्मित वस्तुओं के उपयोग करने की मुहिम चलाई थी, जिसका अच्छा परिणाम भी दिखाई देने लगा था और इसके चलते वित्तीय वर्ष 2017-18 के बाद से चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे। जिसके परिणाम स्वरूप भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था वह वित्तीय वर्ष 2018-19 में घटकर 5,356 करोड़ अमेरिकी डॉलर का, वित्तीय वर्ष 2019-20 में घटकर 4,866 करोड़ अमेरिकी डॉलर का और वित्तीय वर्ष 2020-21 में और भी घटकर 4,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया था। परंतु, वित्तीय वर्ष 2021-22 में पुनः बढ़कर 7,290 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया है।

अब यह तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि भारत द्वारा चीन से आयात बढ़ने से चीन की आर्थिक सुदृढ़ता मजबूत हो रही है और वह भारत के बॉर्डर पर भारत को ही आंख दिखा रहा है। अतः भारत को इस सम्बंध में अब पुनः विचार करने की आवश्यकता है कि किस प्रकार चीन से आयात की जाने वाली वस्तुओं का उत्पादन भारत में ही बढ़ाया जाय एवं चीन से इन वस्तुओं के आयात कम किए जा सकें। भारत में निर्यात प्रतिस्पर्धी उद्योग स्थापित किए जाने की आज महती आवश्यकता है। हालांकि हाल ही के समय में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना इस सम्बंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। कुल मिलाकर इस सम्बंध में अब देश में गम्भीर प्रयास किए जाने की महती आवश्यकता है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक प्रतिवेदन के अनुसार भारत में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को लागू कर चीन से आयात को यदि 50 प्रतिशत से कम किया जा सके तो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 2,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वृद्धि की जा सकती है।

आज आवश्यकता इस बात की भी है कि भारतीय नागरिक भी अपनी सोच में गुणात्मक परिवर्तन लाएं एवं चीन के निम्न गुणवत्ता वाले सामान को केवल इसलिए नहीं खरीदें क्योंकि यह सस्ता है। इस प्रकार की सोच में आमूलचूल परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। भारत में निर्मित सामान, चाहे वह थोड़ा महंगा ही क्यों न हो, को ही उपयोग में लाया जाना चाहिए। ताकि भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ाया जा सके एवं रोजगार के अधिक से अधिक अवसर भारत में ही उत्पन्न होने लगें।

साथ ही, अब यदि भारत को आत्म निर्भर बनाने की स्थिति में लाना है तो हमें अपने मौलिक चिंतन में भी परिवर्तन करना होगा। आज यदि हम वैश्विक बाजारीकरण की मान्यताओं पर विश्वास करते हैं तो इस पर देश को पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है। चीन सहित अन्य देशों से हमें शुरुआती दौर में कम से कम उन वस्तुओं के आयात को बलपूर्वक रोकना चाहिए जिनका निर्माण हम भारत में ही आसानी से कर सकते हैं। इस बात पर भी अब चिंतन की आवश्यकता है कि चीन से हम किस हद्द तक के रिश्ते कायम रखें।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
pokerklas
pokerklas
vdcasino
pokerklas
pokerklas
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meybet
meybet
harbiwin giriş
betnano giriş
norabahis
favorisen giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
meybet
norabahis giriş
norabahis giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
maritbet giriş
maritbet
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet
hititbet
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
betnano giriş
betoffice giriş
betoffice giriş
hititbet
hititbet
betpark giriş
betpark
betpark
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
hititbet giriş
kavbet giriş
kavbet
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino
vdcasino
timebet giriş
meybet giriş
timebet giriş
meybet giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
kavbet giriş
kavbet giriş
betpark giriş
bettilt
norabahis giriş
norabahis
betnano giriş
betnano giriş
bettilt
norabahis giriş
norabahis giriş
bettilt
norabahis giriş
bettilt
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
grandpashabet giriş
ganobet giriş
ganobet giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
betoffice giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
betoffice giriş
betcio giriş
betcio giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş