*राष्ट्र-चिंतन* *ममता बनर्जी लगी मिमयाने/ मोदी का किया समर्थन*

*उछलने वाले भ्रष्ट, आरोपियों का हस्र राउत, नवाब जैसा*

*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
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बात-बात पर राजनीतिक तौर पर उछलने वाली और विवाद पैदा करने वाली ममता बनर्जी को भी अब होश आ गया है, वास्तविकता मालूम हो गयी है। पहले उसने संघ की प्रशंसा की और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन कर दिया। ममता बनर्जी ने कह दिया कि उनकी पार्टी के खिलाफ या किसी भी पार्टी के खिलाफ केन्द्रीय जांच एजेसियों की कार्यवाही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कोई हाथ नहीं है, यानी कि इस मामले में नरेन्द्र मोदी बदले की भावना के अरोपी नहीं है।
ऐसा कहने के लिए ममता बनर्जी बाध्य क्यों हुई? इसके पीछे क्या ममता बनर्जी को भी केन्द्रीय जांच एजेंसियो की जाल में फंसने का डर है? ऐसे सीधे तौर पर ममता बनर्जी के उपर भ्रष्टचार और कदाचार के आरोप नहीं हैं। लेकिन उनकी पार्टी भ्रष्टचार में डूबी हुई है, उनके साथ खड़े नेता भ्रष्टचार में डूबे हुए हैं। ममता बनर्जी के भतीजे और भतीजे की पत्नी के खिलाफ केन्द्रीय जांच एजेंसियों के पास सबूत भी है। ममता बनर्जी के भतीजे और उनकी पत्नी कभी भी जेल की हवा खा सकते हैं। ममता बनर्जी के एक मंत्री और उसकी कथित प्रेमिका के घर से मिले करोड़ों रूपये का भी मामला है। ममता बनर्जी के प्रथम काल के भ्रष्टाचार के मामले भी कोर्ट में चल रहे हैं,सीबीअई, ईडी जांच भी जारी है।
निश्चित तौर पर अपने भतीजे, अपनी पार्टी के नेताओं के भ्रष्टचार को लेकर ममता बनर्जी दबाव में है और उन्हें लग रहा है कि अगर भ्रष्टचार की जांच उन तक पहुंचेगी तो फिर परेशानी होगी। भाजपा इस पर कोई लाभ भले ही हासिल नहीं करे पर राज्य की कम्युनिस्ट पार्टियां और कांग्रेस लाभ उठा सकती है। इसके साथ ही साथ राज्य में विकास कार्य ठप है, विकास की योजनाओं के लिए पैसे नहीं है। इस कारण जनता की आकंाक्षा पूरी नहीं हो रही है। राज्य के विकास के लिए केन्द्रीय सहायता की जरूरत है। केन्द्रीय सरकार और ममता बनर्जी के बीच में संबंध कैसे हैं, यह सभी को मालूम है। केन्द्रीय सहायता तभी सुलभ होती है जब राज्य और केन्द्र के बीच संबंध मधुर होते हैं।
इसके अलावा ममता बनर्जी को कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों से भी खुन्नश है। एक समय वह स्वयं प्रधानमंत्री की उम्मीदवार थी और राष्टपति पद के चुनाव में खूब पैंतरेबाजी दिखायी थी। राष्टपति का अपना उम्मीदवार बनवाने में सफल हुई थी, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां भी ममता बनर्जी के साथ खडी हुई थी। लेकिन उपराष्टपति की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस ने ममता बनर्जी को गच्चा दे दिया और अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया, अन्य विपक्षी पार्टियां भी कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में खडी हो गयी। मजबूरी में ममता बनर्जी ने उप राष्टपति पद के चुनाव में अलग रहने की घोषणा की थी।
प्रधानमंत्री पद पर नीतीश कुमार के दावे को लेकर भी ममता बनर्जी को खुन्नश है। नीतीश कुमार से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से हुई मुलाकातों के बाद ममता बनर्जी गुस्से में है। कम्युनिस्ट पार्टियां भी नीतीश कुमार के सामर्थन में है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां ममता बनर्जी के खिलाफ आग उगलती रही है। नीतीश कुमार के कद बढ़ने से और नीतीश कुमार को विपक्ष ने प्रधानमंत्री का उम्मीदवार मान लिया तो फिर ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी की परेशानी बढेगी और उनके पश्चिम बंगाल के आधार पर कांग्रेस व कम्युनिस्ट पार्टियां सेंधमारी कर सकती हैं।
नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नवाब मलिक और संजय राउत खूब उछलते थे। नरेन्द्र मोदी की औकात को चुनौती देते थे। आज ये जेल में बंद है। दागदार, भ्रष्ट और अनैतिक लोग इस प्रकार से उछलते नहीं है और न ही चुनौती देते हैं। जो लोग इस लक्ष्मण रेखा को लांघते हैं उनका हस्र भी संजय राउत और नवाब मलिक जैसा ही होता है। इसलिए ममता बनर्जी चेती हुई है। यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी को क्लिन चीट ममता बनर्जी दे रही है। अरे ममता बनर्जी जी नरेन्द्र मोदी की लाठी, भ्रष्ट, अनैतिक और देशद्रोहियों पर जरूर चलती है पर उसमें आवाज नहीं आती है, समय का इंतजार कीजिये।

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*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
*नई दिल्ली*
*Date 21 sep 2022*
Mobile … 9315206123

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