मानसिक गुलामी के 164 साल

images (4)

2 अगस्त 1858 को हम भारतीय इंग्लैंड की रानी के गुलाम हुए। 15 अगस्त की ट्रांसफर ऑफ पावर को हम धूमधाम से मनाते हैं परन्तु 2 अगस्त की ट्रांसफर ऑफ पावर को हम भुला देना चाहते हैं। कही इस का कोई जिक्र ही नहीं होता। बस अंतर इतना है कि पहली में सत्ता भारतीयों से गोरे अंग्रेजों के हाथ में आई तो दूसरी में काले अंग्रेजों के हाथ में।
आज 164 साल बाद भी हम मानसिक गुलाम हैं। जो आज भी ब्रिटिश के गुण गाते हैं उन्हें शायद मेरी बात से कोई अन्तर न पड़े परन्तु जो स्वाभिमान रखते हैं वे जरूर सोचेंगे।
गुलामी की निशानियां

1 भारतीय पुलिस

भारतीय पुलिस आज भी 1861 के कानून से चलती है। जहाँ तक मुझे पता है कि तब संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर तो पैदा भी नहीं हुए थे। जब भी संविधान सुधार की बात करो तो कुछ लोग चिल्लाने लगते हैं कि बाबा साहब का संविधान बदल रहे हैं।

भारतीय पुलिस का चाल, चरित्र और अधिनायकवाद आज भी 150 साल पुराना ही है। हाथ में डंडा लेकर जनता को पशु की तरह हांकना आज भी जारी है। पुलिस और उसके रोजनामचे की भाषा देखिए गुलामी स्पष्ट नजर आएगी। जांच के अधिकांश कार्य वही पुराने ढर्रे पर होते हैं। पुलिसकर्मियों को सर्वाधिक भ्रष्ट माना जाता है। अपराध रोकने का एकमात्र तरीका शिकायत को न लिखना है।

भारत में औसत 1 लाख पर 136 पुलिस कर्मी हैं। परन्तु सच्चाई अलग है। इसमें 136 में से 36 तो राजनेताओं की सुरक्षा में ही लगे हैं। कुछ बड़े अधिकारियों के घर में पानी भरते हैं तो कुछ अधिकारियों के बॉडी गार्ड। बाकी की ड्यूटी के घण्टों का कुछ पता नहीं। कभी कभी तो 24 घण्टे की ड्यूटी। तमाशा देखिए। दिल्ली दंगों में हथियार बन्द गुंडों के आगे निहत्थे पुलिस वालों को भेज दिया। इस तरह देखें तो जांच और शांति व्यवस्था के लिए पुलिस बेहद कम है।

2 न्याय व्यवस्था

भारतीय उच्च न्यायालय व्यवस्था भी मूलतः 1861 के कानून पर आधारित है। यद्यपि कुछ सुधार हुए हैं परन्तु वह बेहद कम हैं। उच्च न्यायालय में बहस इंग्लिश में होती है जिसे न वादी समझता है और न ही प्रतिवादी। DTC के एक बस कंडक्टर को40 साल केस लड़ना पड़ा 5 पैसे (सही पढा 5 पैसे ) के गबन के लिए। राजस्थान के 1 भूतपूर्व राजा के हत्या के केस को 35 साल बाद न्याय मिला परन्तु आतंकी याकूब मेनन के लिए रात को 2 बजे सुप्रीम कोर्ट खुलता है और अर्बन नक्सली के लिए रात को 2 बजे हाईकोर्ट के जज के घर में कोर्ट लगती है। भारतीय जेलों में 33%कैदी सजा प्राप्त हैं तो 66% विचाराधीन। क्योंकि ये व्यवस्था हमें गुलाम बनाने के लिए बनाई गई थी।

3
भारतीय शिक्षा कानून 1858

प्रारंभिक शिक्षा में भी पिछले 150 साल में बहुत कम सुधार हुआ है। उसका कारण मानसिक गुलामी है। आज भी जब कुछ आधार भूत शिक्षा ढांचे में बदलाव की बात होती है तो शिक्षा के भगवाकरण का नाम देकर इसका विरोध किया जाता है।
4
गुलाम तन्त्र
आज भगत सिंह को आतंकवादी बोला जाता है और हम देखते रह जाते हैं।
हम आज भी कितने मानसिक गुलाम है इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि मीडिया आतंकी अफजल गुरु के बेटे का इंटरव्यू लेती है परन्तु तुकाराम अम्बोले की बेटी का नहीं दिखाती। कोई आतंकी गरीब हेडमास्टर का बेटा बताया जाता है तो दूसरा गणित का अध्यापक और तीसरा सेना से पीड़ित।

अब सिस्टम के निकम्मेपन का उदाहरण देखिए और मानसिक गुलामी तोड़िए।
देविका रोटवांन वही लड़की है जिसकी गवाही पे कसाब को फांसी हुई थी …..आपको बता दें की देविका मुंबई हमलों के दौरान महज 9 साल की थी ..उसने अपनी आँखों से कसाब को गोली चलाते देखा था ..लेकिन जब उसे सरकारी गवाह बनाया गया तो उसे पाकिस्तान से धमकी भरे फोन कॉल आने लगे …..देविका की जगह अगर कोई और होता तो वो गवाही नहीं देता ..लेकिन इस बहादुर लड़की ने ना सिर्फ कसाब के खिलाफ गवाही दी बल्कि सीना तान के बिना किसी सुरक्षा के मुंबई हमले के बाद भी 5 साल तक अपनी उसी झुग्गी झोपडी में रही …लेकिन इस देश भक्ति के बदले उसे क्या मिला ??….आपको बता दें की देविका रोटवान जब सरकारी गवाह बनने को राजी हो गयी तो उसके बाद उसे उसके स्कुल से निकाल दिया गया ..क्यों की स्कुल प्रशाशन का कहना था की आपकी लड़की को आतंकियों से धमकी मिलती है ..जिससे हमारे दूसरे स्टूडेंट्स को भी जान का खतरा पैदा हो सकता है ….देविका के रिश्तेदारों ने उससे दूरी बना ली ..क्यों की उन्हें पाकिस्तानी आतंकियों से डर लगता था जो लगातर देविका को धमकी देते थे ….देविका को सरकारी सम्मान जरूर मिला ..उसे हर उस समारोह में बुलाया जाता था जहाँ मुंबई हमले के वीरों और शहीदों को सम्मानित किया जाता था ..लेकिन देविका बताती है की सम्मान से पेट नहीं भरता …मकान मालिक उन्हें तंग करता है उसे लगता है की सरकार ने देविका के परिवार को सम्मान के तौर पे करोडो रूपये दिए हैं ..जबकि असलियत ये हैं की देविका को अपनी देशभक्ति की बहुत भरी कीमत चुकानी पड़ी है …देविका का परिवार देविका का नाम अपने घर में होने वाली किसी शादी के कार्ड पे नहीं लिखवाता ..क्यों की उन्हें डर है की इससे वर पक्ष शादी उनके घर में नहीं करेगा ..क्यों की देविका आतंकियों के निशाने पे है ……देविका के परिबार ने अपनी आर्थिक तंगी की बात कई बार राज्य सरकार और पीएमओ तक भी पहुचाई लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात निकला …देविका की माँ 2006 में ही गुजर गयी है …देविका के घर में आप जायेंगे तो उसके साथ कई नेताओं ने फोटो खिचवाई है ..कई मैडल रखे हैं ..लेकिन इन सब से पेट नहीं चलता …देविका बताती है की उसके रिश्तेदारों को लगता है की हमें सरकार से करोडो रूपये इनाम मिले है ..लेकिन असल स्थिति ये हैं की दो रोटी के लिए भी उनका परिवार महंगा है …..आतंकियों से दुश्मनी के नाम पर देविका के परिवार से उसके आस पास के लोग और उसकी कई दोस्तों ने उससे दूरी बना ली ..की कहीं आतंकी देविका के साथ साथ उन्हें भी ना मार डाले
……..महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और डीएम ऑफिस के कई चक्कर लगाने के बाद उधर से जवाब मिला की हमारे जिम्मे एक ही काम नहीं है …….देविका के पिता बताते हैं की उन्होंने अधिकारीयों से कहा की cm साहब ने मदद करने की बात कही थी …..सरकारी बाबू का कहना है की रिटेन में लिखवा के लाइए ……..तब आगे कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा ……….
अब आप बताइये की क्या ऐसे देश ..ऐसे समाज ..और ऐसी ही भ्रष्ट सरकारी मशनिरी के लिए देविका ने पैर में गोली खायी थी …??उसे क्या जरूरत थी सरकारी गवाह बनने की ??उसे स्कुल से निकाल दिया गया ??क्यों की उसने एक आतंकी के खिलाफ गवाही दी थी …..आप बताइये अगर देशभक्ति कीमत ऐसे ही चुकाई जाती है तो मै यही कहूँगा की कोई जरूरत नहीं है देशभक्त बनने की …..ऐसे खुद गरज समाज ..सरकार ….और नेताओं के लिए अपनी जान दाव पे लगाने की कोई जरूरत नहीं है …देविका तुमने बिना मतलब ही अपनी जिन्दगी नरक बना ली . एक वेश्या सन्नी लियोन के ऊपर बायोपिक बनाने वाला बॉलीवुड के पास पैसे हैं तो देविका के मामले में खाली हाथ। देविका को मिलने के लिए बॉलीवुड निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने देविका को अपने घर बुलाया लेकिन उसे आर्थिक मदद देना तो दूर उसे ऑटो के किराए के पैसे तक नहीं दिए ….ऐसा संवेदन हीन है अपना समाज।

प्रस्तुति: रमेश अग्रवाल ( कोलकाता)

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App