images (23)

ईशोपनिषद का मंत्र है कि :-
              
ॐ असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः।
ताँस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः॥३॥

इसका भावार्थ है कि इस संसार में रहते हुए जो अज्ञान अंधकार में भटकते हैं, आत्मा का हनन करते हैं, वे मृत्यु के पश्चात ऐसे लोकों में जन्म लेते हैं जिनमें सूर्य के दर्शन भी नहीं होते अर्थात जैसे अज्ञान अंधकार में यहां भटके रहे वैसी ही गति उनकी मरने के बाद होती है। जो कोई भी आत्मा का हनन करने वाले हैं वे आत्मघाती जीव मरने के अनन्तर उन्हीं लोकों में जाते हैं। (अर्थात जो कोई भी आत्महत्या अथवा आत्मा के विरुद्ध आचरण करते हैं वे निश्चित रूप से ऐसे लोक में जाते हैं।)
कहने का अभिप्राय है कि मानव जीवन अविद्या ,अज्ञान में भटकने के लिए नहीं मिला बल्कि मिथ्या ज्ञान से बाहर निकलकर विवेक और वैराग्य की जागृति के माध्यम से सदज्ञान की प्राप्ति कर मोक्ष के परम पद को पाने के लिए मिला है।
जो मिथ्याज्ञान में विचरण करते हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार में पड़े होते हैं, अर्थात जो मूढ होते हैं वह गूढ़(वैदिक ज्ञान के रहस्य को) को न समझ कर रूढ़(सामान्यतः प्रचलन) की बात करते हैं, ऐसे मूढ लोगों से क्षमा चाहते हुए विचारवान विद्वान , सत्यान्वेषी, सत्यपारखी , सत्याग्रही, लोगों के समक्ष एक प्रकरण उद्धृत करना चाहूंगा।
वैसे अपनी बात को प्रस्तुत करते समय मैं मानता हूं कि मेरे सभी मित्र मुझसे अधिक विद्वान विवेकी और हंस की भांति मोतियों को चुनने वाले होंगे। हम यथार्थ ज्ञान और मिथ्याज्ञान को आर्ष साहित्य के अनुसार ऋषियों के कथन के अनुसार परिचय कराने का प्रयास करेंगे। ऋषियों द्वारा अपने अनुभवजन्य ज्ञान से हमारे समक्ष बिखेरे हुए उन मोतियों को आप सभी चुनेंगे, ऐसी मेरी अपेक्षा है।

किसको कहते हैं अविद्या?

यजुर्वेद के एक मंत्र में कहा गया है-

विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदो भयंसह।
अविद्ययया मृत्युं तीत्र्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते॥

विद्वानों के अनुसार इस मंत्र में विद्या का अर्थ वेद से प्राप्त ज्ञान से शुद्ध कर्म और उपासना करना है। जो मनुष्य विद्या और अविद्या के सच्चे स्वरूप को साथ-साथ जान लेता है और उसी के अनुसार कर्म भी करता है वह कर्म और उपासना द्वारा यथार्थ ज्ञान से मोक्ष प्राप्त कर लेता है। यहां पर अविद्या ऐसी है जो विद्या के साथ मिलकर साधक के लिए हितकारी बन जाती है। अविद्या और विद्या, दोनों का ही ज्ञान कर लेना मोक्ष मार्ग का प्रथम सोपान है। यदि हम सभी इसे भलीभांति समझ लें तो हमारा जीवन सही अर्थों में सुखमय हो जाए।

जो दुष्ट अर्थात विपरीत ज्ञान है, मिथ्याज्ञान है ,उसको अविद्या कहते हैं।अविद्या उत्पन्न कैसे होती है? इंद्रियों और संस्कार के दोष से अविद्या उत्पन्न होती है।
विद्या किसको कहते हैं?
जो अदुष्टअर्थात यथार्थ ज्ञान है, वास्तविक ज्ञान है ,सत्य सत्य स्वरूप में स्वीकार करने का ज्ञान है ,
धर्म के 10 लक्षणों का उल्लेख करते हुए आठवां लक्षण विद्या की परिभाषा करते समय महर्षि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश के पंचम समुल्लास में उल्लेख किया है कि पृथ्वी से लेकर परमेश्वर पर्यंत यथार्थ ज्ञान और उनसे यथा योग्य उपकार लेना सत्य जैसा आत्मा में वैसा मन में , जैसा मन में वैसा वाणी में, जैसा वाणी में वैसा कर्म में वर्तना विद्या और इसके विपरीत अविद्या है।
उसको विद्या कहते हैं।
इससे आगे धर्म का नौवां लक्षण बताते समय महर्षि दयानंद लिखते हैं कि सत्य वह है जो पदार्थ जैसा हो ,उसको वैसा ही समझना वैसा ही बोलना वैसा ही करना भी। संस्कृत के किसी विद्वान का कहना है कि :-

गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणो,
बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः ।
पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः,
करी च सिंहस्य बलं न मूषकः ॥

गुणवान् (मनुष्य ही) गुण को जानता है, निर्गुण (मनुष्य) गुण नहीं जानता। (कोई) बलवान् (मनुष्य ही) बल को समझता है, कमजोर बल को नहीं समझ सकता।
इसी प्रकार समझना चाहिए कि विद्यावान ही विद्या का अर्थ समझ सकता है और विद्यावान ही किसी विद्वान को सम्मान दे सकता है।
मिथ्याज्ञान (भ्रांत‌ प्रतीति) किसको कहते हैं?
जो वस्तु जैसी है नहीं, उसको वैसी मान लेना मिथ्या ज्ञान है, इसी को भ्रान्त प्रतीति कहते हैं।
जैसे शरीर अनित्य है, आत्मा नित्य है, शरीर चल है ,आत्मा अचल है, जब शरीर को आत्मा मान लेना अथवा आत्मा को शरीर मान लिया जाए यह मिथ्या ज्ञान है। जीव को ब्रह्म बताने वाले मिथ्या ज्ञानी हैं।
इसी प्रकार शिवलिंग को ईश्वर मानकर के पूजा करना मिथ्या ज्ञान है, भ्रांत प्रतीति है। वह सत्य है ही नहीं। अज्ञान अंधकार है।
अर्थात लोग अज्ञान के अंधकार में डूबे हुए हैं। इसका ईश्वर की पूजा, आराधना, उपासना से दूर दूर तक भी कोई संबंध नहीं है।
सत्य को सर्वदा स्वीकार करने में तत्पर रहना प्रत्येक मनुष्य का प्रथम एवं पावन उत्तरदायित्व है।
सत्य को स्वीकार करने से, अर्थात यथार्थ ज्ञान से, वास्तविक ज्ञान से अज्ञान अंधकार समाप्त होता है।
वास्तविक ज्ञान क्या है?
मिथ्याज्ञान ,अज्ञान अंधकार से निकलना ही वास्तविक ज्ञान है, यथार्थ ज्ञान है ।
क्या मिथ्या ज्ञान से मुक्ति प्राप्त हो सकती है?
नहीं हो सकती।
मिथ्या ज्ञान से मनुष्य महा पापी और पतित होता है।
क्योंकि जो जीव को ब्रह्म बतलाते हैं, वे अविद्या निद्रा में सोते रहते हैं।
शिवजी एक मनुष्य थे। एक जीव थे, उसको ब्रह्म बतलाना कछुआ कल्याण करने वाला कहना,अविद्या है, मिथ्याज्ञान है।

मिथ्याज्ञान के दोष क्या क्या है?

अविद्या ,अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश यह 5 क्लेश हैं।
आज केवल अविद्या दोष के संबंध में संक्षिप्त चर्चा ऊपर की है। शेष पांच दोषों के विषय में चर्चा यहां नहीं करनी है। इस चर्चा को फिर कभी समय मिलने पर करेंगे।
मूल विषय पर ही रहेंगे, अन्यथा विषय विस्तार का दोष आ जाएगा।
उपरोक्त 5 दोष के होने से मनुष्य के जीवन में क्या परिणाम आता है?
ये ही 5 दोष मनुष्य की मुक्ति में बाधक हैं।
तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि शिवलिंग की पूजा मोक्ष तक नहीं पहुंचा सकती ?
निश्चित रूप से उसमें अविद्या दोष है, मिथ्याज्ञान हैं, यथार्थ ज्ञान नहीं है ,इसलिए पतित और महापापी बनाती है, मोक्ष के द्वार नहीं खोलती है।
किसी भी मनुष्य के जीवन में पांच दोषों में से यदि एक क्लेश भी शेष रहता है तो वह मुक्ति तक नहीं पहुंच सकता। इसलिए अविद्या दोष बहुत ही भयानक परिणाम देने वाला होता है।
शिवलिंग की पूजा करने में अविद्या दोष है।
क्रमश:

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट
चेयरमैन उगता भारत समाचार पत्र

1 thought on “विद्या और अविद्या का भेद

  1. SIR,
    VERY NICE ARTICLE WHICH IS BEING FORWARDED TO MANY GROUPS SO AS TO ENABLE THEM OPEN THEIR EYES TO WATCH THE FACT AND NOT TO ACCEPT THE FICTITIOUS / SPURIOUS / ADULTERATED MATTER.

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
savoybetting giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
restbet giriş
safirbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş