श्रावणी पर्व की महत्ता

#डॉ_विवेक_आर्य

सावन मास श्रावण का परिवर्तित नाम है। इस मास की वैदिक महत्ता ऋषि मुनियों के समय से प्रचलित है।विक्रमी संवत के अनुसार श्रावण पांचवा मास है। प्राचीन काल में श्रवण मास को जीवन का अभिन्न अंग समझा जाता था। कालांतर में विदेशी संस्कृति के प्रचार से जनमानस इसे भूल गया है।
श्रावणी पर्व के तीन लाभ है।

आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं सामाजिक

आध्यात्मिक पक्ष-

श्रावण का अर्थ होता है जिसमें सुना जाये। अब सुना किसे जाता है। संसार में सबसे अधिक महत्वपूर्ण ईश्वरीय ज्ञान वेद है। इसलिए इस मास में वेदों को सुना जाता है। श्रावण में गर्मी के पश्चात वर्षा आरम्भ होती है। वर्षा में मनुष्य को राहत होती है। चित वातावरण के अनुकूल होने के कारण शांत हो जाता है। मन प्रसन्न हो जाता है। वर्षा होने के कारण मनुष्य अधिक से अधिक समय अपने घर पर व्यतीत करता है। ऐसे अवसर को हमारे वैज्ञानिक सोच रखने वाले ऋषियों ने वेदों के स्वाध्याय, चिंतन, मनन एवं आचरण के लिए अनुकूल माना। इसलिए श्रावणी पर्व को प्रचलित किया। वेदों के स्वाध्याय एवं आचरण से मनुष्य अपनी आध्यात्मिक उन्नति करे। यही श्रावणी पर्व का आध्यात्मिक प्रयोजन है।

वैज्ञानिक पक्ष-

श्रावण में वर्षा के कारण कीट, पतंगे से लेकर वायरस, बैक्टीरिया सभी का प्रकोप होता हैं। इससे अनेक बीमारियां फैलती है। प्राचीन काल से अग्निहोत्र के माध्यम से बिमारियों को रोका जाता था। श्रावण मास में वेदों के स्वाध्याय के साथ साथ दैनिक अग्निहोत्र का विशेष प्रावधान किया जाता है। इसीलिए वेद परायण यज्ञ को इसमें सम्मिलित किया गया था। इससे न केवल श्रुति परम्परा को जीवित रखते वाले वेद-पाठी ब्राह्मणों का संरक्षण होता है अपितु वेदों के प्रति जनमानस की रूचि में वृद्धि भी होती है। श्रावणी पर्व का वैज्ञानिक पक्ष पर्यावरण रक्षा के रूप में प्रचलित है।

सामाजिक पक्ष

श्रावण मास में वर्षा के कारण सन्यासी, वानप्रस्थी आदि वन त्यागकर नगर के समीप स्थानों पर आकर वास करते है। गृहस्थ आश्रम का पालन करने वाले लोग अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए महात्माओं का सत्संग करने के लिए उनके पास जाते है। महात्माओं के धर्मानुसार जीवन यापन, वैदिक ज्ञान, योग उन्नति एवं अनुभव गृहस्थियों को जीवन में मार्गदर्शन एवं प्रबंध में लाभदायक होता हैं। श्रवण पर्व का सामाजिक पक्ष ज्ञानी मनुष्यों द्वारा समाज को दिशा-निर्देशन एवं धर्म भावना को समृद्ध करना है।

इस प्रकार से श्रावणी पर्व मानव के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व है।

इस लेख का स्वाध्याय कर जो भी इच्छुक व्यक्ति श्रावणी पर्व का लाभ उठाना चाहे उसके लिए स्वाध्याय हेतु वैदिक सहित्य उपलब्ध है।
(क) स्वाध्याय सन्दोह, ₹400
स्वाध्याय-संदीप ₹400- लेखक स्वामी वेदानन्द जी तीर्थ
(ख) वैदिक पुष्पांजलि आचार्य रामप्रसाद वेदालंकार जी ₹330
(ग) श्रुति सौरभ पण्डित शिव कुमार शास्त्री जी ₹280
(घ) वरुण की नौका आचार्य प्रियव्रत जी ₹230
मंगवाने के लिए 7015591564 पर वट्सएप करें।

.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *