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वर्ल्डकप 2015 सेमीफाइनल : टीम इण्डिया के हाथों नहीं लग सकी बटेर

-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

यह पहला अवसर नहीं है जब देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को ‘टीम इण्डिया’ के स्टार क्रिकेटर्स ने निराश किया हो। विश्वकप 2015 के सेमी फाइनल तक पहुँचने के पूर्व टीम इण्डिया 7 मैच जीत चुकी थी। क्रिकेट प्रेमियों को विश्वास हो चला था कि इण्डिया टीम विश्वकप 2015 में भी विजय दर्ज करेगी, लेकिन उनके विश्वास के साथ क्रिकेट स्टार्स ने धोखा किया। बल्लेबाज और गेंदबाजों के लचर प्रदर्शन से सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों टीम इण्डिया को शिकस्त खानी पड़ी। 2015 के विश्वकप में लगातार 7 मैच जीतने वाली इण्डिया क्रिकेट टीम सेमी फाइनल कैसे हारी, क्यों हारी? यह सवाल अब बहस का विषय बन गया है।

अन्धे के हाथ बटेर लगना- इस मुहावरे को आप सभी लोग भली-भाँति जानते होंगे। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भारतीय क्रिकेट टीम पर यह अक्षरशः लागू होता है। ऐसा नहीं है कि भारतीय क्रिकेट टीम अंधी है फिर भी इसके सदस्यों को ‘दृष्टिदोष’ यानि आई प्रॉब्लम अवश्य है। अमूमन दृष्टिदोष की उम्र चालीस से शुरू होती है, लेकिन टीम इण्डिया के प्लेयर्स इस उम्र के पहले ही आई विजन प्रॉब्लम से पीड़ित हो जाते हैं।
विश्वकप क्रिकेट 2015 के दौरान पूल मैच और क्वार्टर फाइनल में जीत दर्ज करने वाली क्रिकेट टीम ऑफ इण्डिया के हाथों बटेर लगी थी। क्रिकेट प्रेमियों को लगने लगा था कि वह लोग सेमीफाइनल मैच में टीम इण्डिया को जीतता हुआ देखेंगे- लेकिन उनकी आशा और सोच के विपरीत आस्ट्रेलिया जैसी ‘पेशेवर टीम’ के हाथों इसे करारी शिकस्त खाता देखा और काफी निराश भी हुए।
सट्टेबाजों का करोड़ों रूपया डूबा सो अलग की बात है। यह तो धन्धा है जिसमें घाटा-मुनाफा लगा ही रहता है। टीम इण्डिया की सेमी फाइनल विश्वकप 2015 में आस्ट्रेलिया के हाथों हुई पराजय से मुझे जरूर मुनाफा हुआ। चौंकने की बात हो सकती है, लेकिन सच बात यह है कि मेरे नन्हे किड्स जिन्हें क्रिकेट से काफी लगाव है, उन सभी ने टीम इण्डिया की इस हार से खिन्न होकर मन बना लिया कि उतना समय पढ़ने में लगाएँगे। किड्स/ग्रान्ड किड्स की बातें सुनकर प्रसन्नता हुई, कि ये बच्चे कम उम्र में ही अकलमन्द बन गए हैं, जबकि मैं क्रिकेट प्रेम से उम्र का अर्धशतक बिताने के उपरान्त ही उबर सका था।
जब मैं किशोरावस्था में था तब क्रिकेट उतना लोकप्रिय नहीं था जितना कि आज है। मुझे याद है वर्ष 1968-69 में जब गुण्डप्पा आर. विश्वनाथ, सुनील गावस्कर, विसन सिंह बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, वेंकेट राघवन और चन्द्रशेखर जैसे खिलाड़ी समर्पित भाव से क्रिकेट खेलकर मैच जीतते थे और टीम का नाम रौशन कर रहे थे तब से क्रिकेट का शौक मुझ पर हाबी हो गया। फिर सचिन तेन्दुलकर की कप्तानी तक चला, बाद में चस्का कम हो गया।
एक राज की बात बताना चाहूँगा वह यह कि उस समय भी भारतीय टीम वर्तमान टीम इण्डिया की तरह ही थी। यह बताना मुश्किल रहता था कि जी विश्वनाथ कब शतक बनाएँगे और लिटिल मास्टर गावस्कर कब जीरो पर पवेलियन चले जाएँगे। गेंदबाजों में स्पिन चौकड़ी कितनी गेदों के जाया होने के उपरान्त विकेट चटखाएँगे क्रिकेट कमेन्ट्री करने वाले लोग यह कहा करते हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। कब कौन सी टीम हारे और जीतेगी कहा नहीं जा सकता। मेरा अपना कहना है कि हमारी टीम इण्डिया का नेचर अनिश्चितताओं से भरा है। यह कहना मुश्किल है कि इसका कौन सा सदस्य कब फार्म से ऑफ फार्म हो जाएगा।
बहरहाल! कुछ भी हो- 2011 का विश्वकप जीतने वाली टीम इण्डिया में धौनी के धरन्धरों को 2015 में विश्वकप सेमीफाइनल मे आस्ट्रेलिया ने धूल चटा दिया। रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, सुरेश रैना, अजिंक्या रहाणे जैसे स्टार बल्ले बाजों को आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों द्वारा फेंकी जाने वाली गेंद स्पष्टरूप से दिखाई ही नहीं पड़ रही थी। इसी वजह से मैंने पहले ही कहा है कि इन्हें विजन प्रॉब्लम है, जबकि इसके उल्टे आस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को क्रिकेट की छोटी गेंद फुटबाल जैसी बड़ी दिख रही थी, क्योंकि उन पेशेवर खिलाड़ियों को ‘दृष्टिदोष’ नहीं है।
अंधे के हाथों बटेर लगने से यह तात्पर्य रहा कि विश्वकप 2015 में पूल बी में सभीं टीमें उतनी स्ट्रांग नहीं थी जितना कि पूल ‘ए’ वाली रही। पूल बी में होने की वजह से टीम इण्डिया के दृष्टिकोण से पीड़ित सभी खिलाड़ियों को जीत का स्वाद चखने को मिला था जो ‘क्वार्टर फाइनल’ तक कायम रहा। पहले सेमीफाइनल्स में न्यूजीलैण्ड साउथ अफ्रीका का खेल जिसने भी देखा दोनों टीमों में जीतने की ललक देखने को मिली। वहीं दूसरे सेमी फाइनल मुकाबला में आस्ट्रेलिया ने 328 रन बनाकर टीम इण्डिया को जीत के लिए 329 रनों का लक्ष्य दिया फिर रोहित, धवन, विराट, रैना, रहाणे………आदि नामी-गिरामी खिलाड़ी तू चल मैं आता हूँ कि तर्ज पर जल्दी-जल्दी क्रीज से पवेलियन में वापस आकर सीटों पर बैठे तिलमिलाते दिखे।
धौनी के धुरन्धरों ने इण्डिया की लुटिया डुबो दिया। विराट की प्रेमिका/मंगेतर, रैना के गृहनगर के लोगों को अतीव निराश होना पड़ा। जब वह दोनों क्रीज पर खड़े होते ही ‘आउट’ हो गए। मै। यह कहने की हिमाकत नहीं कर सकता कि सिडनी (आस्ट्रेलिया) ग्राउण्ड पर खेला गया इण्डिया-आस्ट्रेलिया सेमीफाइनल मैच ‘फिक्स्ड’ था, लेकिन कई जानकारों ने मुझसे कहा कि रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, सुरेश रैना की बल्लेबाजी देखकर शत-प्रतिशत कहा जा सकता है कि ‘मैच फिक्स्ड’ था, पा गए होंगे करोड़ों रूपए, देश जाए भाड़ में। ‘कप’ किसी के पास रहे उनके पास पैसे होने जरूरी है। जब पैसे होंगे तभी इन नौजवान खिलाड़ियों की शादियाँ सिने तारिकाओं और खूबसूरत मॉडल गर्ल्स से होंगी।
क्रिकेट जैसे खेल की वजह से इन्हें मकबूलियत हासिल हुई है और ये लोग टीम इण्डिया के सदस्य बने और चन्द पैसों के लिए ‘बिकाऊ’ बनकर देश का नाम मिट्टी मे मिला दिया। थू है ऐसे खिलाड़ियों पर, इन सबको टीम इण्डिया से बाहर कर दिया जाना चाहिए।
विश्वकप के दूसरे सेमीफाइनल मैच के उपरान्त जब टीम इण्डिया 95 रनों से हार गई तब परिवार के बच्चे मायूश हो गए, और अपने-अपने ढंग से खिलाड़ियों को कोसने लगे। सत्यम् (11 वर्ष) ने कहा कि मोहम्मद शमी के घर पर मैच जीतने के लिए कुरान का पाठ चल रहा था, रैना के शहर में अवकाश घोषित किया गया था, साथ ही देश के अनेकों हिस्सों में पूजा-पाठ हो रहे थे। करोड़ों देशवासियों की आँखें भारतीय क्रिकेट टीम की जीत की तरफ लगी हुई थी, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि ‘टीम इण्डिया’ के खिलाड़ी पैसों के लिए किस हद तक गिर सकते हैं।
‘मैच फिक्स्ड’ था यह तो शत-प्रतिशत कन्फर्म है। इसकी जाँच होनी चाहिए, साथ ही वर्तमान टीम इण्डिया की ओवर हालिंग करके प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को चान्स दिया जाना चाहिए। धौनी को भी चाहिए कि वह स्वयमेव सन्यास की घोषणा कर दे। मैच फिक्सिंग की जाँच तटस्थ एजेन्सी से कराकर दोषी खिलाड़ियों को सजा दिलाई जाए और करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ने के लिए कड़े से कड़ा दण्ड दिया जाए, जिसमें अर्थदण्ड एवं कारावास दोनों शामिल हो। मैच फिक्सिंग में संलिप्त लोगों पर राष्ट्रद्रोह चलाया जाना चाहिए। इसी तरह की बातें शक्ति एवं काव्या ने भी कहीं।
सेमीफाइनल में शर्मनाक हार के बाद टीम इण्डिया के प्रति नकारात्मक रूख अख्तियार करने वालों ने सत्यम्, काव्या, शक्ति की बातों का प्रबल समर्थन किया है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माँग किया है कि करोड़ों देशवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले धनलोलुप खिलाड़ियों की संदिग्ध गतिविधियों की जाँच कराई जाए। दूध का दूध और पानी का पानी होने पर ही हम सभी को सुकून मिल सकेगा। लगातार 7 मैच जीतने के उपरान्त 8वाँ महत्वपूर्ण मैच आसानी से हार जाना ‘टीमइण्डिया’ के खिलाड़ियों की गतिविधियों पर अवश्य ही प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

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