आजमगढ़ रामपुर संसदीय सीट से एक बार फिर मिलेगी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को चुनौती

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अजय कुमार

वहीं आजमगढ़ चुनाव में बसपा भी एक बड़ा फैक्टर है। चुनाव में तो भाजपा, सपा और बसपा के बीच जबरदस्त टक्कर दिख रही है, लेकिन देखने वाली बात यह भी होगी कि दोनों लोकसभा सीटों पर प्रचार के लिए विभिन्न दल अपने किन दिग्गजों को आगे करेंगे।

उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव जीतने के लिए भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। वैसे तो आजमगढ़ और रामपुर की दोनों ही लोकसभा सीटों पर 2019 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बाजी मारी थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है एक बार फिर वही इतिहास दोहराया जाएगा क्योंकि हर चुनाव अलग होता है। विभिन्न चुनावों में ना केवल प्रत्याशी बदल जाते हैं बल्कि मतदाताओं की सोच में भी अंतर आ जाता है। इसीलिए कोई दावे से नहीं कह सकता है कि रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीटों पर फिर से समाजवादी पार्टी का ही परचम लहराएगा। हालांकि जीत के दावे दोनों तरफ से किए जा रहे हैं।

वहीं आजमगढ़ चुनाव में बसपा भी एक बड़ा फैक्टर है। चुनाव में तो भाजपा, सपा और बसपा के बीच जबरदस्त टक्कर दिख रही है, लेकिन देखने वाली बात यह भी होगी कि दोनों लोकसभा सीटों पर प्रचार के लिए विभिन्न दल अपने किन दिग्गजों को आगे करेंगे। जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही उससे तो यही लगता है कि बसपा सुप्रीमो मायावती शायद ही आजमगढ़ प्रचार करने के लिए जाएं। वहीं अबकी से उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से सतीश मिश्रा को भी स्टार प्रचारकों की सूची से ठीक वैसे ही बाहर रखा है, जैसे समाजवादी पार्टी की तरफ से शिवपाल यादव को स्टार प्रचारक की सूची से बाहर रखा गया है। इसको लेकर शिवपाल यादव नाराज भी हैं। आजमगढ़ का चुनाव विशेष तौर पर इसलिए महत्व रखता है क्योंकि यहां से भाजपा और सपा दोनों के ही यादव उम्मीदवार हैं जबकि बसपा का मुस्लिम प्रत्याशी है।

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में यादव 22 प्रतिशत, मुस्लिम 18 प्रतिशत, दलित 20 प्रतिशत, गैर यादव ओबीसी मतदाता करीब 18 प्रतिशत हैं। इस लोकसभा सीट में आजमगढ़, मुबारकपुर, सगड़ी, गोपालपुर और मेहनगर विधानसभा क्षेत्र में सपा का कब्जा है। 2019 के लोकसभा चुनाव के समय सपा-बसपा का गठबंधन था। जिसमें अखिलेश यादव को 6.21 लाख और भाजपा के दिनेश लाल यादव को 3.67 लाख मत मिले थे। इस बार बसपा ने अपना अलग से प्रत्याशी उतारा है।
वहीं रामपुर की बात की जाए तो यहां से भाजपा ने उस प्रत्याशी को उतारा है जो कभी आजम खान का करीबी हुआ करता था और उनकी कमजोरी और ताकत को भलीभांति जानता है। रामपुर लोकसभा सीट में स्वार, चमरव्वा, बिलासपुर, मिलक और रामपुर विधानसभा सीटें आती हैं। वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां से आजम खान को 5.59 लाख और भाजपा की जयाप्रदा को 4.49 लाख मत मिले थे। इस हिसाब से अबकी यहां भी मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है क्योंकि अबकी से आजम खान मैदान में नहीं हैं जिसका फायदा बीजेपी उठा सकती है। बहरहाल, बात स्टार प्रचारकों की करें तो यह तय माना जा रहा है कि योगी और अखिलेश यादव, दोनों ही लोकसभा सीटों पर प्रचार करने पहुंचेंगे।
लखनऊ के सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी स्टार प्रचारकों की सूची में नाम है, लेकिन भाजपा की तरफ से जारी सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का नाम नहीं होना यह बताता है कि यह दोनों नेता उपचुनाव से दूरी बनाकर रखेंगे। इसका मतलब यह भी हुआ कि क्या आजमगढ़ या रामपुर से हार जीत का सीधा नफा नुकसान योगी को ही होगा क्योंकि उनके नेतृत्व में ही दोनों सीटों पर उपचुनाव लड़ा जा रहा है।

खैर, उत्तर प्रदेश की रामपुर और आजमगढ़ सीट पर हो रहे लोकसभा उपचुनाव को लेकर मोदी और अमित शाह के बिना भी बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी ने दो सीटों पर हो रहे लोकसभा उपचुनाव के लिए 40 प्रचारकों की लिस्ट जारी की है जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी नाम शामिल है। दरअसल अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा की करहल सीट से जीत के बाद आजमगढ़ सीट छोड़ दी थी वहीं आजम खान ने रामपुर सीट छोड़ दी थी जिसकी वजह से दोनों सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। बीजेपी ने रामपुर सीट से घनश्याम लोधी और आजमगढ़ सीट से भोजपुरी स्टार दिनेश लाल निरहुआ को उम्मीदवार बनाया है। रामपुर सीट की बात करें तो ये इलाका मुस्लिम बहुल है जहां समाजवादी पार्टी बीजेपी के मुकाबले ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। यही वजह है कि बीजेपी ने इन दो सीटों पर पूरा जोर लगा दिया है। बीजेपी ने इन दो सीटों के लिए सीएम योगी और राजनाथ सिंह के अलावा डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, पंकज चौधरी, कौशल किशोर, मुख्तार अब्बास नकवी, साध्वी निरंजन ज्योति, प्रो. एसपी सिंह बघेल और बीएल वर्मा स्टार को स्टार प्रचारक बनाया है।
इसके अलावा प्रदेश सरकार के मंत्रियों में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री बेबी रानी मौर्य, एके शर्मा, नंदगोपाल गुप्ता नंदी, अनिल राजभर, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, जसवंत सिंह सैनी, बलदेव औलख और विजय लक्ष्मी गौतम, सूर्यप्रताप शाही, असीम अरुण, गिरीश यादव, धर्मपाल सिंह को प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है।

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