अंसल गोल्फ लिंक में मनाया गया हिंदु स्वराज्य दिवस

ग्रेटर नोएडा। ( विशेष संवाददाता) यहां स्थित अंसल गोल्फ लिंक टू में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्यारोहण के दिवस के अवसर पर विगत रविवार 12 जून को विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आरएसएस के जिला बौद्धिक प्रमुख श्री अशोक भाटी मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय आर्य विद्यापीठ के महासचिव और इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा की गई ।
श्री भाटी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के महान व्यक्तित्व और उनके कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर भारत के खोए हुए स्वाभिमान को पुनर्स्थापित करने में अग्रणी और महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया था। उनके दिए हुए राजनीतिक चिंतन के संस्कारों ने भारतीय राजनीति की तत्कालीन धारा को मोड़ कर आगामी क्रांतिकारी आंदोलन की नींव रखी। इतिहास की धारा को मोड़ने वाले महापुरुष छत्रपति शिवाजी महाराज ने शून्य से चलकर इतिहास के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए। उनके व्यक्तित्व से आज हमें बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि हमारे क्रांतिकारियों और इतिहास नायकों के इतिहास को जानबूझकर उपेक्षित किया गया है। जिसको अब दोबारा महत्वपूर्ण और गौरवशाली ढंग से लिखने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज इतिहासकारों की इस बेईमानी का सबसे अधिक शिकार हुए हैं। डॉक्टर आर्य ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री ने देश का पहला शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को बनाकर मुगलिया ढंग से इतिहास के लेखन की परंपरा डाली। जिससे इस बेईमानी को और भी अधिक बल मिला।
इस अवसर पर श्री राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने देश भक्ति की कविता सुना कर इतिहास के महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी प्रकार महावीर सिंह आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमने महाशय राजपाल, पंडित लेखराम और महात्मा श्रद्धानंद स्वामी जी जैसी दिव्य विभूतियों को आतंकवाद की भेंट चढ़ाया है। आज हमें सावधान रहने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर श्री राजेश बैरागी, संदीप गर्ग संदीप शर्मा- (शाखा कार्यवाह ),मनु बैरागी (मुख्य शिक्षक) रणवीर सिंह(गण नायक) ,रवि आर्य ( गण शिक्षक) श्री संदीप गर्ग, श्री परमानंद कुशवाहा,श्री जितेंद्र गुप्ता
आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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