आर्य जगत के महान समाजसेवी पंडित जोखूराम मिश्र जी की स्मृति में प्रेरणा सभा का आयोजन- “आर्य समाज के सच्चे कार्यकर्ता थे पण्डित जोखूराम – डॉ. वेद प्रताप वैदिक”

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अध्यात्म पथ पत्रिका एवं भारत उदय परिषद के संयुक्त तत्वावधान में पण्डित जोखूराम मिश्र की स्मृति में स्मारक प्रेरणा सभा का ऑनलाइन बेबिनार आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डाँ० वेदप्रताप वैदिक ने कहा कि अमेठी उतर प्रदेश के गाँव मे एक ब्राह्मण (मिश्र गौतम गोत्र) कुल मे उत्पन्न दिल्ली की प्रसिद्ध आर्यसमाज, जोरबाग के स्थापनाकाल से ही कर्मठ प्रबन्धक यशस्वी कार्यकर्ता श्री जोखूराम मिश्र भवन निर्माण से पहले समाज का सत्संग दीवानचन्द आर्य स्कूल लोदी रोड मे व्यवस्थित करते रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरु काँलेज मे सेवा करते-करते सुबह-शाम ओर अवकाश के दिनों मे केवल और केवल वैदिक धर्म प्रचार व्यवस्था मे आजीवन जुटे रहे।

मुख्य वक्ता प्रख्यात समाज सेवी ठाकुर विक्रम सिंह जी ने कहा कि श्री जोखू राम मिश्र मुझे बहुत मानते थे। सफदरजंग अस्पताल मे मरीजों के साथ कोई सहायक न होता, उनकी सहायता आर्यसमाज जोरबाग के कार्यकर्ता के साथ सेवा-सहयता करते थे । पूर्व आई.एस. श्री धर्मेद्र देव मिश्र ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होने कहा कि श्री जोखूराम जी से मेरा पारिवारिक संबंध है। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के वैदिक विद्वान आचार्य चद्रशेखर शास्त्री ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि दयानन्द मुक्ति धाम के अभूतपूर्व वैधानिक संकट और विधर्मियों से संघर्ष मे श्री जोखू राम मिश्र जी श्री बी.एल. शर्मा प्रेम पूर्व सांसद, श्री मदनगोपाल खोसला, स्व. लाला रामेश्वर दास गुप्त आदि के साथ निर्भीक सैनिक की भाँति डटे रहे । किसी निन्दक पर क्रोध व घृणा न करना उनका स्वभाव था। आत्मनिरीक्षण करना उनका प्रतिदिन का नियम रहा। जीवनपर्यन्त वह अल्पाहार के अभ्यास तथा मितभाषी रहे। बड़े बड़े सामाजिक उत्सवों के अवसर पर पारिवारिक व्यवस्थाओं मे कही भी कभी किसी को असम्मानजनक शब्द नही कहा। उद्योगी बनें, उपयोगी बनें, सहयोगी बनें, यह उनके जीवन का मूल मंत्र था। वक्ता पं दीनानाथ शास्त्री ने कहा कि उनकी यह अनुकरणीय आदत रही कि कभी नाम के साथ मिश्र नही लगाया। उन्होंने सदैव अपने हस्ताक्षर हिन्दी मे ही मात्र जोखूराम ही लिखा क्योंकि अनादिकाल से लेकर महाभारत के समय तक एक भी उदाहरण ऐसा नही मिलता जहाँ किसी के नाम के साथ कोई जातिसूचक उपनाम लगा हो।

आपके जीवन जीने के ढंग और समाजसेवा हेतु सदैव तत्पर रहने के स्वभाव ने यह सिद्ध कर दिया कि आध्यात्मिकता केवल पुस्तकों, सिद्धान्तों व दर्शन आदि में ही नही पाई जाती।

इस अवसर पर आचार्य विद्या प्रसाद मिश्र एवं भारत उदय परिषद के महामंत्री श्री अनुराग मिश्र ने सभी का आभार प्रकट किया। श्री नरेंद्र आर्य सुमन एवं श्रीमती कविता आर्या के मधुर भजन हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या गुरुकुल, लोवाकला की कन्याओं द्वारा वेदमंत्र-पाठ से हुआ। इस अवसर पर देश विदेश के अनेक विद्वान, शिक्षाविद्, पत्रकार, समाजसेवी आदि गणमान्य जन उपस्थित रहे।

-मनमोहन कुमार आर्य

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