विशाल धरने का आयोजन

rajasthan mandapराजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता के लिए नई दिल्ली के

जंतर-मंतर पर 6 मई को विशाल धरने का आयोजन होगा

नई दिल्ली, 05 मई, 2015। राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी. मालू ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि देश-विदेश में करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को मान्यता प्रदान कर संविधान की आठवीं सूची में शामिल किया जाए। ़उन्होंने बताया कि राजस्थान विधानसभा में करीब 12 वर्ष पूर्व सर्व सम्मति से एक संकल्प पत्रा पारित कर केन्द्र सरकार को भिजवाया जा चुका है।

श्री मालू ने बताया कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता और आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 6 मई बुधवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल धरने का आयोजन किया जायेगा। जिसमें राज्य के सांसदों के साथ ही देश और प्रदेश के हजारों लोग शामिल होंगे।

श्री मालू ने बताया कि राज्य के कोने-कोने से धरने में शिरकत को राजनीति, धर्म, जाति, समुदाय, वर्ग आदि से मुक्त रखा गया है। सिर्फ राजस्थानी भाषा को समर्थन देने वाले भाषा प्रेमियों को अभियान से जोड़ा गया है।

श्री मालू ने बताया कि राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए मौजूदा केन्द्र और राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। राजस्थान की वर्तमान भाजपा सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्रा में इस बात को शामिल किया है। जो घोषणा पत्रा अब सरकारी दस्तावेज बन चुका है। लोकसभा व राज्यसभा में भाजपा संासदों ने इस मुद्दे को कई बार प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी भाषा को शामिल करने से राजस्थान का गौरव बढ़ेगा। ऐसा होने से राजस्थान ही नहीं पूरे देश के प्रान्तों व विदेशों में राजस्थानी समाज में हर्ष होगा, एवं राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा।

राजस्थानी भाषा मान्यता से समिति के संयोजक श्री सुरेश खंडेवाल ने बताया कि राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में जोड़ने की मांग अब सम्पूर्ण राजस्थानियों द्वारा प्रदेश व प्रवास से जोर-शोर से उठाई जा रही है। जनगणना 2011 में भी राजस्थान के 4 करोड़ 83 लाख लोगों ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी दर्ज करवाई है। प्रवासी राजस्थानियों की संख्या भी कम नहीं है।

श्री खंडेलवाल ने बताया कि 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी मान्यता हेतु राजस्थान विधानसभा के लिए गए सर्वसम्मत संकल्प को करीब 12 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। 25 अगस्त 2003 के संकल्प के तुरंत बाद राज्य सरकार ने केन्द्र को पत्रा लिखा। 17 दिसम्बर 2006 को लोकसभा में तत्कालीन गृहराज्य मंत्राी श्री प्रकाश जायसवाल ने घोषणा की कि ‘राजस्थानी एवं भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु केन्द्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है और बजट सत्रा 2007 में इस हेतु विधेयक आ जाएगा। इसके लिए सरकार कृत संकल्प है। श्री जायसवाल ने उन दिनों यह बयान 5-7 बार अलग-अलग जगहांे पर दोहराया भी था।

उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार के उक्त आश्वासनो के बावजूद अभी तक राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने के कारण जंतर मंतर पर बुधवार को विशाल धरने का आयोजन किया जा रहा है इस धरने को सफल बनाने के लिए राजस्थान के सभी सांसदों, मंत्रियों सहित सभी राजस्थानी लोगों को समर्थन प्राप्त है।

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