भारत की आर्थिक विकास दर और वैश्विक एजेंसियों के अनुमान

 प्रह्लाद सबनानी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत की आर्थिक विकास दर में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि रहने का अनुमान लगाया गया है हालांकि जनवरी 2022 में जारी अपने पहले अग्रिम अनुमानों में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर रहने का अनुमान लगाया गया था।

अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) ने वर्ष 2022 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर को दो प्रतिशत से घटाते हुए 6.7 प्रतिशत के स्थान पर अब 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर में कमी के लिए यूक्रेन और रूस के बीच वर्तमान में चल रहे युद्ध को मुख्य कारण बताया गया है। हालांकि वैश्विक आर्थिक विकास के अनुमान को भी वर्ष 2022 के लिए 3.6 प्रतिशत से घटा कर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है एवं विकासशील देशों के लिए आर्थिक वृद्धि दर कुछ अधिक कम रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां रूस वर्ष 2022 में एक गहरी मंदी का अनुभव करेगा, वहीं पश्चिमी यूरोप और मध्य, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों की विकास दर में भारी कमी की आशंका जताई गई है।

विशेष रूप से भारत के संदर्भ में यह कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रही भारी वृद्धि के चलते भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार प्रतिबंधों, खाद्य मुद्रास्फीति, कई देशों की सख्त नीतियों और वित्तीय अस्थिरता की भी चुनौती भारत की आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकती है। उक्त कारणों का हवाला देते हुए संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत की अनुमानित विकास दर को कम किया गया है। उक्त प्रतिवेदन में यह भी बताया गया है कि दक्षिण और पश्चिमी एशिया की कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा की मांग और कीमतों में तेजी से वृद्धि से कुछ लाभ हो सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को भी तीन प्रतिशत से घटाकर 2.4 प्रतिशत कर दिया गया है। चीन की आर्थिक विकास दर के अनुमानों को भी 5.7 प्रतिशत से घटाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया गया है। रूस के लिए तो वर्ष 2022 में एक गहरी मंदी की आशंका व्यक्त की गई है जिससे रूस की आर्थिक विकास दर 2.3 प्रतिशत से घटकर -7.3 प्रतिशत रह जाने की सम्भावना जताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र के वर्ष 2022 के लिए भारत के संदर्भ में उक्त अनुमानों के ठीक विपरीत भारत की आर्थिक विकास दर लगातार तेजी से आगे बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत की आर्थिक विकास दर में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि रहने का अनुमान लगाया गया है हालांकि जनवरी 2022 में जारी अपने पहले अग्रिम अनुमानों में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर रहने का अनुमान लगाया गया था। केंद्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानों के अनुसार भी भारत की आर्थिक विकास दर वित्तीय वर्ष 2021-22 में 9 प्रतिशत के आसपास रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7 से 8 प्रतिशत की बीच रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है। 
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से वर्ष 2022 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर के अनुमान लगाने के संदर्भ में कहीं न कहीं चूक हो रही है क्योंकि वास्तविक धरातल पर भारत के आर्थिक विकास की कहानी कुछ और ही स्थिति दर्शा रही है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत से वस्तुओं के निर्यात में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल हुई है और 41,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात रहे हैं जो निर्धारित लक्ष्य से भी 5 प्रतिशत अधिक रहे हैं। मार्च 2022 माह में वस्तुओं के निर्यात 4,038 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रहे हैं जबकि यह मार्च 2021 माह में 3,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रहे थे। विशेष रूप से पेट्रोलीयम उत्पाद, जेम्स एवं ज्वैलरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि उत्पाद आदि क्षेत्रों में वृद्धि दर सराहनीय रही है। यूक्रेन एवं रूस में चल रहे युद्ध के चलते भारत से कुछ उत्पादों, विशेष रूप से कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर बढ़ी है क्योंकि युद्ध के पूर्व यूक्रेन एवं रूस कृषि उत्पादों का भारी मात्रा में निर्यात करते थे। अब कई देश गेहूँ आदि जैसे कृषि पदार्थों के लिए भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। इसी प्रकार कृषि उत्पादों के अलावा भारत द्वारा निर्मित किये जा रहे अन्य कई उत्पादों की मांग भी विदेशों में बहुत बढ़ी है और यह बढ़त वित्तीय वर्ष 2022-23 में बनी रहने की सम्भावना है, जिसके चलते भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर में अच्छी बढ़त जारी रहेगी।
दूसरे, भारत ने हाल ही में कुछ देशों (यूएई एवं ऑस्ट्रेलिया) के साथ मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए हैं एवं कुछ अन्य देशों (ब्रिटेन, अमेरिका एवं यूरोपीयन यूनियन) के साथ मुक्त व्यापार समझौते पूरे होने की ओर अग्रसर हैं। भारत पूर्व में भी दक्षिणी कोरिया, जापान, मलेशिया, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, चिली, मरकोसुर आदि देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) अथवा तरजीही व्यापार समझौते सम्पन्न कर चुका है। इस प्रकार के आर्थिक समझौते करने से भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होगी अतः भारत इस क्षेत्र में बहुत तेजी से कार्य कर रहा है। आज विश्व के आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न कई देश भी भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना चाहते हैं ऐसे में वर्ष 2022 में भारत के विदेशी व्यापार में वृद्धि जारी रहने की पूरी पूरी सम्भावनाएं बनती हैं, जिससे देश की आर्थिक विकास दर में तेजी बनी रहेगी। अब तो ऐसा लगने लगा है कि आगे आने वाले समय में भारत की आर्थिक विकास दर में देश से उत्पादों के निर्यात का भी बहुत बड़ा योगदान रहने वाला है और इस प्रकार देश की आर्थिक प्रगति निर्यात आधारित प्रगति बनने की ओर अग्रसर है।

तीसरे, भारत द्वारा हाल ही के समय में आर्थिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गये हैं जैसे उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना। इस योजना के अंतर्गत 13 विभिन्न औद्योगिक उत्पादों को शामिल करते हुए 197,000 करोड़ रुपए की राशि इस योजना पर खर्च करने का निर्णय किया जा चुका है एवं इसमें से बहुत बड़ी राशि का बजट में प्रावधान भी कर लिया गया है। इस योजना में जिन क्षेत्रों को शामिल किया गया है उनमें शामिल हैं- ऑटोमोबाइल एवं ऑटो उत्पाद निर्माण इकाईयां, ड्रोन उत्पाद निर्माण इकाईयां, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर निर्माण इकाईयां, फूड प्रोसेसिंग इकाईयां, मेडिकल उपकरण निर्माण इकाईयां, फार्मा उद्योग, स्टील उद्योग, केमिकल उद्योग, एलईडी बल्ब एवं एसी निर्माण इकाईयां, टेक्स्टायल उद्योग, सोलर पैनल निर्माण इकाईयां, टेलिकॉम एवं नेटवर्क उत्पाद निर्माण इकाईयां। इस विशेष योजना का लाभ उठाने के उद्देश्य से विश्व की कई बड़ी बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपनी उत्पादन इकाईयों को भारत में स्थापित करने का निर्णय लिया है। साथ ही वैश्विक स्तर पर यह कम्पनियां स्थानीय सप्लाई चैन का हिस्सा बनने की ओर भी अग्रसर हैं। इस सबका मिलाजुला असर भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर बहुत अच्छा रहने की सम्भावना है।
चौथे, केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा दिनांक 1 फरवरी 2022 को देश की संसद में प्रस्तुत किए गए आम बजट में केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 में किए जाने वाले पूंजीगत खर्चों में अधिकतम 35.4 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 7.50 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान पूंजीगत खर्चों के लिए किया है जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 5.54 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्चों का प्रावधान किया गया था। केंद्र सरकार आम नागरिकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एवं देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के उद्देश्य से अपने पूंजीगत खर्चों को लगातार बढ़ा रही है। इससे देश में रोजगार के नए अवसर अच्छी तादाद में निर्मित हो रहे हैं, यही समय की मांग भी है। पूंजीगत खर्चों में बढ़ोत्तरी से देश की आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी जोकि आर्थिक विकास दर को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। 
देश की आर्थिक विकास दर को बल देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार कई कदम उठा रही है जिसका अच्छा प्रभाव देश में लगातार तेज हो रही आर्थिक विकास दर के रूप में दिखाई भी दे रहा है। इसके अलावा अब भारत में परिस्थितियां बहुत बदल चुकी हैं एवं भारत, वर्ष 2030 में 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है एवं इसके लिए तो 10 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर को हासिल करना ही होगा अन्यथा उक्त लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल कार्य होगा फिर वर्ष 2022 में 4.6 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर पर समझौता कैसे किया जा सकता है? कहा जा सकता है कि विदेशी संस्थानों द्वारा भारत के आर्थिक विकास के संदर्भ में उनके द्वारा किए जा रहे अनुमानों में कहीं न कहीं चूक की जा रही है।

प्रहलाद सबनानी

लेखक भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवर्त उप-महाप्रबंधक हैं।

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