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आशाओं को सुनहरे पंख देता पहला बजट

arun_jaitley_2014-15_domain-b(राजनीतिक संवाददाता)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव के समय जनता से ‘अच्छे दिनों’ का वायदा किया था। उन्होंने रेलवे के किरायों में वृद्घि करके अपने विरोधियों को विरोध करने का मौका दिया। लेकिन आम बजट पेश करते समय मोदी सरकार ने इस क्षति की पूर्ति करने का बेहतर प्रयास किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2014-15 का बजट पेश किया। इस बजट का देश को इंतजार था।

एक आम नागरिक हमेशा यह चाहता है कि उस पर से टैक्स का बोझ कुछ घटे, इस नजरिये से देखें, तो इनकम टैक्स की सीमा दो लाख से 2.5 लाख करना कुछ राहत देने वाला है। साथ ही होम लोन सस्ता होना भी आम लोगों के लिए आकर्षक कदम है। आम जनता को कुछ और घोषणाएं भा रही हैं, मसलन देश में चार एम्स, पांच आईआईटी और पांच आईएमएम खोलने का प्रस्ताव। बजट में यह आश्वासन भी दिया गया है कि आने वाले पांच सालों में सरकार हर राज्य में एम्स की स्थापना करेगी। इसके अलावा सरकार ने बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत भी की है, इसके लिए सौ करोड़ के बजट का प्रस्ताव किया गया है। सौ नए शहरों के स्थापना की भी बात कही गयी है। बजट में किसानों को राहत देने के लिए काफी घोषणाएं की गयी हैं। बजट में यह कहा गया है कि समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत की छूट जारी रहेगी। इसके साथ ही किसानों की सहायता के लिए 1000 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजाना शुरू की गयी है।

किसानों को मौसम की जानकारी देने और किसान मंडियों को प्रोत्साहित करने की भी योजना है। कहा जा सकता है कि बजट के केन्द्र में किसानों को रखा गया है, उनकी उपेक्षा नहीं की गयी है। बजट में यह प्रस्ताव किया गया है कि रक्षा क्षेत्र व बीमाक्षेत्र में 49 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी विदेश किया जाएगा। इसके साथ ही वित्तमंत्री ने बैंकों के शेयर बेचने का भी प्रस्ताव किया है। इन प्रस्तावों पर अगर ध्यान दें, तो हम पायेंगे कि इसका कारण सरकार के पास पैसों की कमी है। रक्षा उपकरणों की खरीद जब सरकार विदेश से करती है, तो इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है। यह बात जगजाहिर है कि रक्षा उपकरणों की खरीद हमें अमेरिकी डॉलर देकर करनी होती है, इसलिए सरकार ने इस बजट में यह प्रयास किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर असर न पड़े। रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत एफडीआई और बीमा क्षेत्र में एफडीआई 26 से 49 प्रतिशत करने के पीछे भी यही उद्देश्य है। पैसे जुटाने के लिए वित्त मंत्री ने बैंकों के शेयर बेचने का भी प्रस्ताव किया है। यह सरकार के कुछ बड़े कदम हैं, जो देश की विदेशी मुद्रा को बुस्टअप करने के लिए उठाये गये हैं।

यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले हैं। देश में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए भी बजट में प्रस्ताव किया गया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत की गयी है। इसपर 100 सौ करोड़ का बजट दिया गया है। महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए सरकार ने बजट का प्रावधान किया है। कहा जा सकता है कि यह बजट उम्मीदों से भरा है। जो घोषणाएं की गयी हैं उन्हें अमल में लाना जरूरी है, अन्यथा वे बेमानी हो जाएंगी।

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