Categories
धर्म-अध्यात्म

एक सच्चे साधु की कहानी

आचार्य मित्रसेन सिद्धान्तालंकार

एक दिन स्वामी ध्यानानन्द अपनी प्रचार-यात्रा को चल दिये। वे प्रचार करते हुए हिमालय पर्वत के पास पहुंचने वाले ही थे कि उन्हें कहीं से विचित्र ध्वनि सुनाई पड़ी। उन्होंने देखा कि धू धू करके जंगल जल रहा था। जंगल के निकट रहने वाले अपनी सम्पत्ति को बचाने का यत्न कर रहे थे। तभी सबका ध्यान एक आश्चर्यजनक घटना की ओर आकृष्ट हुआ। सभी के मुख से निकल पड़ा- “हाय! तनिक उस पेड़ की ओर तो देखो। बेचारी चिड़िया अपने घोंसले के आस-पास कैसी चक्कर लगा रही है! अरे! आग की लपटें घोंसले के पास तक पहुंच गई है, नन्ही-सी चिड़िया, अह! वह कर ही क्या सकती है? वह वहां से उड़ क्यों नहीं जाती?”
सभी मनुष्य अपनी सम्पत्ति की चिन्ता छोड़कर उसी चिड़िया की ओर देखने लगे। बहुत ही दर्दनाक दृश्य था, लपटें बढ़ते बढ़ते घोंसले के पास पहुंच गई, तब चिड़िया ने जो कार्य किया उसकी किसी को आशा तक न थी। वह शीघ्रता से घोंसले के पास उड़कर पहुंच गई। पहले उसने घोंसले के ऊपर दो तीन चक्कर लगाये और जब कोई उपाय न दीख पड़ा तो उसने अपने दोनों पंख नन्हें-नन्हें मुन्नों पर फैला दिये। देखते ही देखते वह घोंसला, चिड़िया और उसके बच्चे जल मरे।
सारी जनता दंग रह गई, इतना प्यार, अद्भुत प्रेम! और वह भी उस छोटी सी चिड़िया के हृदय में। साधु ध्यानानन्द भी हैरान थे, अचानक ही उनके मन में विचार आया जिसकी प्रेरणा से वे जनता की ओर मुड़े और बोले- “भाईयों और बहिनों! जिस चिड़िया के प्रेम को देखकर आप आश्चर्यचकित हो रहे हैं, शायद आपको पता नहीं कि इससे भी अधिक प्रेम का प्रदर्शन आपके लिए हो चुका है, इस बलिदान से बढ़कर भी एक और ने हमारे लिए अपनी बलि दे दी। वह हमें इससे भी अधिक प्यार करता था।”
कुछ क्षण रुककर उन्होंने फिर कहा- हम लोगों को अज्ञान और पाप के मार्ग से बचाने के लिए किस तरह प्रभु ने अपना एक पुत्र भेजा। उन्होंने उन्हें यह भी बताया कि किस तरह यह ईश्वर का बेटा उच्च घराने में पैदा हुआ और एक महान् योगी, सुधारक, उपकारक का जीवन बिताया। परन्तु अज्ञानी लोगों ने उसे एक बार नहीं, १४ बार जहर पिलाया और अन्त में किस क्रूर ढंग से दूध में शीशा पिलाकर समाप्त कर दिया। आज से लगभग ८० वर्ष पूर्व यह घटना राजस्थान में घटी थी।
फिर भी उस विश्वोपकारी महर्षि ने सदियों से रोगी विश्व को चंगा किया, अज्ञान के कारण अन्धे मानव को ज्ञान चाक्षु दिए, नाना रोग ग्रसित तथा छुआछात के कोढ़ी भारत को स्वस्थ किया, यहां तक कि जीवन्मृत लोगों में भी चेतना के प्राण फूंके। परन्तु क्या वह अपने जीवन को नहीं बचा सकता था? हां, उसने १३ बार मृत्यु को पीछे धकेल दिया और १४वीं बार यह सोचकर कि पिता प्रभु को उसके जीवन की आवश्यकता है, उसकी यही इच्छा है तो उसने प्रभु की इच्छा पूरी की। इसी हेतु उसने सारे शरीर पर विष से निकले रोगों के कष्ट सहन किये और मरते-मरते भी अपने हत्यारे को धन की थैली देकर कहा था- “जा विदेश भाग जा, नहीं तो तुझे पुलिस मृत्यु दण्ड दे देगी।” एक बार उसने कहा था- “मैं संसार को कैद कराने नहीं आया बल्कि कैद से छुड़ाने आया हूं।” क्योंकि वह बेड़ियां तोड़ने आया था बेड़ियां डालने नहीं।
उस साधु जिसका नाम महर्षि दयानन्द सरस्वती था, ने इतनी दया क्यों की? क्योंकि उन्हें मानवता से असीम प्रेम था, उन्हें दया में ही आनन्द आता था करुणा की वह साक्षात् मूर्ति ही था। उसे यह भी ज्ञान था कि मानव जानते और न जानते हुए अनेक पाप करते हैं, वे इस भयंकर अपराध के दण्ड को नहीं जानते और चूंकि वह हमसे बेहद प्यार करता था इसलिये उसने हमें पापाग्नि की लपटों से बचाया। चाहे स्वयं को इस हेतु शहीद कर दिया, यह हमारी मुक्ति के लिए ही था। यदि वह हमें पापों से बचाने को न चेताता तो समाधि का आनन्द ही भोगता। मानवता की रक्षा के लिए उसने आर्य समाज की स्थापना की, जो उसके निर्वाण प्राप्ति के बाद विश्व की रक्षा करता आया है।
पाप-पुण्य क्या है? लोग अब भी नहीं जानते हैं। यही कारण है कि वे निरन्तर पाप कर रहे हैं, उसका भयंकर दण्ड भी उनको भोगना पड़ता है इसलिये सबका पतन हो गया और मानव ईश्वर की महिमा से वञ्चित हो गये हैं।
दृष्टान्त में कही गई उस वफादार चिड़िया की मृत्यु की भांति महर्षि दयानन्द विश्व के उपकार को बलिदान दे गया। आज उसका उत्तराधिकारी आर्य समाज और ग्रन्थ उस अधूरे कार्य को पूर्ण कर रहे हैं। इस प्रकार वह अब भी जीवित है और इसीलिए जीवित है कि हम भी जीवित रह सकें तथा अनन्त काल तक के लिए नया आध्यात्मिक जीवन तथा अन्त में मुक्ति प्राप्त कर सकें परन्तु ये सभी हमें उसी समय प्राप्त हो सकती है जब हम स्पष्ट रूप से आर्य समाज की शरण में आ जावें और उसके सिद्धान्तों के अनुसार उसे मुक्तिदाता स्वीकार कर लें।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark
mavibet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
imajbet güncel
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
imajbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
bahsegel giriş
bahsegel giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betine giriş
betine giriş
betpark giriş
betpark giriş
betine giriş
betine giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
betgaranti
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
imajbet güncel
casibom
casibom
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet güncel giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş