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इसलाम और शाकाहार

क्या झूठी गवाही देना अपराध नहीं है ?

(हमें पूरा विश्ववास है कि इस लेख को पढ़ कर कुछ मुस्लिम पाठक संदेह करेंगे , इसलिए हम पहले उनसे यह सवाल करते हैं ,कुरान में 25 रसूलों का वर्णन है , मुस्लिम सभी पर ईमान रखते है , लेकिन क्या कारण है कि अजान में सिर्फ मुहम्मद के रसूल होने की गवाही दी जाती ,किसी और की क्यों नहीं ?
इसका असली कारण यह है कि मुहम्मद एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने रसूल होने का दवा तो किया था लेकिन जब सन 628 में कुरैश के साथ लिखित संधि हुई थी तो उसमे मुहम्मद ने स्वीकार किया था कि मैं अल्लाह का रसूल नहीं सामान्य व्यक्ति अब्दुल्लाह का पुत्र हूँ )
अक्सर लोग निजी स्वार्थ के लिए या किसी अच्छे व्यक्ति को बुरा और किसी बुरे व्यक्ति को अच्छा साबित करने के लिए झूठ बोला करते है , कुछ भी हो समाज झूठ बोलने वालों पर विश्वास नहीं करता ,क्योंकि झूठ बोलना एक सामाजिक दुर्गुण और अपराध है ,परन्तु जब कोई एक या अनेक व्यक्ति झूठी गवाही देते हैं भारतीय कानून के मुताबिक ऐसा करना दंडनीय अपराध बन जाता है
1-झूठी गवाही देना अपराध है
“धारा 191 में झूठी गवाही का दोषी पाए जाने पर इसी सिलसिले में आईपीसी की धारा 193 में सज़ा यानी दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें मिथ्या साक्ष्य देने वाले को 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक की कैद, ज़ुर्माना या दोनों का प्रावधान है। न्यायिक मामले में 7 वर्ष की सज़ा तो अन्य मामले में 3 वर्ष का दंड दिया जा सकता है। हालांकि इसमें बेल भी हो सकती है और यह एक गैर संज्ञेय अपराध है।झूठी गवाही का दायरा काफी व्यापक है। कई बार आपको किसी अपराध के बारे में आँखों देखी घटना का विवरण देना होता है और ऐसे में इस बात की पूरी संभावना होती है कि आप बढ़ा-चढ़ा कर मनगढ़ंत बातें कर सकते हैं
बता दें कि झूठी गवाही का माध्यम चाहे मौखिक रूप में हो या लिखित रूप में दोनों ही धारा 191 के तहत जुर्म है।
सबसे पहले तो हम स्पष्ट कर देना कहते हैं कि हमें कानून का कोई ज्ञान नहीं है इसलिए हम यह मुद्दा उन लोगों पर छोड़ते हैं जो कानून की बारीकियों को जानते है .हम मुद्दे को स्पष्ट करने के लिए एक उदहारण देते हैं
2-उदहारण
एक A नामका व्यक्ति रोज पांच बार लोगों को बुला कर किसी ऊँची जगह चिल्ला कर भीड़ इकट्ठी करता है और लोगों के सामने कहता है ,कि “मैं गवाही देता हूँ कि ” ” नामका व्यक्ति राष्ट्रपति का दूत है , जबकि A नामके व्यक्ति ने “B ” को न तो कभी देखा और न उसके पास यह बात साबित करने के लिए कोई दस्तावेज है , स्वाभाविक रूप से सभी कहेंगे कि पहले तो A को गिरफ्तार करो और इसकी गवाही की जाँच करो और गवाही झूठी होने पर इसको उचित दंड दिया जाये ,
3-अजान भी एक झूटी गवाही है
लोगों को पता होना चाहिए कि अजान में चिल्लाने वाले वाक्य कुरान में नहीं हैं फिर भी दिन में पांच बार “मुअज्जिन – ” कर्कश आवाज में चिल्लाता है ,
कान फोड़ू आवाज से दो बार यह शब्द बोलता है ,
(अरबी में “गवाह ” को “शहिद – شاهد ” और गवाही को “शहादह – ٱلشَّهَادَة‎, ” कहा जाता है )

أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ ٱللَّٰهِ
(अश्हदु अन्न मुहम्मदर्रसूलल्लाह )
अर्थात -मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह का रसूल है
I bear witness that Muhammad is the messenger of God.
गौर करने की बात तो यह है कि मुहम्मद को मरे हुए सैकड़ों साल हो गए न तो मुअज्जिन (गवाह ) ने मुहमद को देखा , और न उसके पास मुहमद के रसूल होने का कोई प्रमाण है फिर भी जबर दस्ती गवाही देता है माननीय लखनऊ हाईकोर्ट ने अजान के बारे में कहा है
“वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी दूसरे व्यक्ति को जबरन सुनाने का अधिकार नहीं देती है।”
, यह लेख हमें इस लिए लिखना पड़ा कि हमें पता चला मुहम्मद ने मुहम्मद ने सन 628 में हुदैबिया के लिखित समझौते में स्वीकार किया था कि “मैं अल्लाह का रसूल नहीं हूँ ” मैं तो अब्दुल्लाह का पुत्र साधारण व्यक्ति हूँ।
इसके बारे में हमने विस्तार से अपने लेख संख्या 398 में पूरी जानकारी दी थी ,लेख का शीर्षक था ,
“जब मुहम्मद ने कबूला कि मैं रसूलल्लाह नहीं !
شروط الصّلح
فلما اتفق الطرفان على الصلح دعا رسول الله علي بن أبي طالب فقال له: ” اكتب: بسم الله الرحمن الرحيم “.
فقال سهيل: أما الرحمن، فما أدري ما هو؟ ولكن اكتب: باسمك اللهم كما كنت تكتب.
فقال المسلمون: والله لا نكتبها إلا بسم الله الرحمن الرحيم
فقال: ” اكتب: باسمك اللهم ”
ثم قال: ” اكتب: هذا ما قاضى عليه محمد رسول الله ”
فقال سهيل: والله لو نعلم أنك رسول الله ما صددناك عن البيت، ولكن اكتب محمد بن عبد الله
فقال: ” إني رسول الله، وإن كذبتموني اكتب محمد بن عبد الله “.

ثم تمت كتابة الصحيفة على الشروط التالية:
https://ar.wikipedia.org/wiki/%D8%B5%D9%84%D8%AD_%D8%A7%D9%84%D8%AD%D8%AF%D9%8A%D8%A8%D9%8A%D8%A9
नॉट -इस लेख में हमने हिंदी अंगरेजी में साबुत दिया था की मुहम्मद ने काबुल किया था कि मैं अल्लाह का रसूल नहीं , फिर भी हम अरबी साईट की लिंक दे रहे हैं ताकि कोई शंका न रहे ,इस संधि की फोटो गूगल में सर्च करके मिल जाएगी असली इस्ताम्बुल के संग्रहालय में राखी है
यह अच्छी बात है क़ि मस्जिदों से लाऊडस्पीकर से अजान देते को अदालत ने इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं माना है ” इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद से अजान मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक भाग नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब स्पीकर नहीं था तब भी अजान होती थी। इसलिए यह नहीं कह सकते कि स्पीकर से अजान रोकना अनुच्छेद 25 के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 स्वस्थ जीवन का अधिकार देती है।सबसे अधिक ध्यान देने की बात यह है कि
वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी दूसरे व्यक्ति को जबरन सुनाने का अधिकार नहीं देती है।
2–विचारणीय प्रश्न
हम सभी प्रबुद्ध पाठकों के समक्ष अजान से सम्बन्धी कुछ प्रश्न दे रहे हैं इन पर गौर करें ,
1.कुरान में ऐसी गवाही देने का हुक्म कहाँ है ?
2.तुम्हें गवाही देने की जरुरत क्यों पड़ी ?
3-तुमसे गवाही कौन मांग रहा है ? और बिना मांगे गवाही क्यों दे रहे हो ?
3-मुहम्मद को गवाही की जरुरत क्यों पड़ी ?
इसका असली कारन यह है कि “अल्लाह ने मुहम्मद के साथ धोखा किया था , क्योंकि जब हुदैबिया की सुलह में मुद्दों में मुहम्मद के रसूल होने की बात आयी और मुहम्मद कोई सबूत नहीं कर पाया तो लोग मुहम्मद की हंसी उड़ाने लगे , अगर उसी समय अल्लाह किसी फ़रिश्ते से मुहम्मद के रसूल होने का सर्टिफिकेट भेज देता तो मुहम्मद की इज्जत बच जाती , लेकिन सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होने पर भी अल्लाह ने मुहम्मद की मदद नहीं की , और ऐन समय गायब हो गया , मजबूर होकर मुहम्मद ने अपने लोगों को हुक्म दिया की आगे से जब भी नमाज हो तो अजान में यह वाक्य जोर जोर से जरुर बोला करो की मैं गवाही देता हूँ की मुहम्मद अल्लाह का रसूल है ,
तब से आजतक मुस्लमान पूरी दुनियां में यही झूठी गवाही देते आ रहे हैं , और चूँकि भारत प्रजातंत्र है यहाँ कानून का राज चलता है शरीयत का नहीं ,इसलिए हमारी मांग है कि ऐसे झूठी गवाही देने वालों पर कानून के अनुसार उचित कार्यवाही की जाये ,

हम इस छोटे से लेख में माद्यम से उन सभी धर्म प्रेमी ( चाहे आर्यसमाजी हों या सनातनी ) जो कानून के जानकर भी हों निवेदन करते है की जूठी गवाही देने वालों के विरुद्ध याचिका जरूर करें , ऐसे लोगों का आसान करने के हमने पहले ही एक लेख पोस्ट कर दिया हैNO 398 ,जिसका शीर्षक है
” जब मुहम्मद ने कबूला कि मैं रसूलल्लाह नहीं !

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ब्रजनंदन शर्मा ( वरिष्ठ लेखक एवं समीक्षक)

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