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उगता भारत न्यूज़

वीर संन्यासी स्वामी श्रद्धानंद की 166 वी जयंती पर किया नमन : स्वामी श्रद्धानंद वीरता की मिसाल थे-अनिल आर्य

वेद ज्ञान द्वारा ही हम प्रभु तक पहुंच सकते हैं -विदुषी कृष्णा मुखी

मंगलवार, 22 फरवरी 2022, केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षा विद स्वामी श्रद्धानंद जी का 166 वा जन्मोत्सव मनाया गया । उल्लेखनीय है कि स्वामी जी का जन्म 22 फरवरी 1856 को तलवन,जालन्धर,पंजाब में हुआ था । साथ ही वैदिक विदुषी कृष्णा मुखी द्वारा “वेद मंत्र एक पहेली” विषय पर सारगर्भित उदबोधन दिया । यह कोरोना काल में परिषद् का 363 वां राष्ट्रीय वेबिनार था।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी वीरता की मिसाल थे, जब दिल्ली के चांदनी चौक पर रौलट एक्ट के विरुद्ध प्रदर्शन किया गया आपने उसका नेतृत्व किया और अंग्रेजी सिपाहियों से कहा मैं खड़ा हूँ गोली चलाओ,इसी प्रकार जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद भयभीत पंजाब में स्वागताध्यक्ष बनकर कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन अमृतसर में सफल बनाया । शिक्षा के क्षेत्र में हहरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की इसके लिए अपनी प्रेस व कोठी भी बेच दी । हिन्दू एक तरफा मुसलमान बन रहे थे उन्होंने शुद्धि सभा की स्थापना कर घर वापिसी का मार्ग प्रशस्त किया जिसके लिए अब्दुल रशीद नामक मुसलमान ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी ।उनका बलिदान भवन दिल्ली के नया बाजार में दयनीय स्थिति उपेक्षित पड़ा है, उसकी सरकार ने आज तक कोई सुधबुध नहीं ली । कवि कहता है-उनकी तुर्बत पर नहीं एक भी दिया जिनके खून से जले थे चिरागे वतन, आज महकते है उनके मकबरे जिन्होंने बेचे थे शहीदों के कफन” आज आवश्यकता है की ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन को नयी पीढ़ी को पढ़ाया जाए ।
वैदिक विदुषी कृष्णा मुखी ने कहा की वेद मंत्रों द्वारा ही हम प्रभु के समीप पहुंच सकते हैं । ओ३म् ये त्रिषप्ता: परियन्ति विश्वा रूपाणी बिभ्रत:।वाचस्पतिर्बला तेषाम् तन्वो दधातु मे,मन्त्र को बोलकर अपना उद्बोधन प्रारंभ किया उन्होंने बताया की तीन और सात के खेल से इस संसार की रचना हुई है।परम तत्व से प्रकृति में तीन गुणों की उत्पत्ति हुई सत्व,रज और तम। प्रकृति से ही महत् उत्पन्न हुआ जिसमें उक्त गुणों की साम्यता और प्रधानता थी। सत्व शांत और स्थिर है।रज क्रियाशील है और तम विस्फोटक है। उस एक परमतत्व के प्रकृति तत्व में ही उक्त तीनों के टकराव से सृष्टि होती गई।सर्वप्रथम महत् उत्पन्न हुआ, जिसे बुद्धि कहते हैं। बुद्धि प्रकृति का अचेतन या सूक्ष्म तत्व है। महत् या बुद्ध‍ि से अहंकार। अहंकार के भी कई उप भाग है। यह व्यक्ति का तत्व है। व्यक्ति अर्थात जो व्यक्त हो रहा है सत्व, रज और तम में। सत्व से मनस, पांच इंद्रियां, पांच कार्मेंद्रियां जन्मीं। तम से पंचतन्मात्रा, पंचमहाभूत (आकाश, अग्न‍ि, वायु, जल और ग्रह-नक्षत्र) जन्मे। इसके पश्चात ईश्वर ने सृष्टि का संविधान 4 ऋषियों के माध्यम से संसार में भेजा और वह संविधान चार वेदों के रूप में है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। हमने वेद को ना पढ़ कर के प्रकृति का दोहन किया है इसीलिए हम आज दुखी हैं अष्टांग योग के यम नियमों का पालन करके हम स्वस्थ रह सकते हैं और इसी शरीर से तीन,सात से बनी प्रकृति के सौंदर्य को निहारते निहारते जीवन के प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए ईश्वर से हम अपना वेद द्वारा ज्ञान को अर्जित करें,शरीर को स्वस्थ रखें, तभी हम उस तक पहुंच सकेंगे।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद पहले ऐसे गैर मुस्लिम व्यक्ति थे जिन्होंने दिल्ली के जामा मस्जिद से वेद मंत्रों द्वारा अपना हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश दिया । उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए देहरादून व जालंधर में महिला विद्यालय की शुरुआत की ।

मुख्य अतिथि मधु बेदी व अध्यक्ष सुनीता रसोत्रा ने भी अपने ओजस्वी विचार रखे ।
गायक रविन्द्र गुप्ता, नरेंद्र आर्य सुमन,रचना वर्मा,वेद भगत,सुदेश आर्या,कमला हंस,प्रतिभा कटारिया, किरण शर्मा, कुसुम भंडारी आदि के मधुर भजन हुए ।

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