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भारत मे गाय काटने का इतिहास

26oct_cowअंग्रेज़ बहुत चालक थे ! किसी भीगलत काम को करने से पहले उसको कानून बना देते थे फिर करते थे और कहते थे हम तो कानून का पालन कर रहे हैं !!भारत मे पहला गौ का कत्लखाना 1707 ईस्वी ने रॉबर्ट क्लाएव ने खोला था और उसमे रोज की 32 से 35 हजार गाय काटी जाती थी ! तो कत्लखाने के size का अंदाजा लगा सकते हैं ! और तब हाथ से गाय काटी जाती थे ! तो सोच सकते हैं कितने कसाई उन्होने रखे होंगे !आजादी के 5 साल बाद 1952 मे पहली बार संसद मे ये बात उठी कि गौ रक्षा होनी चाहिए ! गाय के सभी कत्लखाने जो भारत में अंग्रेज़ो ने शुरू किए थे बंद होने चाहिए ! और यही गांधी जी कि आत्मा को यहीश्र्द्धांजलि होगी ! क्यूकि ये उनके आजाद भारत के सपनों मे से पहले नंबर पर था !तो गांधी के परम शिष्य नेहरू खड़ा हुआ और बोला चलो ठीक है अगरगौ रक्षा का कानून बनना चाहिए तो इस पर संसद मे प्रस्ताव आना चाहिए ! तो संसद मे एक सांसद हुआ करते थे महावीर त्यागी वो आर्य समाजी थे और सोनीपत से अकेले चुनाव लड़ा करते थे !सबसे पहला चुनाव 1952 मे हुआ और वो बहुत भयंकर वोटो से जीत कर आए थे !तो महावीर त्यागी ने कहा ठीक मैं अपने नाम से प्रस्ताव लाता हूँ ! तो प्रस्ताव आया उस पर बहस हुई ! बहस के बाद तय किया कि वोट किया जाय इस पर ! तो वोट करने का दिन आया ! तब पंडित नेहरू ने एक ब्यान दिया !जो लोकसभा के रेकॉर्ड मे है आप चाहे तो पढ़ सकते हैं ! नेहरू ने कहा अगर ये प्रस्ताव पारित हुआ तो मैं शाम को इस्तीफा दे दूंगा !मतलब ??गौ रक्षा अगर हो गई इस देश मे! तो मैं प्रधानमंत्री नहीं रहूँगा !प्रणाम क्या हुआ जो कांग्रेसी नेता संसद मे गौ रक्षा के लिए वोट डालने को तैयार हुए थे नेहरू का ये वाक्य सुनते ही सब पलट गए !

तो उस जमाने मे क्या होता था कि नेहरू जी अगर पद छोड़दे तो क्या होगा ?? क्यूंकि वल्बभाई पटेल का स्वर्गवास हो चुका था !तो कांग्रेसी नेताओ मे चिंता रहती थी कि अगर नेहरू जी भी चलेगे फिर पार्टी का क्या होगा और पता नही अगली बार जीतेंगे या नहीं जीतेंगे ! और उस समय ऐसी बात चलती थी nehru is india india is नेहरू !(और ये कोंग्रेसीओ कि आदतहै indra is india india is indra )तो बाकी कोंग्रेसी पलट गए और संसद मे हंगामा कर दिया और गौ रक्षा के कानून पर वोट नहीं हुआ!और अगले दिन महावीर त्यागी को सब ने मजबूर कर दिया और उनको प्रस्ताव वापिस लेना पड़ा !महावीर त्यागी ने प्रस्ताव वापिस लेते समय भाषण किया और बहुत ही जबर्दस्त भाषण किया ! उन्होने कहा पंडित नेहरू मैं तुमको याद दिलाता हूँ !कि आप गांधी जी के परम शिष्य है और गांधी जी ने कहा था भारत आजाद होने के बाद जब पहली सरकार बनेगी तो पहला कानून गौ रक्षा का बनेगा ! अब आप ही इस से हट रहे है तो हम कैसे माने कि आप गांधी जी के परम शिष्य है ???और उन्होने कहा मैं आपको आपके पुराने भाषणो कि याद दिलाता हूँ! जो आपने कई बार अलग अलग जगह पर दिये है ! और सबमे एक ही बात काही है कि मुझे कत्लखानों से घिन्न आते इन सबको तो एक मिनट मे बंद करना चाहिए ! मेरी आत्मा घबराती है ये आपने कितनी बार कहा लेकिन जब कानून बनाने का समय आया तब आपही अपनी बात से पलट रहे है ?!नेहरू ने इन सब बातों को कोई जवाब नहीं दिया ! और चुप बैठा रहा !और बात आई गई हो गई ! फिर एक दिन 1956 मे नेहरू ने सभी मुख्य मंत्रियो को एक चिठी लिखी वो भी संसद के रेकॉर्ड मे है ! अब नेहरू का कौन सा स्वरूप सही था और कौन सा गलत ! ये तय करने का समयआ गया हैं !जब वे गांधी जी के साथ मंचपर होते थे तब भाषण करते थे कि क्त्ल्खनों के आगे से गुजरता हूँ तो घिन्न आती है आत्मा चीखती है ! ये सभी क्त्ल्खने जल्द बंद होने चाहिए !और जब वे प्र्धानमतरी बनते है तो मुख्य मंत्रियो को चिठी लिखते हैं !

कि गाय का कत्ल बंद मत करो क्यूंकी इससे विदेशी मुद्रा मिलती है !उस पत्र का अंतिम वाक्य बहुत खतरनाक था उसमे नेहरू लिख रहा है मान लो हमने गाय ह्त्याबंद करवा दी ! और गौ रक्षा होने लगी तो सारी दुनिया हम पर हसे गई कि हम भारत को 18 व शताब्दी मे ले जारहे हैं ! !अर्थात नेहरू को ये लगता था कि गाय का कत्ल होने से देश 21 वी शताब्दी मे जा रहा है ! और गौ रक्षा होने से 18 वी शताब्दी कि और जाएगा ! राजीव भाई का हरद्य इस पत्र को पढ़ कर बहुत दुखी हुआ!राजीव भाई के एक बहुत अच्छे मित्र थे उनका नाम था रवि राय लोकसभा के अधक्षय रह चुके थे!उनकी मदद से ये पत्र मिला ! संसद कि लाएब्रेरी मे से ! और उसकी फोटो कॉपी रख ली !!अब आगे कि बात करे नेहरू के बाद से आजतक गाय ह्त्या रोकने का बिल पास क्यूँ नहीं हुआ !???दस्तावेज़ बताते हैं इसके बाद के दो ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिनहोने पूरी ईमानदारी से गौ ह्त्या रोकने का कानून लाने की कोशिश की ! उनमे से एक का नाम था श्री लाल बहादुर शास्त्री और दूसरे श्री मुरार जी देसाई !!श्री मुरार जी भाई ये कानून पास करवा पाते कि उनकी सरकार गिर गई! या दूसरे शब्दो मे कहे सरकार गिरा दी गई ! क्योंकि वही एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री थे ! जिनहोने बहुत हिम्मत वाला काम किया था अमेरिका कि कंपनी coca cola को 3 दिन का नोटिस दिया और भारत से भागा दिया ! और ऐसा नोटिस केवल coco cola को नहीं बल्कि एक और बड़ी विदेशी कंपनी hul(hindustaan uniliver ) को भी दिया और ऐसे करते करते काफी विदेशी कंपनियो को नोटिस जारी किया कि जल्दी से जल्दी तुम भारत छोड़ दो !इसके इलवा उन्होने एक और बढ़ियाकाम किया था गुजरात मे शराब पर प्रतिबंध लगा दिया ! और वो आजतक है वो बात अलग है कि black मे कहींशराब मिल जाती है पर कानूनी रूप से प्रतिबंध है ! और उनहोने कहा था ऐसा मैं पूरा भारत मे करूंगा और जल्दी से गौ रक्षा का कानून भी लाऊँगा और गौ ह्त्या करने वाले को कम से कम फांसी कि सजा होगी !तो देश मे शराब बेचने वाले,गौ ह्त्या करने वाले और विदेशी कंपनिया वाले !

ये तीनों l lobby सरकार के खिलाफ थी इन तीनों ने मिल कर कोई शयद्त्र रचा होगा जिससे मुरार जी भाई की सरकार गिर गई !!लालबहादुर शास्त्री जी ने भी एकबार गौ ह्त्या का कानून बनाना चाहा पर वो ताशबंद गए ! और फिर कभी जीवित वापिस नहीं लोटे !!और अंत 2003 मे श्री अटल बिहारी वाजपायी की NDA सरकार ने गौ ह्त्या पर सुबह संसद मे बिल पेश किया और शाम को वापिस ले लिया !!क्यू ??अटल जी की सरकार को उस समय दो पार्टिया समर्थन कर रही थी एक थी तेलगु देशम और दूसरी त्रिमूलकॉंग्रेस ! दोनों ने लोकसभा मे कहा अगर गौ ह्त्या पर कानून पास हुआ तो समर्थन वापिस !!बाहर मीडिया वालों ने ममता बेनर्जी से पूछा की आप गौ ह्त्या क्यूँ नहीं बंद होने देना चाहती ???ममता बेनर्जी ने कहा गाय का मांस खाना मे मौलिक अधिकार हैकोई कैसे रोक सकता है ??तो किसी ने कहा आप तो ब्राह्मण है तो ममता ने कहा बेशक हूँ !!तो अंत वाजपाई जी को अपनी सरकार बचाना गौ ह्त्या रोकने से ज्यादा बड़ा लगा ! और उन्होने बिल वापिस ले लिया !फिर 2003 के बाद कॉंग्रेस आ गई ! इससे तो वैसे कोई अपेक्षा नहीं कि जा सकती ! गाय ह्त्या रोकना तो दूर मनमोहन जी ने भारत को दुनिया मे गाय का मांस निर्यात करने वाले देशो कि सूची मे तीसरे नंबर पर ला दिया है !!वर्तमान भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक गायों की हत्या होती है तथा एक लाख टन गौमांस विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।संविधान में किये गए वादे और अनेकों सरकारों द्वारा बार-बासर किये गये कोरे आश्वासन-===गौ रक्षा एवं विकास के लिए तुरन्त उठाये जाने योग्य क़दम।1.गौरक्षा एवं विकास विषय को समवर्ती सूची में लाकरकेन्द्रीय कानून बनाकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाये तथा किसी भी आयु की गाय, साँड, बछिया अथवा बैल की हत्या मनुष्य की हत्या केबराबर दंडनीय अपराध घोषित किया जाये तथा गौमांस का निर्यात अविलम्ब बन्द किया जाये।2.गौरक्षा एवं हित के लिए बाकायदा केन्द्रीय मंत्रालय एवं मंत्री नियुक्त किया जाना चाहिए।3.प्रत्येक ग्राम व नगर के पाय पर्याप्त गोचर भूमि हो।4.सरकारी पशु चिकित्सालयोंतथा गर्भादान केन्द्रों में विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भादान अविलम्ब बन्द किया जाये।5.गौवंश के व्यापार को सरकार अपने हाथों में लेकर स्वायशासी निगम बनाकर उनके हाथों में दिया जाये।6 गौवंश से प्राप्त तमाम औषद्यीयों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ साथ उसके करमुक्तभी किया जाये जिससे लोग गायों की सेवा कर उनसे अधिकाधिक औषद्यीयां बनाकर जनसेवा कर सकें क्योंकि गौमूत्रा समेत गाय के दूध एवं अन्य उत्पादों से कई असाध्य बीमारियों के शत प्रतिशत सही होने के कई प्रमाण सामने आ चुके हैं1.गौ को राष्ट्रमाता अथवा राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।8 गौरक्षा, संरक्षण पालन-पोषण की व्यवस्था को शैक्षणिक पाठयक्रम में शामिल किये जाने की भी सुविधा प्राप्त कराई जाये।1.गायों की व्यापक देखरेख करने के लिए चिकित्सालयों के अलावा भारत के प्रत्येक नगर मेंएक विभाग खोला जाये जिसमें अधिकारी टोल, सड़कअथवा अन्य स्थानों पर मिलने वाली लावारिस गौ कोगौशालाओं में ले जाने की व्यवस्था कर सकें। जिनसे वह किसी गौहत्यारें के चंगुल में न पड़ें।… यदि हम वेद पुराणों की बात को मानें तब भी कई बातें आज सच साबित हो रही हैं। अनेक पुराणोंमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि गौहत्या से वातावरण में तनाव पैदा होता है। सभी देवी-देवता, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि और परमात्मा का कोप मानव और पर्यावरण व वातावरण पर पड़ता हैजिससे सूखा, बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें आती हैं। अत:माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्रातिशीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में ले ।

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