उन्हें राय न दें जो गंभीर न हों

chintan at dandiराय वही है जो वक्त जरूरत अत्यन्त आवश्यक समझकर दी जाए और मार्गदर्शन करते हुए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बने। असल में यही ज्ञान का सदुपयोग है। आमतौर पर बिना मांगे जो दी जाती है वह राय न होकर बकवास ही है और इसका कोई उपयोग नहीं है।

यही कारण है कि सदियों से यही कहा जाता रहा है कि राय उन्हीं को दी जानी चाहिए जो जरूरतमन्द हों तथा किसी भी प्रकार की राय अपेक्षित हो। ऎसे लोगों को कोई भी सलाह दी जाए तो वे उसका समय पर पालन भी करते हैं, और लाभ भी उठाते हैं।

इसके विपरीत बात-बात में राय दिया जाना बकवास का ही एक आत्मप्रशंसित और परिष्कृत रूप है। ऎसा करने वाले लोगों की अपने यहाँ भरमार है और कहा भी जाता है कि गली-गली रायचंद बिराजमान हैं जो बिना कुछ लिए-दिए राय देते हैं, जिन्हें जरूरत नहीं उन्हें भी राय देते हैं और शेखी बघारते हैं।

हम आम इंसानों का ज्यादातर समय राय देने में ही व्यतीत होता है। यह एक ऎसा काम है जिसके लिए किसी हुनर की जरूरत नहीं होती है। जो लोग ‘अधजल गगरी …’ होते हैं उनके साथ ही मूर्खों और बातूनियों के लिए राय प्रदान करते रहना अपने अस्तित्व और विद्वत्ता दोनों के प्रमाणीकरण का सबसे बड़ा और मुफतिया जरिया है।

लोक मनोविज्ञान और परंपराओं के अनुसार राय उसे ही दी जानी चाहिए जो उसके लिए तितिक्षा रखता हो, तीव्र व्याकुल और अत्यन्त जरूरतमन्द हो,संकटावस्था से घिरा हो और उसे विषम परिस्थितियों से बचाना हो, और वह भी मांगे जाने पर। बिना मांगे राय दिए जाने की न कहीं कोई परंपरा रही है, न कोई विधान ही। बल्कि यहाँ तक कहा गया है कि राय अपने आप में मंत्र का काम करती है और इसे अपात्रों को नहीं दिया जाना चाहिए, वहीं बिना मांगे दी जाने वाली राय भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ती।

इसके साथ ही सबसे बड़ी बात यह भी है कि राय और मार्गदर्शन उन्हें ही दिया जाना चाहिए जो लोग इसके प्रति जिज्ञासु और गंभीर हों, तभी वे राय को आत्मसात कर इसका पूरा-पूरा लाभ ले पाने में समर्थ होते हैं अन्यथा छुटभैयों और बकवासी लोगों को राय देने का न कोई अर्थ है, न औचित्य ही।

राय देने और लेने वाला दोनों पात्र होने चाहिएं तभी किसी बात का वजन संभव है। आजकल अधिकांश लोग समय पर और अच्छी राय अथवा मार्गदर्शन पाने के बावजूद अपनी ही लीक चलते रहते हैं और दुःखी अनुभव करते हैं ।

कई लोग इतने भाग्यशाली और खुशनसीब होते हैं कि उनके पास ऎसे-ऎसे लोग होते हैं जो ज्ञानी, दीर्घ अनुभवी और दिव्य होते हैं लेकिन ऎसे लोग भी अक्सर अनुभवियों की जरूरी सलाह तक को गंभीरता से नहीं लेते हैं और अन्ततः कभी न कभी पछताना ही पड़ता है।

आमतौर पर यह देखा गया है कि कुलीन, संस्कारी, शुचितापूर्ण, सेवाभावी एवं परोपकारी परिवारों से जुड़े लोग अपने व्यक्तित्व निर्माण के प्रति ज्यादा गंभीर होते हैं और इस कारण से ये लोग समाज और परिवेश से जो भी अच्छे विचार या राय मिलती है उन्हें अंगीकार कर व्यक्तित्व को सँवारते हुए अपने भीतर अनूठी सुगंध भर देने में समर्थ हो जाते हैं और इनका आभामण्डल अपने आप हर तरफ दमकता हुआ दिखाई देता है।

दूसरी तरफ जो लोग नीच संसर्ग और मलीन विचारों वाले होते हैं वे अपनी ही अपनी करते रहते हैं चाहे उन्हेंं कोई कितनी ही अच्छी राय उनके भले के लिए देता रहे। जड़ता और यथास्थिति में जीने वाले इन लोगों के व्यक्तित्व के भीतर जाने कैसी दुर्गन्ध छायी रहती है कि ये किसी सुगंध को अंगीकार करने तक को तैयार नहीं होते।

ऎसे लोगों को कोई जीवन भर कितनी ही अच्छी से अच्छी राय भले देता रहे, ये एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकाल ही देते हैं। इस किस्म के लोग जीवन भर दुःखी, मलीन और अभिशप्त रहते हैं और अपने ही अपने संकीर्ण दायरों में घुटते रहने को विवश होते हैं।

श्रेष्ठ इंसान वही है तो किसी भी विषय और मामले में जीवन में एक बार कहीं से भी अच्छी राय पा जाने पर उसका अनुसरण करे। ऎसे ही लोग सफल होते हैं। जिन लोगों को किसी एक अच्छे काम के लिए बार-बार राय देनी पड़े, हर बार गलती करने पर उलाहना देना पड़े, ऎसे लोगों को राय देने से बचना चाहिए क्योंकि ये लोग अपने ज्ञान और विद्वत्ता की आत्म मुग्धावस्था की खुमारी में जीने के आदी होते हैं और इन लोगों को हमेशा लगता है कि संसार में जो कुछ ज्ञान उन्हें प्राप्त करना था वह कर चुके हैं इसलिए अब किसी कि राय या मार्गदर्शन को अपनाना अपना अपमान है।

ज्ञान और अनुभव जन्य मार्गदर्शन तथा सलाह का दरिया जीवन भर बहता रहता है और पूरी जीवन यात्रा के दौरान जहाँ कहीं कोई अच्छा विचार, श्रेष्ठ राय और सटीक मार्गदर्शन प्राप्त हो, उसे आदर-सम्मान करते हुए ग्रहण करना चाहिए और जीवन में इस प्रकार आत्मसात करना चाहिए कि अगली बार हमें दोबारा इस विषय में किसी से सुनने की आवश्यकता नहीं रहे।

जीवन में पग-पग पर हर पल यही ध्यान रखें कि जहाँ जो कुछ अच्छा है उसे प्राप्त करते जाएं, जो कुछ बुरा है उसका त्याग करते चले जाएं। ये दो बातें जो अपना लेता है उसका ही व्यक्तित्व दमकने, महकने और चहकने लगता है।

—000—

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betnano giriş
vdcasino
Vdcasino giriş
vdcasino giriş
ngsbahis
ngsbahis
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
kolaybet giriş
kolaybet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
casibom giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
runtobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
damabet
casinofast
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vdcasino
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
truvabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
venusbet giriş
venüsbet giriş
venusbet giriş