Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

देवी मैया क्या करे हम असुरों का

durga-525256ab24078_exlनवरात्रि देवी उपासना का वह वार्षिक पर्व है जिसमें हम सभी उस मैया की आराधना करते हैं जो असुरों और आसुरी शक्तियों का संहार कर हमें असीम शांति, शाश्वत आनंद और सुकून देती है। यह नवरात्रि पर्व असुरों के उन्मूलन का संदेश देने वाला वह पर्व है जिसमें अच्छाइयों के विकास एवं विस्तार के साथ ही बुराईयों के समूल विनाश का संकल्प लिया जाता है और साल भर इन बुराइयों और असुरों से लड़ने के लिए ऊर्जा संचय किया जाता है ताकि समय आने पर हम दैवीय शक्तियों और संचित ऊर्जाओं का उपयोग अपने तथा जगत के हित में कर सकेंं।

आमतौर पर देवी उपासना को शत्रुओं पर विजय का प्रतीक ही माना गया है। इस मामले में यह स्पष्ट कर देना काफी है कि शत्रु दो प्रकार के होते हैं। प्रत्यक्ष शत्रु सामने दिखते हैं मगर अप्रत्यक्ष शत्रु सूक्ष्म रूप में हमारे भीतर ही रहा करते हैं। बाहरी और भीतरी दोनों प्रकार के शत्रुओं का समूलोच्छेदन करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जाओं की जरूरत पड़ती है और यह ऊर्जा हमें साधना से प्राप्त करनी होती है।

हममें से अधिकांश लोग सिर्फ बाहरी और भौतिक शत्रुओं से ही परेशान होने और उन्हीं को समाप्त करने की बात करते हैं और इसी दिशा में प्रयासरत रहा करते हैं जबकि इससे भी ज्यादा ताकतवर शत्रु काम, क्रोध, लोभ, मद, मात्सर्य, राग-द्वेष, पुत्रेषणा, वित्तेषणा और लोकेषणा के रूप में हमारे भीतर ही अंकुरित,पल्लवित होकर आश्रय पाते हैं और वहीं रहकर सारा खेल खेलते रहते हैं।

नवरात्रि में देवी उपासना इन दोनों प्रकार के शत्रुओं के शमन के लिए की जाती है। बाहरी की बजाय भीतरी शत्रु ज्यादा ताकतवर होते हैं क्योंकि हमारे ही सुरक्षित आवरण में उन्हें अभयारण्य का अहसास होता है। इस दृष्टि से हम सभी लोग बुराइयों के अभयारण्य और आसुरी भावों के चिड़ियाघर ही हैं जहाँ जाने कितने सारे असुर सूक्ष्म रूप से अपनी सत्ता जमाये हुए हैं।

ईश्वरीय श्रद्धा और आध्यात्मिक भावों वाले लोग इन भीतरी सूक्ष्म शत्रुओं से न्यूनाधिक रूप में मुक्त रह सकते हैं लेकिन हम जैसे लोभी और सांसारिक जीवों का इन आसुरी भावों से मुक्त हो पाना कठिन जरूर है, असंभव बिल्कुल नहीं।

नवरात्रि वह अवसर है जब हम अपने चित्त से इन सूक्ष्म असुरों की सफाई कर दैवीय तत्व की स्थापना के लिए अनुकूल माहौल व भावभूमि बनाते हैं। हम सभी लोग दैवी उपासना के इस महापर्व को अपने-अपने ढंग से औपचारिकताओं के साथ पूरा करने लगे हैं। इसके मर्म को समझ पाना अब हमारे बस में नहीं रहा, या यों कहें कि हमें इससे कोई सरोकार नहीं है।

नवरात्रि के माध्यम से लोग हमें दैवी उपासक, सिद्ध, साधक और तपस्वी मानने लग जाएं, इससे हमारे जायज-नाजायज, सफेद-काले धंधे फलते-फूलते रहें,भोग-विलासिता और समृद्धि का ग्राफ बढ़ता रहे, हमें धर्म का अभेद्य और आकर्षक सुरक्षा कवच मिल जाए और उस पैमाने की प्रतिष्ठा मिल जाए, जो सामान्यों के भाग में नहीं होती। इससे ज्यादा देवी से हमारी शायद ही कोई प्रार्थना होती होगी।

जगत के संसाधनों के लिए हम दैवी को भजने लगे हैं लेकिन जिस दैवी का सान्निध्य प्राप्त होने मात्र से लौकिक-अलौकिक सब कुछ प्राप्त हो जाता है, उस देवी को नहीं चाहते। हमारी चाहना बस इतनी सी हो गई है कि देवी हमारी इच्छाएं पूरी करती रहें, जैसे कि देवी को हमने कोई ठेका दे रखा हो, जिसमें थोड़ा पूजा-पाठ और मंत्रजाप कर लो, और उसी के बूते सारे काम कराते रहो।

देवी साधना के लिए दशकों से साधना, उपासना, दुर्गासप्तशती के पाठ, देवी भागवत, नवार्ण मंत्र जाप, जवेरा स्थापना, गरबे, पदयात्राएं और भी जाने क्या-क्या करते आ रहे हैं। इसके बावजूद इन अनुष्ठानों का मर्म समझने की हमने कोई ईमानदार कोशिश कभी नहीं की। दुर्गा सप्तशती के चरित्रों का गान हम करते आए हैं, मगर इसका भावार्थ समझने और जीवन में उतारने के लिए हमारी कभी इच्छा नहीं हुई। हो भी कैसे, हमें अनुष्ठान मण्डप में आने वाले और हमें कुछ न कुछ दे जाने वाले वीआईपी यजमान का प्रसन्न चेहरा, भौतिक संसाधन और दान-दक्षिणा ही दिखते हैं, इसके अलावा न हमें देवी दिखती है, न देवी माहात्म्य।

हमें यह जानकर घोर आश्चर्य होगा कि असुरों की जिन-जिन हरकतों से तंग आकर, हैरान-परेशान होकर देवताओं ने विनम्र और करुण भाव से स्तुति कर दैवी मैया को अवतार लेने के लिए विवश किया था, आवाहन किया था, वे सारे कर्म हम लोग आज पूरी स्वच्छन्दता से और बेखौफ होकर कर रहे हैं। उन दिनों कुछ मर्यादाओं और अनुशासनों का भय भी था, हमारी तरह तटस्थ, नपुंसक और कायर लोग नहीं थे जो अपने स्वार्थ के कारण गूंगे-बहरे और उदासीन होकर सब कुछ बर्दाश्त कर लें।

इसके बावजूद जब असुरों की हरकतें नहीं थमीं तब देवी को पुकारा गया। आज उससे भी अधिक भयावह स्थितियां हमारे सामने हैं। सभी किस्मों के असुराेंं की हरकतें परवान पर हैं। किसम-किसम के चेहरे-मोहरों और वेशभूषा में ढेरों प्रजातियों के राक्षस हमारे आस-पास से लेकर सीमाओं तक बिखरे पड़े हैं, और हम जैसे लोगों का बाहुल्य है जिनकी वृत्तियाँ पुराने जमाने के असुरों तक को लजा देती हैं।

आज हममें और असुरों में कहाँ कोई फर्क रह गया है। भांति-भांति के लिबासों में फबने वाले हम लोग कहाँ असुरों से कम हैं। हमारी तमाम हरकतों में आसुरी भाव झलकता है। अपने स्वार्थ के लिए हम किसी का कितना ही नुकसान या कि हत्या तक कर देने को तत्पर रहते हैं,  गौरक्षा का धर्म भुलाकर गौहत्याओं को चुपचाप देख रहे हैं, हम राष्ट्र को परम वैभव पर लाने और राष्ट्रभक्ति की बातें करते हैं मगर हमारा नियंत्रण अपने पनपाये असुरों तक पर नहीं रहता,  स्त्री की लज्जा हम बचा नहीं पा रहे हैं, जिन कामों के लिए हमें पूरा पैसा मिलता है, उनके लिए भी हम रिश्वत और भ्रष्टाचार में रमे हुए हैं, एक-दूसरे को नीचे गिराकर खुद को ऊँचा दिखाने के लिए हमने क्या कुछ बाकी रखा है।

पैसा ही हमारे लिए परमेश्वर और कुर्सी ही परमेश्वरी है। मद्यमान, माँसाहार, व्यभिचार, तामसिक खान-पान और व्यवहार हमने अपना लिया है, देर रात जगने, सवेरे देर से उठने, धर्म के नाम पर धींगामस्ती और आडम्बरों का प्रदर्शन करने, शोरगुल धर्म को अपना कर शांति और आनंद छीनने, गंगा को प्रदूषित करने, धर्म धामों को बिजनैस सेंटर बना डालने, मन्दिरों, मूर्तियों और शिलापूजनों, अनुष्ठानों आदि के नाम पर पैसा बनाने, जरूरतमन्दों और गरीबों की अवज्ञा,हराम का खान-पान और हराम की कमाई करने, लूट-खसोट के लिए समूह बनाकर हमला करने, दूसरों की कमजोरियों को जानकर ब्लेकमेलिंग, अपने स्वार्थों के लिए लूट-पाट, बलात्कार, गैंगरेप, बहुरूपिया जेहाद, अतिक्रमण, दूसरों की जमीन-जायदाद हड़पकर अपने नाम कर डालने, माफियाओं सा व्यवहार और न जाने कौन-कौन सी हरकतें हम कर रहे हैं जो असुरों के व्यवहार से भी बढ़कर हो गई हैं।

हम थोड़ा सा गंभीर होकर चिंतन करें तो साफ-साफ सामने आएगा कि हम जिन बुराइयों और राक्षसों से मुक्ति दिलाने के लिए दैवी मैया के ये ढेर सारे अनुष्ठान और जतन कर रहे हैं, सच में यदि देवी जागृत हो गई तो सबसे पहले हमारा ही संहार होने वाला है क्योंकि देवी जिन असुरों का संहार करती है, उन असुरों से भी हम कई कदम आगे बढ़ गए हैं।

संभव है काफी सारे लोग सात्विक और शुचितापूर्ण हों, उन्हें दैवी मैया का वरदान प्राप्त हो सकता है, मगर हम सभी के मामले में दैवी मैया खुद असमंजस में है कि वह हमारी भक्ति को ढोंग और जीवन चलाने का धंधा या अभिनय मान कर हमें बख्श दे अथवा हमारे मंत्रों के कथनों की रक्षा करे। जिस दिन देवी ने हमारी भक्ति को गंभीरता से ले लिया, तब हमारी खैर नहीं, क्योंकि हमसे बड़े असुर और कौन हो सकते हैं। और देवी का जागरण तो होता ही असुरों के संहार के लिए है।

—000—

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
meritking giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
meybet
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meritbet giriş
meritbet giriş
vaycasino giriş
piabellacasino giriş
piabellacasino giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
pokerklas
pokerklas
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
pokerklas
pokerklas
hititbet giriş
Pokerklas giriş
pokerklas
pokerklas
hititbet
hititbet
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betorder
betorder
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
timebet
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
meybet
meybet
vdcasino
vdcasino
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
meybet
meybet
betcio giriş
betcio giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
meybet
meybet
harbiwin giriş
harbiwin giriş
meybet
betnano giriş
interbahis giriş
interbahis giriş