राष्‍ट्रपति भवन में तुलसी स्मृति ग्रंथ का लोकार्पण

 भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाने में अहिंसा और अनेकांत के सिद्धांत उपयोगी: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

         नई दिल्ली, 26 नवंबर। राष्‍ट्रपति भवन ऑडिटोरियम में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी एवं जैन तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम आचार्य श्री महाश्रवण के सानिध्य में अणुव्रत आन्दोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसी के जन्मशताब्‍दी वर्ष पर आचार्य तुलसी की स्मृति में प्रकाशित तुलसी स्मृति-ग्रंथ का विमोचन समारोह आयोजित हुआ। राज्यसभा सदस्य और भारतीय संस्‍कृतिक परिषद के चेयरमैन डॉ. करण सिंह ने श्री प्रणब मुखर्जी को तुलसी स्मृति ग्रंथ की प्रथम प्रति भेंट की।

           इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि मैं इस ग्रंथ को लोकार्पित करके प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं और इस सराहनीय कार्य संपादन में लगे श्रम को नमन करता हूं। भारत की गौरवशाली आध्‍या‍त्‍मिक सांस्कृतिक परम्‍परा को आगे बढ़ाने में भगवान महावीर के अहिंसा और अनेकान्त के सिद्धां‍त उपयोगी रहे। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए आचार्य भिक्षु ने धर्म व आध्‍यात्‍म की सत्यता बताई और तेरापंथ का स्वत: जन्म हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य तुलसी बहुआयामी व्यक्‍तित्व के धनी थे, उन्होंनें शान्तिदूत और प्रकाशस्‍तम्भ बनकर भारत के विकास में अहम योगदान दिया। उन्होंनें एक लाख किलोमीटर से ज्‍यादा की पदयात्राओं द्वारा भारत के अन्‍तिम ग्रामीण से लेकर राष्ट्रपति भवन तक आत्मशुद्धि व व्‍यवहार शुद्धि का संदेश दिया।

           जाति प्रथा, पर्दा प्रथा, अछूतप्रथा जैसी कुरीतियों से समाज को छुटकारा दिलाया। वे बहुत श्रेष्ठ वक्ता थे। उनके विचारों से लोगों के जीवन को प्रकाश मिला। उन्‍होंने अशान्‍त विश्व को शान्‍ति का संदेश दिया। जिस पर महात्मा गॉधी ने टिप्पणी लिखी। उनके कार्यों का मूल्यांकन अनेकों सम्मान व पुरस्कारों से किया गया। उन्होंनें अनेक संगठन खडे किये । उनका अणुव्रत आंदोलन विश्‍व को अद्भुत देन है।

            श्री मुखर्जी ने कहा कि उनकी यादों को संजोए तुलसी स्मृति ग्रंथ समाज को आध्यात्म का प्रकाश विश्‍वास देगा। दुनियावी चुनौतियों को सहन करने में मदद करेगा। इससे देश के विकास में मदद मिलेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।

राष्ट्रपति ने दी आचार्य श्री महाश्रमण जी को अहिंसा यात्रा की सफलता की शुभकामनाएं

           राष्‍ट्रपति ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आचार्य श्री महाश्रमण 9 नवंबर 2014 से एक विशेष उद्देश्यों के साथ दिल्ली से अहिंसा यात्रा का प्रारंभ करने जा रहे हैं। मैं इस अहिंसा यात्रा के सफल होने की कामना करता हूं।

           इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि आज से सौ वर्षों पूर्व आचार्य तुलसी जैसे महापुरूष का जन्म हुआ जिसमें सम्पूर्ण मानव जाति के उत्थान के लिए कार्य किया। राष्ट्र को भौतिक, आर्थिक, शैक्षिक, नैतिक व आध्‍यात्‍मिक दिशा में शाश्वत विकास करने का मार्गदर्शन किया। ऐसे इतिहास पुरूष का स्मृति ग्रंथ श्रद्धा व विश्वास की परिणति है। इस ग्रंथ में संकलित हर रचना हर शब्द नए विश्वास का सृजन करेगा। युवाओं का पथप्रदर्शन करेगा।

           समारोह के विशिष्‍ट अतिथि डॉ. करण सिंह ने कहा कि आचार्य तुलसी जीवन भर मूल्यों के लिए कार्य करते रहे। उनका स्मृति ग्रंथ आने वाली पीढियों को विवेक का संदेश देगा। राजस्‍थान के पूर्व मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने युग र‍चयिता आचार्य तुलसी के तुलसी स्मृति ग्रंथ को इतिहास की महान धरोहर बताया। कार्यक्रम में अनेकों साधु-संतों के साथ समाज के अनेकों बुद्धिजीवी व विशिष्‍ट वर्ग उपथित थे।

            स्मृति ग्रंथ के मुख्य संपादक अजय चोपड़ा ने बताया कि आचार्य तुलसी ने मानव समाज को पोषित किया। उनके अलावा दो और महापुरूषों आचार्य श्री महाप्रज्ञ एवं आचार्य श्री महाश्रमण का इस ग्रंथ सम्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है।   प्रवास व्यवस्था समिति के आयोजना संयोजक श्री कन्हैया लाल जैन पटावरी ने आचार्य महाश्रमण के दिल्ली में ऐतिहासिक चातुर्मास की चर्चा की।

           उन्‍होंने बताया कि इस ग्रंथ के दो भाग हैं प्रत्येक भाग में 800 पृष्‍ठ हैं। कुल 10 खण्‍ड व 11 तस्वीरें हैं। 4000 व्‍यक्तियों के विचार आए जिसमें से 700 व्‍यक्तियों के विचार लगे हैं।

           सम्पादक मण्‍डल के वरिष्ठ सदस्य बालकवि बैरागी ने कहा कि विचारों के आधार पर यह महावजनदार ग्रंथ है। भारत में हर जाति वर्ग के लोगों का इसे अपने गर्भव‍ती बहू-बेटियों को देना चाहिए, ताकि धरती पर फिर से महावीर-तुलसी पैदा हो सकें। बालकवि बैरागी ने शीघ्रातिशीघ्र अणुव्रत एक्सप्रेस ट्रेन शुरूआत की भी राष्ट्रपति से अपील की।

           कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। स्वागत अभिभाषण तुलसी जन्मशताब्दी समारोह के संयोजक श्री कमल दुग्‍गड ने किया। बालकवि बैरागी ने आभार अपनी कविता की पंक्तियों के रूप में व्‍यक्‍त किया और आव्‍हान के रूप में कहा –

            धन्य है वह कोख, जिसमें लाल तुलसी सा पला।

           मात्र 11 वर्ष का बालक हवेली से निकल पैदल चला।

           उस सुकोमल दो पगों ने दे दिया, एक पथ नया ।

           आज जिस पर दौड़ता है धर्म का यह रथ नया।

           दिन नवल नूतन दिये, दे दिया संवत नया।

           विध्वंसकारी अणुव्रतों को दे दिया अणुव्रत नया।

           देश को गर्व है, उस पर गर्व है संसार को ।

           संसार भूलेगा नहीं, उसके विमल उपहार को।

           है वचन इस विश्व से लाडनूं के सन्त का

           हर अंधेरे से भिड़ेगा, सूर्य तेरापंथ का ।

           जय जय तुलसी सन्‍त जय जय तेरापंथ।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş