नेता कठोर लेकिन मोर्चा मुलायम

ये जो तीसरा मोर्चा बन रहा है, यह मुलायम होगा या कठोर? छह प्रांतीय दलों के इस मोर्चे की जान मुलायमसिंह यादव हैं, यह सभी जानते हैं। उत्तरप्रदेश में कभी एक नारा चला था। नाम मुलायम, काम कठोर! लेकिन इस बार यह मोर्चा कठोर बन पाएगा, इसमें संदेह दिखाई पड़ता है। जब 1977 में जनता पार्टी बनी थी, उस समय की आप जरा कल्पना करें। उस समय मुद्दे क्या-क्या थे और नेता कौन-कौन थे? और अब? अब न तो आपातकाल जैसा कोई देशव्यापी मुद्दा है, न बड़े-बड़े नेता जेलों से छूटकर आए हैं और न ही उनके छूटते ही अभी कोई चुनाव हो रहे हैं?

आजकल के सारे नेता मिलकर भी क्या एक जयप्रकाश नारायण के बराबर है? जयप्रकाशजी की बात जाने दें। क्या आज कोई नेता मोरारजी भाई, जगजीवनराम, राजनारायण या मधु लिमये या चंद्रशेखर के बराबर भी है? क्या तीसरे मोर्चे में एक भी नेता की कोई अखिल भारतीय पहुंच है? अगर सरल भाषा में कहें तो उस समय की दो अखिल भारतीय पार्टियों का जनता पार्टी में विलय हुआ था। आधी कांग्रेस और पूरा जनसंघ। इसके अलावा संसोपा का भी अखिल भारतीय आधार था।

अब जो प्रांतीय दल मिलकर मोर्चा बना रहे हैं, उनके पास आपातकाल जैसा कोई बड़ा मुद्दा है क्या? यदि मोदी साल-दो साल में 1975 की इंदिरा गांधी जैसा बन जाए तो जरूर उन्हें मुद्दा मिल सकता है लेकिन इसकी संभावना कम ही है, क्योंकि भाजपा पर संघ का अंकुश है। जिन मुद्दों को आज तीसरा मोर्चा उठा रहा है, काला धन, मनरेगा आदि ये सब अ-मुद्दे हैं। तीसरे मोर्चे का कौन सा नेता है, जो भाजपाइयों और कांग्रेसियों की तरह ही काले धन में गले-गले तक नहीं डूबा है? वास्तव में नेतागीरी और कालेधन का चोली-दामन का साथ है। फिर भी कुछ मुद्दे पकड़कर उन पर यदि सरकार को घेरने की कोशिश होगी तो शायद प्रतिपक्ष में कुछ प्राण-प्रतिष्ठा हो जाएगी।

इस तीसरे मोर्चे के कई नेता बड़े अनुभवी, कठोर और खुर्राट हैं। कई अपराधों में जेल की हवा भी खाए हुए हैं। उनकी चमड़ी काफी मोटी है। वे मोदी को द्रविड़ प्राणायाम भी करवा सकते हैं लेकिन कांग्रेस और भाजपा की तरह वे भी सिद्धांतहीन और विचारहीन हैं। उनके पीछे सिद्धांत और विचार की ताकत का अभाव है। जब सारे कुएं में ही भांग पड़ी हुई है तो तीसरे मोर्चे को क्या दोष दें? तीसरे मोर्चे के जो आंतरिक अन्तर्विरोध हैं, उनकी चर्चा हम पिछली टिप्पणी में कर ही चुके हैं। फिर भी यह मोर्चा यदि सशक्त बन सके तो देश उसका स्वागत करेगा, क्योंकि सबल प्रतिपक्ष के बिना सरकार के पटरी से उतरने का डर हमेशा बहुत ज्यादा होता है।

Comment:

betpark
betpark
betpark
betpark
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
bepark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
nitrobahis giriş
betcup giriş
betcup giriş
betcup giriş
betcup giriş
betorder giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betorder giriş
betorder giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
rekorbet giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
betpark giriş
vaycasino
vaycasino
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
tlcasino giriş
tlcasino giriş
timebet giriş
roketbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
roketbet giriş
yakabet giriş
meritking giriş
betorder giriş
betorder giriş
yakabet giriş
Alobet giriş
alobet güncel
Alobet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betorder giriş
bettilt giriş