कल्याण सिंहकल्याणसिंह ने ‘अधिनायक’ शब्द को हटाने की बात कहकर अपने आपको यहीं तक सीमित रखा है कि वह राष्ट्रगान में ‘अधिनायक’ शब्द को साम्राज्यवाद का प्रतीक मानते हैं। परंतु लेखक श्री सिंह को आगे तक घसीट कर ले गया। जैसे कि श्री सिंह ने बहुत बड़ा अपराध कर दिया है और आर.एस.एस. जैसे हिंदूवादी संगठन देश में केवल विवादास्पद बयान देने के लिए ही जाने जाते हैं। राज्यपाल ने ‘अधिनायक’ शब्द को हटाने की बात कहकर कई संकेत दिये हैं, उनमें से एक यह भी है कि जिन लोगों ने जन-गण-मन को हमारा राष्ट्रगान बनाया वे प्रारंभ से ही ब्रिटिश सत्ताधीशों की चाटुकारिता करते थे, इसलिए उन्होंने जब यह गीत गाया तो वह अपने ‘बॉस’ की वंदना में ही गाया था। इसलिए यह शब्द विदेशी गुलामी की मानसिकता को दर्शाता है, जो अब हमारे राष्ट्रगान में नही रहना चाहिए।

जिन लोगों को इस बात में संदेह है, वे कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन की कार्यवाही में पारित पहले प्रस्ताव को देखें, जो ब्रिटिश साम्राज्ञी की चाटुकारिता में कशीदे काढ़ते हुए यूं पारित किया गया था-‘‘यह कांग्रेस जिसमें देश भर के अनेक प्रतिनिधि सम्मिलित हैं, ब्रिटेन की साम्राज्ञी महारानी के प्रति अपनी कत्र्तव्यपरायणता तथा स्वाभिमान दिखाते हुए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देती हैं, उनकी अद्र्घशताब्दी की शासन पूर्ति के उपलक्ष्य में हम कामना करते हैं कि उनका शासन ब्रिटिश राज्य में बरसों तक हमें प्रसन्नता देता रहे।’’

1911 ई. में कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता में 26 दिसंबर, 28 दिसंबर तक चला था। इसमें पंजाब के निकट दिल्ली को राजधानी बनाये जाने पर स्वागत किया गया था। अगले दिन तार पढ़े गये तथा सम्राट को उनकी भावी यात्रा की शुभकामनाओं से भरा एक टेलीग्राम भेजा गया। बंग भंग को भारत सरकार द्वारा रद्द करने पर सम्राट और भारत सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गयी थी। श्री सुरेन्द्र नाथ बनर्जी जैसे लोगों ने इस अवसर पर ब्रिटिश शासकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी, विशेषत: वायसराय और सम्राट की।

जिन लोगों को ब्रिटिश भारत में ‘गैर वफादार’ माना जाता था वही क्रांतिकारी लोग कल्याणसिंह जैसे लोगों के आदर्श रहे हैं। इन ‘गैर वफादारों’ को कांग्रेसी चाटुकार लेखक चाहे जितना ‘गैर वफादार’ लिखें पर ये क्रांतिकारी ही थे, जिन्होंने कांग्रेस के स्वाभिमान को ललकारा था और जिसे सुनकर धीरे-धीरे कांग्रेस ने आंखें खोलनी आरंभ की थीं। 1905 ई. में लाला लाजपतराय राय ने 21 वर्ष की कांग्रेस की प्रस्ताव पास करने या ‘कीत्र्तिगान’ गाने की प्रवृत्ति को ललकारा और कहा-‘‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्घ अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा।’’

कांग्रेस के ‘राष्ट्रपिता’ गांधी के राजनीतिक गुरू रहे गोखले 1897 ई. में इंगलैंड में ‘वेलवी आयोग’ के समक्ष गवाही देने हेतु गये थे, वहीं से उन्होंने बंबई के गवर्नर के नाम पूना में फैली प्लेग से संबंधित एक पत्र ‘मैनचेस्टर गार्जियन’ अखबार में लिखा था। ‘कांग्रेस का इतिहास’ लेखक कहता है कि बाद में बंबई लौटने पर उन्हें गवर्नर से इस लेख के लिए माफी मांगनी पड़ी। तब तिलक ने गांधी के राजनीतिक गुरू को इस कृत्य के लिए खूब लताड़ा था। अमरावती कांग्रेस में तिलक ने गोखले के विरूद्घ विद्रोह तक करा दिया था।

कांग्रेस की स्थिति उस समय क्या थी? इसके लिए हेनरी विनसन का यह कथन पर्याप्त है-‘‘राजनीतिक ज्ञान प्राप्ति और प्रशिक्षण का कांग्रेस एक आधार मंच था। परंतु दो क्षेत्रों में कांग्रेस का असर दिखाई नही देता है-पहला भारत की तत्कालीन सरकार पर इसका कोई असर नही था, और दूसरे अंग्रेजों के (मूल देश) मत को भी यह असरदार ढंग से कतई प्रभावित नही कर पायी, इस बीस वर्षों में इसने बढिय़ा से बढिय़ा प्रस्ताव मात्र ही पास किये थे और राजा के पास प्रतिनिधिमंडल भेजे थे, प्राय: राजशाही ने कई अवसरों पर इनके प्रतिनिधिमंडलों से मिलना तक स्वीकार नही किया था। इंग्लैंड में तो लोग यह भी नही जानते थे, चार छह लोगों को छोडक़र कि कांग्रेस क्या है? कहां हर वर्ष सम्मेलन करती है? क्या बोलती है? उसकी क्या मांगें हैं? उसका क्या उद्देश्य है? इसे कोई जानता तक नही था इसलिए कोई कांग्रेस की परवाह भी नही करता था।’’

इसलिए कांग्रेस के पास अपने ‘अधिनायक’ की चरणवंदना करने के अतिरिक्त उस समय चारा ही क्या था? अत: ‘राज्यपाल, राष्ट्रगान और कॉमनसेंस’ के लेखक को चाहिए कि वह तत्कालीन परिस्थितियों में कांग्रेस के अस्तित्व की सर्वप्रथम समीक्षा करें कि क्या वह इतना साहस भी रखती थी कि ब्रिटिश ‘अधिनायक’ का विरोध कर लेती?

हिंदूवादी संगठनों ने कांग्रेस की इस प्रकार की नीतियों की आलोचना करते हुए सत्य और तथ्य को स्थापित कर देश को ‘इतिहासबोध’ देने का प्रयास किया है। इसलिए इन लोगों ने देश की उस बलिदानी परंपरा को देश की मुख्यधारा के रूप में मान्यता देने का प्रयास किया जिसके कारण यह देश जीवित रह सका और स्वतंत्र हुआ। इन लोगों ने कांग्रेस की ‘पराजित मानसिकता’ को देश के लिए घातक माना।

अंग्रेज न्यायाधीश ने एक क्रांतिकारी को सजा सुनाते हुए कहा कि तुम्हारे लिए दो सजाएं हैं-एक फांसी और दूसरा बीस वर्ष का कारावास।’’ बताओ कौन सी सजा चाहते हो? ‘‘फांसी’’….युवक ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया। ‘‘क्या तुम्हें जीवन प्रिय नही युवक? ऐसा क्यों कहते हो? उत्तर मिला-‘‘नही मुझे जीवन से अधिक देश प्यारा है। कल मरकर दोबारा जन्म लूंगा और बीस वर्ष बाद जवान होकर आततायी से फिर लड़ंगा। बीस वर्ष की सजा काटकर तो मैं वृद्घ हो जाऊंगा और मेरी संघर्षशक्ति समाप्त हो जाएगी। मेरी आंखों के सामने ही तुम मेरे देश को अन्याय के पाटों के बीच पीसते रहोगे।

दूसरे दिन बलिदान मुस्करा रहा था। …और उन बलिदानों के कारण ही आज भारत मुस्करा रहा है। स्पष्ट है कि ये बलिदान कांग्रेस के ‘अधिनायक’ के विरूद्घ दिये गये इसलिए कांग्रेस के लिए ये बलिदान कभी प्रिय नही रहे। ‘अधिनायक’ की चरणवंदना करने के कारण कांग्रेस अपना बलिदानी इतिहास नही बना पायी। इसलिए भी ‘अधिनायक’ शब्द हमारे राष्ट्रगान में शोभा नही देता।

Comment:

vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
Vaycasino Giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betasus giriş
betasus giriş
bahiscasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
ilbet giriş
betcio giriş
betvole giriş
betcio giriş
betcio giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betcio giriş
nakitbahis giriş
nakitbahis giriş
celtabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
celtabet giriş
celtabet giriş
trendbet giriş
trendbet giriş
betasus giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş